गुजरात में पेट्रोल-डीजल संकट, किसानों को नहीं मिल रहा डीजल, Arvind Kejriwal की बड़ी अपील
गुजरात में पेट्रोल और डीजल को लेकर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं... किसानों का कहना है कि उन्हें समय पर डीजल नहीं मिल रहा...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः देशभर में इन दिनों पेट्रोल और डीजल को लेकर चिंता बढ़ गई है.. खासकर गुजरात में पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं.. ट्रैक्टरों की लाइनें सुबह चार बजे से शुरू हो जाती हैं.. किसान भाई घंटों इंतजार करते हैं.. लेकिन डीजल नहीं मिल पाता.. खेती का मौसम चल रहा है.. मानसून आने वाला है.. लेकिन बिना डीजल के खेत कैसे तैयार होंगे.. इस समस्या ने पूरे राज्य में हलचल मचा रखी है..
गुजरात के कई जिलों जैसे साबरकांठा, अमरेली, जूनागढ़, राजकोट, बनासकांठा.. और सूरत में पेट्रोल-डीजल की कमी की शिकायतें आ रही हैं.. किसान बताते हैं कि ट्रैक्टर भरवाने के लिए उन्हें 1 किलोमीटर लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है.. कई जगहों पर पंप मालिक सीमित मात्रा में ही डीजल दे रहे हैं.. सरकार ने किसानों के लिए 200 लीटर तक की सीमा तय कर दी है.. ताकि स्टॉक पर ज्यादा दबाव न पड़े..
आपको बता दें कि किसान कहते हैं कि हमारे खेतों में कपास की तैयारी चल रही है.. डीजल नहीं मिला तो बुवाई कैसे होगी.. पूरे दिन धूप में लाइन में खड़े रहते हैं.. फिर भी पूरी टंकी नहीं भर पाते.. ट्रक ड्राइवर और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोग भी परेशान हैं.. निजी बसों के रूट कम हो गए हैं.. कई जगह किसानों और ट्रक ड्राइवरों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया.. अमरेली में ट्रैक्टरों से राजुला-सावरकुंडा रोड को रोका गया.. जूनागढ़ में आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया ने ऊंट और बैलगाड़ी के साथ प्रदर्शन किया..
वहीं सरकार का कहना है कि पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है.. पेट्रोलियम मंत्रालय और गुजरात सरकार ने बार-बार आश्वासन दिया है कि स्टॉक पर्याप्त है.. लेकिन अफवाहों और पैनिक बाइंग यानी घबराकर ज्यादा खरीदारी करने की वजह से स्थानीय स्तर पर समस्या पैदा हो रही है.. ईरान-इजराइल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती दिक्कतों की वजह से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आया है.. जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है.. खेती भारत की रीढ़ है और गुजरात में खेतीबाड़ी का दायरा बहुत बड़ा है.. खरीफ सीजन शुरू होने वाला है.. किसान नेताओं का कहना है कि सरकार को कृषि क्षेत्र के लिए अलग कोटा बनाना चाहिए.. और ग्रामीण इलाकों में सप्लाई बढ़ानी चाहिए.. उनका आरोप है कि फिलहाल शहरों और हाईवे वाले इलाकों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है..
आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है.. और उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा, “पूरे देश में तेल-गैस के बढ़ते दामों.. और किल्लत से हाहाकार मचा हुआ है.. गुजरात में पेट्रोल पंपों पर ट्रैक्टरों की लंबी लाइनें लगी हैं.. किसान डीजल नहीं मिलने से परेशान हैं.. केजरीवाल ने आगे कहा कि रूस और ईरान भारत को सस्ते दामों पर तेल और गैस देने को तैयार हैं.. लेकिन भारत सरकार उसे खरीदने को तैयार नहीं है.. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि सस्ता तेल खरीदकर देश की जनता को राहत दी जाए..
और उन्होंने जनता से भी सवाल पूछा कि क्या भारत सरकार को रूस और ईरान से सस्ता तेल.. और गैस खरीदना चाहिए? उन्होंने लोगों से कमेंट और मैसेज के जरिए अपनी राय देने की अपील की.. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है.. अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत तेल भारत विदेशों से मंगाता है.. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारत को काफी सस्ता तेल दिया था.. इसी तरह ईरान भी सस्ते दामों पर तेल उपलब्ध करा सकता है..
पिछले कुछ वर्षों में रूस से तेल खरीदकर भारत ने अरबों डॉलर की बचत की थी.. रूसी तेल सस्ता होने की वजह से रिफाइनरी कंपनियों को भी अच्छा मुनाफा हुआ.. हालांकि अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हुए हैं.. ऐसे में भारत अगर रूस से ज्यादा तेल खरीदता है.. तो अमेरिका की नाराजगी बढ़ सकती है.. पहले भी ट्रंप प्रशासन की तरफ से टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी जा चुकी है.. ईरान पर भी कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू हैं.. वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बना हुआ है.. जो दुनिया में तेल सप्लाई का एक बड़ा मार्ग माना जाता है..



