‘गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करें…गो हत्या करने वालों को फांसी  हो ‘, मुसलमानों की अपील से बीजेपी बेचैनी

बकरीद की नमाज के बाद कई जगहों पर ईदगाह में मुसलमानों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की। जयपुर, देहरादून, जैसलमेर, दरभंगा और दिल्ली जैसी जगहों पर मुस्लिम संगठनों ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन और हस्ताक्षर अभियान चलाए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बकरीद के मौके पर मुसलमानों में कुछ ऐसा किया जिससे भाजपा का दांव पूरी तरह से उल्टा पड़ गया है।

दरअसल गाय के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा की बोलती मुसलमानों ने यह कहते हुए बंद करवा दी कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाना चाहिए। अब सोचिये जिस गाय का मुद्दा मुसलमान से जोड़कर मुसलमानों को परेशान किया जाता था अब उसी मुद्दे पर भाजपा सरकार खुद ही फंसती हुई नजर आ रही है।

बकरीद की नमाज के बाद कई जगहों पर ईदगाह में मुसलमानों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की। जयपुर, देहरादून, जैसलमेर, दरभंगा और दिल्ली जैसी जगहों पर मुस्लिम संगठनों ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन और हस्ताक्षर अभियान चलाए। उन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्रपशु का दर्जा मिलना चाहिए ताकि देश में भाईचारा बढ़े और गोकशी पर विवाद खत्म हो। यह पहल सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल बन सकती थी, लेकिन BJP सरकार हैरान और चुप है।

BJP सालों से गाय को अपना राजनीतिक हथियार बनाती आई है। चुनावों में गौ-रक्षा का नाम लेकर वोट मांगती है, लेकिन जब मुसलमान खुद गाय की रक्षा की मांग कर रहे हैं तो BJP को परेशानी हो रही है। क्योंकि अगर गाय सच में राष्ट्रीय पशु बन गई तो BJP का धार्मिक ध्रुवीकरण का खेल खत्म हो जाएगा।

BJP की राजनीति गाय के नाम पर नफरत फैलाने, लिंचिंग और तनाव पैदा करने पर टिकी है। अब जब मुसलमान शांति का संदेश दे रहे हैं तो BJP के पास जवाब नहीं है। सरकार गाय की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की बात करती है, लेकिन असल में मुसलमानों पर दबाव बनाने का हथियार इस्तेमाल करती है। बकरीद के समय हर साल तनाव फैलाया जाता है। अब मुसलमान खुद आगे आकर कह रहे हैं कि गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दो, गोवंश की रक्षा के लिए एक समान कानून बनाओ।

यूपी में गो रक्षा को लेकर अब मुस्लिम समाज की ओर से भी बड़े स्तर पर इस तरह की मांगे तेज हो गई हैं. इससे पहले आगरा में भी ईद की नमाज़ के बाद ताजमहल की शाही मस्जिद में मुस्लिम महापंचायत ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग को लेकर प्रदर्शन किया और कहा कि गाय देश की संस्कृति और लोगों की आस्था का प्रतीक है. गाय की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए.

किस तरह प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह गाय को तुरंत राष्ट्रीय पशु घोषित कर दे. गाय भारतीय संस्कृति, सनातन आस्था और हमारे साझा सामाजिक मूल्यों का प्रतीक है. बहुसंख्यक समाज की आस्था का सम्मान करने की भी बात कही. इसके साथ ही गाय काटने वालों को फांसी की सजा दिए जाने के प्रावधान की भी मांग की.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि गाय को अगर राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाएगा तो इसके नाम पर होने वाली राजनीति और तमाम विवाद खुद ही खत्म हो जाएंगे. इसके साथ ही कहा कि गाय की वजह से मुस्लिम समुदाय के लोग अक्सर मॉब लिंचिंग के शिकार हो जाते हैं. कई बार बेगुनाह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है. इसके नाम पर अक्सर सियासी रोटियां सेकी जाती हैं. ऐसे में अगर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाएगा तो यह समस्याएं काफी हद तक खत्म हो सकती हैं.

इस प्रदर्शन में दर्जनों की संख्या में नमाजी शामिल थे. हालांकि, राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने इस प्रदर्शन पर कई सवाल उठाए और इसपर व्यंग्य किया. उन्होंने कहा कि जिस समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्हें अपने लोगों को गायों को काटने से रोकना चाहिए. गृह मंत्री के इस बयान को लेकर एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो सकता है.

दरअसल आपको बता दें कि इससे पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एएम) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग की थी। उनका कहा था कि इस विवाद को हमेशा के लिए खत्म किया जाए, ताकि गाय के नाम पर होने वाली ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं बंद हों।

संगठन की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, मौलाना मदनी ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार से सवाल किया कि जब देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे मां का दर्जा देती है, तो फिर ऐसी क्या राजनीतिक मजबूरी है कि सरकार उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने से बच रही है? उन्होंने दावा किया कि इन लोगों को गाय से वास्तविक श्रद्धा नहीं, बल्कि राजनीति से प्रेम है और राजनीति के जरिए लोगों को भड़काकर मुसलमानों के खिलाफ एकजुट किया जाता है और वोट हासिल किए जाते हैं।

मदनी ने कहा कि चुनाव के समय कई भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दे जानबूझकर उछाले जाते हैं, जिनमें गाय के नाम पर राजनीति भी शामिल है। मुस्लिम नेता ने कहा कि गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने पर मुस्लिम समुदाय को आपत्ति नहीं है, बल्कि वे तो सरकार के इस कदम स्वागत करेंगे, क्योंकि इस दिशा में कानून बन जाने के बाद गाय के नाम पर होने वाली ‘मॉब लिंचिंग’ और हिंसा बंद हो जाएगी। उन्होंने कहा, “यह मांग केवल हम नहीं कर रहे हैं, बल्कि अनेक साधु-संत भी लंबे समय से यह मांग उठा रहे हैं।

इसके बावजूद यदि सरकार इस विषय को गंभीरता से नहीं ले रही है, तो इसका क्या अर्थ निकाला जाए?” मदनी ने दावा किया कि गाय के मुद्दे को राजनीतिक और भावनात्मक विषय बना दिया गया है और कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से गोकशी की अफवाह फैलाकर या पशु तस्करी के नाम पर निर्दोष लोगों को हिंसा का शिकार बना देते हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि दुखद पहलू यह है कि लगातार झूठ और अफवाहों के जरिए पूरे देश में मुसलमानों की छवि इस तरह खराब कर दी गई है और समाज का एक बड़ा वर्ग मुसलमानों को गाय का विरोधी समझने लगा है।

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