बांदा में भूमिधर की जमीन पर निर्माण का खेल! शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

बांदा के ग्राम डिघवट निवासी राजेश द्विवेदी ने अपनी भूमिधरी जमीन पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग की है। कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जमीन विवाद और अवैध कब्जे के मामलों को लेकर अक्सर प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में रहती है। ताजा मामला बांदा जिले के ग्राम डिघवट से सामने आया है, जहां एक भूमिधर ने अपनी कृषि भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण कराए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो राजस्व विभाग ने मौके का निरीक्षण किया और न ही निर्माण कार्य रुकवाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया।

भूमिधरी भूमि पर जबरन निर्माण का आरोप

ग्राम डिघवट निवासी राजेश द्विवेदी ने जिलाधिकारी बांदा को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि गांव के कुछ लोग उनकी भूमिधरी भूमि पर जबरन निर्माण कार्य करा रहे हैं। उनका कहना है कि संबंधित लोगों द्वारा लगातार निर्माण कराया जा रहा है, जिससे उनकी भूमि पर कब्जे की आशंका बढ़ गई है। पीड़ित के अनुसार उन्होंने इस मामले में सबसे पहले 21 मई को उपजिलाधिकारी सदर को शिकायत दी थी। इसके बाद 26 मई को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर भी लिखित शिकायत सौंपी और मामले में हस्तक्षेप की मांग की। बावजूद इसके अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

मौके पर नहीं पहुंचे राजस्व कर्मी

राजेश द्विवेदी का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी राजस्व विभाग की ओर से न तो भूमि का स्थलीय निरीक्षण कराया गया और न ही संबंधित लेखपाल मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच कराई जाती तो विवाद की स्थिति को बढ़ने से रोका जा सकता था। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उनकी भूमि पर हो रहे कथित अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।

विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचा मामला

पीड़ित ने दावा किया है कि उनकी शिकायत उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना तक पहुंच चुकी है। उनके अनुसार विधानसभा अध्यक्ष के स्तर से मामले को जांच के लिए जिलाधिकारी बांदा को भेजा गया है। इसके बावजूद अभी तक जमीनी स्तर पर कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन या राजस्व विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

भूमि विवादों में समय पर कार्रवाई जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि विवादों और कब्जे से जुड़े मामलों में समय रहते राजस्व विभाग द्वारा स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच बेहद आवश्यक होती है। इससे विवाद के बढ़ने की संभावना कम होती है और संबंधित पक्षों को समय पर न्याय मिल सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

रिपोर्ट – इक़बाल खान

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