बिजली कटने की हद हो गई! बिजली गुल होने पर टाॅर्च जलाकर किया इलाज, योगी सरकार की खुली पोल

बिजली चली गई, जनरेटर भी काम नहीं कर रहा था। अंधेरे में मरीज कराह रहे थे और डॉक्टर टॉर्च की रोशनी में इंजेक्शन दे रहे थे, घाव देख रहे थे।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में यूपी में ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाला हिसाब किताब चल रहा है। यहां विकास तो हुआ है लेकिन सिर्फ कागजों में। असली हकीकत जनता के सामने है।

आये दिन प्रदेश में एक से बढ़कर एक घटनाएं होती रहती हैं जिससे सूबे की सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। आये दिन बिजली कटने से जनता बेहाल है लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन मजाल है कि योगी सरकार उफ़ तक करे। खैर सरकार की इन्ही नाकामियों के बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसे देखकर आपको यह अंदाजा हो जाएगा कि इस राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था किस कदर खराब हो चुकी है। और स्वास्थय मंत्री ब्रेजश पाठक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं.

दरअसल यूपी के बलिया जिले के मनियर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। वहां डॉक्टर मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। बिजली चली गई, जनरेटर भी काम नहीं कर रहा था। अंधेरे में मरीज कराह रहे थे और डॉक्टर टॉर्च की रोशनी में इंजेक्शन दे रहे थे, घाव देख रहे थे। इस वीडियो के वायरल होने के बाद पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया है।

लोग सीधा योगी और ब्रेजश पाठक पर ऊँगली उठा रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यही है विकास का मॉडल? यह सिर्फ एक छोटी घटना नहीं है। यह पूरे सिस्टम की पोल खोलती है। ग्रामीण इलाकों में लाखों गरीब लोग सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। वे सोचते हैं कि बीमार पड़ने पर यहां अच्छा इलाज मिलेगा। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। बिजली नहीं, दवाइयां नहीं, डॉक्टर कम, उपकरण खराब और सरकार चुप।

बीजेपी सरकार सालों से दावा करती है कि यूपी में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतरीन हो गई हैं। बड़े-बड़े हॉस्पिटल, आयुष्मान योजना, डिजिटल हेल्थ कार्ड की बातें की जाती हैं। लेकिन ग्राउंड रियलिटी देखें तो हालात दिन पर दिन बदतर होते जा रहे हैं। बलिया का यह मामला नया नहीं है। पहले भी कई बार ऐसे वीडियो आए हैं जहां बिजली न होने से प्रसव, ऑपरेशन या इमरजेंसी टॉर्च की रोशनी में हुई।

CM योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक पर सवाल उठ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि इतने साल सत्ता में रहने के बाद भी गांवों में बुनियादी चीजें क्यों नहीं पहुंचीं? सरकार करोड़ों रुपये स्वास्थ्य विभाग पर खर्च होने का दावा करती है। लेकिन पैसा कहां जा रहा है? बड़े शहरों में दिखावे के हॉस्पिटल बन रहे हैं, लेकिन गांव के PHC में अंधेरा छाया रहता है।

डॉक्टर और स्टाफ भी परेशान हैं। वे अपनी ड्यूटी निभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में हाथ-पैर बंधे रहते हैं। मरीजों को दर्द में तड़पना पड़ता है। गरीब परिवार प्राइवेट अस्पतालों में जाते हैं तो कर्ज में डूब जाते हैं। कुल मिलाकर यह घटना ग्रामीण यूपी की सच्चाई बयान करती है। विकास का ढिंढोरा पीटने वाले नेता गांवों की सड़कों, बिजली, पानी और स्वास्थ्य की ओर ध्यान ही नहीं देते। चुनाव आते हैं तो वादे किए जाते हैं – हर गांव में अच्छा अस्पताल, हर व्यक्ति को मुफ्त इलाज। लेकिन सत्ता मिलने के बाद सब भूल जाते हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं।

अमीर लोग प्राइवेट अस्पताल चले जाते हैं, लेकिन गरीबों के पास विकल्प नहीं। बच्चा बीमार हो, बुजुर्ग को दिल का दौरा पड़े या एक्सीडेंट हो जाए – सब सरकारी अस्पताल पर आते हैं। वहां अगर टॉर्च की रोशनी में इलाज हो रहा है तो विश्वास कैसे बनेगा? स्वास्थ्य मंत्री और CM को इस पर जवाब देना चाहिए। कितने और ऐसे मामले छिपे हुए हैं? काश ऐसे मामलों के सामने आने बाद योगी सरकार के कानों में जूं रेंगे और जनता की इस लाचारी के बारे में कोई ठोस कदम उठाए।

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