उन्नाव: मीटिंग में बैठे थे अधिकारी, तभी DM ने बुला ली पुलिस… और हो गई गिरफ्तारी!

उन्नाव के विकास भवन में समीक्षा बैठक के दौरान डीएम घनश्याम मीना ने NRLM योजना में 11 लाख रुपये के गबन के आरोपी ब्लॉक मिशन मैनेजर दीपराज को गिरफ्तार करा दिया। मामले में पहले से एफआईआर दर्ज थी। प्रशासन ने अन्य दोषियों पर भी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  उन्नाव में प्रशासनिक सख्ती का एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सरकारी महकमे में हलचल मचा दी। विकास भवन सभागार में चल रही एक समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने फर्जी समूहों के गठन और लाखों रुपये के गबन के आरोपी ब्लॉक मिशन मैनेजर (BMM) को देखकर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दे दिए। डीएम के आदेश के बाद पुलिस ने आरोपी को बैठक से ही हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद विकास भवन में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का माहौल बन गया। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई को सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

11 लाख रुपये के गबन का है आरोप

जानकारी के अनुसार पुरवा तहसील में तैनात ब्लॉक मिशन मैनेजर दीपराज पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) योजना के तहत फर्जी स्वयं सहायता समूहों का गठन कर करीब 11 लाख रुपये के गबन का आरोप है। इस मामले में बीते माह तत्कालीन जिलाधिकारी गौरांग राठी के निर्देश पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि शिकायतों और जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी।

एफआईआर के बावजूद नियमित रूप से कर रहा था काम

सूत्रों के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी ब्लॉक मिशन मैनेजर नियमित रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा था। इस दौरान उसके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल भी उठ रहे थे। इसी बीच विकास भवन में आयोजित बैठक में जब डीएम घनश्याम मीना की नजर आरोपी पर पड़ी तो उन्होंने मामले की जानकारी ली। एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपी की मौजूदगी पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से संपर्क किया और कार्रवाई के निर्देश दिए।

पुलिस ने बैठक से ही लिया हिरासत में

डीएम के निर्देश के बाद सदर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी दीपराज को हिरासत में ले लिया। प्रशासनिक बैठक के दौरान हुई इस कार्रवाई ने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चौंका दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार्रवाई इतनी तेजी से हुई कि बैठक में मौजूद कई लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। देखते ही देखते पुलिस आरोपी को अपने साथ लेकर चली गई।

अन्य कर्मचारियों पर भी गिरेगी कार्रवाई की गाज

जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी। उन्होंने खंड विकास अधिकारी (BDO) पुरवा को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि गबन मामले में संलिप्त सभी कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही जिन लोगों की भूमिका जांच में सामने आए, उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराकर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता पर प्रशासन का जोर

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

रिपोर्ट – रंजन बाजपई

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