पेपर लीक पर AAP का बड़ा अल्टीमेटम, 48 घंटे में शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग 

आम आदमी पार्टी के नेता बृजराज सोलंकी ने गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के कथित पेपर लीक मामले को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.. जामनगर स्थित गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में सामने आए कथित पेपर लीक मामले ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है.. इस विवाद ने केवल छात्रों और अभिभावकों की चिंता नहीं बढ़ाई..बल्कि अब यह मामला राजनीतिक रूप भी ले चुका है.. इसी बीच आम आदमी पार्टी गुजरात के युवा मोर्चा अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता बृजराज सोलंकी ने गुजरात की शिक्षा मंत्री रिवाबा जडेजा पर सीधा निशाना साधते हुए बड़ा बयान दिया है.. उन्होंने कहा है कि शिक्षा मंत्री इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करें और 48 घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दें.. इतना ही नहीं उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर इस्तीफा नहीं दिया गया.. तो छात्रों के साथ मिलकर पूरे गुजरात में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा..

दरअसल 20 जुलाई 2026 को गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में बीएएमएस तृतीय व्यावसायिक वर्ष की शल्य तंत्र-1 विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी.. आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही व्हाट्सएप पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और टॉपिक तेजी से वायरल हो गए थे.. सबसे गंभीर दावा यह किया गया कि वायरल संदेश में मौजूद 12 बिंदुओं में से 11 प्रश्न लगभग उसी रूप में परीक्षा पत्र में पूछे गए..

यदि यह आरोप सही साबित होता है.. तो यह केवल एक सामान्य गड़बड़ी नहीं बल्कि परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल है.. यही कारण है कि छात्रों, अभिभावकों और विपक्षी दलों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है.. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक जांच समिति गठित कर दी है.. विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक एच. पी. झाला के अनुसार परीक्षा सामान्य रूप से संपन्न हुई थी.. लेकिन शाम को उन्हें जानकारी मिली कि परीक्षा से पहले कुछ संभावित प्रश्न मोबाइल फोन पर वायरल हुए थे.. इसके बाद कुलपति से चर्चा कर विशेष जांच समिति बनाई गई.. जिसे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है..

हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल जांच समिति बना देना पर्याप्त नहीं है.. उनका आरोप है कि हर बार इसी तरह जांच का आश्वासन दिया जाता है.. लेकिन दोषियों के खिलाफ समय पर कठोर कार्रवाई नहीं होती.. इसी मुद्दे को लेकर बृजराज सोलंकी ने बेहद तीखा बयान दिया है.. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की अंतिम जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री की होती है.. जब किसी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पेपर लीक जैसे गंभीर आरोप सामने आते हैं.. तब केवल जांच समिति बनाकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता..

सोलंकी ने कहा कि शिक्षा मंत्री रिवाबा जडेजा को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए.. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं दिया गया.. तो पूरे गुजरात में छात्र और युवा सड़कों पर उतरेंगे और व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे.. उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए एकजुट रहें.. उनके अनुसार यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों की है.. जो पूरी ईमानदारी और मेहनत से परीक्षा की तैयारी करते हैं..

सोलंकी ने कहा कि जब परीक्षा में गड़बड़ी होती है.. तब सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों का होता है.. जिन्होंने दिन-रात मेहनत की होती है.. दूसरी ओर कुछ लोग अनुचित तरीके से लाभ उठा लेते हैं.. ऐसी स्थिति में केवल दोषियों को पकड़ना ही काफी नहीं.. बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.. वहीं यह विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है.. पिछले कुछ वर्षों में देशभर में कई प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं.. नीट सहित कई बड़े मामलों ने पहले ही परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं.. अब गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी का नाम भी इसी तरह के विवाद में जुड़ने से छात्रों की चिंता और बढ़ गई है..

आपको बता दें कि जामनगर स्थित गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी देश के प्रतिष्ठित आयुर्वेद शिक्षण संस्थानों में शामिल है.. यहां से पढ़कर निकलने वाले डॉक्टर देशभर में अपनी सेवाएं देते हैं.. ऐसे संस्थान में यदि पेपर लीक के आरोप लगते हैं.. तो इसका असर केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहता.. बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है.. रिवाबा जडेजा अक्टूबर 2025 में गुजरात सरकार में शिक्षा मंत्री बनी थीं.. शिक्षा विभाग संभालने के बाद यह उनके कार्यकाल का पहला बड़ा विवाद माना जा रहा है.. विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में विफल रही है..

 

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