UAE सरकार का बड़ा ऐलान, छुट्टी और सैलरी के नए नियम लागू, जानें प्रवासियों के नए अधिकार

संयुक्त अरब अमीरात में कर्मचारियों, खासकर प्रवासी कामगारों के लिए छुट्टी, वेतन... और रोजगार से जुड़े नियमों को लेकर महत्वपूर्ण बदलावों...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः संयुक्त अरब अमीरात दुनिया भर के लाखों प्रवासी कामगारों को रोजगार देता है.. भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, फिलीपींस.. और कई अन्य देशों से आए कर्मचारी अपनी मेहनत.. और कौशल से यूएई की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं.. ऐसे में यह जरूरी है कि कर्मचारियों को केवल बेहतर रोजगार ही नहीं.. बल्कि पर्याप्त आराम, मानसिक संतुलन और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर भी मिले.. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यूएई सरकार ने Federal Decree-Law No. 33 of 2021 लागू किया है.. इस कानून के तहत निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए वार्षिक अवकाश, वेतन, छुट्टियों के भुगतान.. और कर्मचारी अधिकारों से जुड़े स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं..

आपको बता दें कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना.. और नियोक्ता तथा कर्मचारी के बीच संतुलित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना है.. इन नियमों को लागू कराने और उनकी निगरानी करने की जिम्मेदारी Ministry of Human Resources and Emiratisation की है.. यह मंत्रालय सुनिश्चित करता है कि निजी क्षेत्र की सभी कंपनियां श्रम कानूनों का पालन करें.. और कर्मचारियों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो..

कानून के अनुसार यदि कोई कर्मचारी किसी निजी कंपनी में लगातार एक वर्ष की सेवा पूरी कर लेता है.. तो उसे 30 दिनों की पूर्ण सवेतन वार्षिक छुट्टी का अधिकार प्राप्त होता है.. यह छुट्टी पूरी तरह वेतन सहित होती है.. यानी कर्मचारी को छुट्टी के दौरान भी नियमित वेतन मिलता है.. इससे कर्मचारियों को आराम करने, अपने परिवार के साथ समय बिताने.. और मानसिक तथा शारीरिक रूप से तरोताजा होने का अवसर मिलता है..

हालांकि एक वर्ष पूरा होने से पहले भी कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं.. यदि किसी कर्मचारी ने छह महीने पूरे कर लिए हैं.. लेकिन अभी एक वर्ष पूरा नहीं हुआ है.. तो उसे हर महीने दो दिनों के हिसाब से आनुपातिक सवेतन छुट्टी मिलती है.. उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी ने आठ महीने तक काम किया है.. तो वह 16 दिनों की सवेतन छुट्टी का हकदार होगा.. वहीं, पहले छह महीनों के दौरान वार्षिक छुट्टी का अधिकार नहीं बनता.. वहीं यह व्यवस्था नए कर्मचारियों और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से बनाई गई है..

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि यूएई में वार्षिक छुट्टियां कैलेंडर दिनों के आधार पर गिनी जाती हैं.. इसका अर्थ है कि छुट्टी की अवधि में आने वाले वीकेंड भी छुट्टी का हिस्सा माने जाते हैं.. वहीं, पार्ट-टाइम कर्मचारियों के लिए भी छुट्टियों का प्रावधान है.. लेकिन उनकी छुट्टियां उनके कार्य घंटों.. और अनुबंध की शर्तों के अनुसार आनुपातिक रूप से निर्धारित की जाती हैं..

आपको बता दें कि यह कानून केवल यूएई के नागरिकों तक सीमित नहीं है.. बल्कि निजी क्षेत्र में कार्यरत सभी प्रवासी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होता है.. चाहे वे किसी भी देश के नागरिक हों.. सभी कंपनियों के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है.. पहले लागू श्रम कानून की तुलना में नया कानून अधिक स्पष्ट, पारदर्शी.. और कर्मचारी-अनुकूल माना जाता है..

छुट्टियों की तिथि तय करने का अधिकार सामान्यतः नियोक्ता के पास होता है.. क्योंकि उसे कंपनी की कार्य आवश्यकताओं.. और संचालन को भी ध्यान में रखना पड़ता है.. हालांकि, कानून यह भी कहता है कि.. छुट्टियों का निर्धारण करते समय कर्मचारी से उचित परामर्श किया जाए.. और उसे कम-से-कम एक महीने पहले सूचना दी जाए.. इससे कर्मचारी अपनी यात्रा, पारिवारिक कार्यक्रम या अन्य व्यक्तिगत योजनाएं पहले से बना सकता है..

यदि कंपनी में कर्मचारियों की संख्या अधिक हो.. तो छुट्टियां रोटेशन प्रणाली के आधार पर दी जा सकती हैं.. ताकि कंपनी का काम प्रभावित न हो.. लेकिन किसी भी स्थिति में कर्मचारी के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती.. एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि कर्मचारी को उसकी छुट्टी शुरू होने से पहले ही छुट्टी अवधि का पूरा वेतन भुगतान कर दिया जाना चाहिए..

यदि कर्मचारी की वार्षिक छुट्टी के दौरान कोई आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश पर आता है.. तो उसका प्रावधान कानून और रोजगार अनुबंध की शर्तों के अनुसार लागू होता है.. इसलिए कर्मचारियों को अपनी कंपनी की अवकाश नीति और रोजगार अनुबंध को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए.. कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी नियोक्ता किसी कर्मचारी को लगातार दो वर्षों तक वार्षिक छुट्टी लेने से नहीं रोक सकता.. यदि किसी कारणवश कर्मचारी अपनी छुट्टियां नहीं ले पाता, तो कंपनी को कानून.. और आपसी सहमति के अनुसार आगे की व्यवस्था करनी होती है.. इस प्रावधान का उद्देश्य कर्मचारियों को लगातार बिना आराम के काम करने से बचाना.. और उनके स्वास्थ्य तथा कार्य क्षमता की रक्षा करना है..

 

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