लेबनान पर हमले, कांग्रेस ने उठाये पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल?
ईरान इजरायल तीसरे चरण की युद्ध की शुरूआत!

भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पडऩा तय, बदलना होगा लाइफ स्टाइल
कांग्रेस बोली पीएम मोदी को मदरलैंड नहीं बल्कि तथाकथित फादरलैंड की ज्यादा चिंता
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बीती रात इजरायल द्वारा बेरूत स्थित हिजबुल्ला के ठिकानों पर किये गये भयंकर हमलों के बाद इजरायल ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वर्ता को रोक दिया है और सभी प्रकार की बातचीत से अलग हटकर जंग को अगले पड़ाव की ओर ले जाने का एलान कर दिया है। ईरान के इस रूख के बाद ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच जारी जंग के तीसरे चरण में पहुंच चुकी है। मध्य पूर्व से आ रही खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तूफान आ चुका है जिसका असर विश्व अर्थव्यवस्था पर पडऩा लाजमी है।
शांति वर्ता के आगे बडऩे से तेल की कीमतों में नमी आयी थी और हमने बस राहत की सांस लेना शुरू ही की थी। आर्थिक जानकारों का कहना है कि तीसरे चरण की जंग का असर भारत पर सीधे पड़ेगा और स्थितियां और नाजुक हो सकती है। ऐसे में एक्सपर्ट का यही कहना है कि डरना मना है और सयंमित जीवन जीने की आदत डाल लेना चाहिए।
राज्यसभा सदस्य और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने लेबनान पर इजरायल के हमलों की निंदा की है। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने इजरायल की ओर से लेबनान को तबाह करने और अमेरिका-ईरान समझौते को पटरी से उतारने की कोशिशों पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है। ऐसे किसी समझौते का तत्काल प्रभाव होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और तेल की कीमतों पर दबाव कम होने के रूप में सामने आएगा और इन दोनों मुद्दों से भारत के बड़े हित जुड़े हुए हैं। जयराम रमेश के मुताबिक यह बातचीत अब तक अंतिम रूप नहीं ले सकी है जिसकी मुख्य वजह लेबनान में इजरायल की जारी सैन्य कार्रवाई है जिसमें अभूतपूर्व घुसपैठ देखने को मिली है। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर बेहद नाराजगी और गुस्सा जाहिर किया है यहां तक कि अपशब्दों का इस्तेमाल भी किया है। दुनिया के कई अन्य देशों ने भी लेबनान में इजरायल के हमले की निंदा की है। जयराम रमेश ने पोस्ट में लिखा कि हैरानी की बात नहीं कि जिस एक सरकार के मुखिया ने इजरायल की ओर से लेबनान को तबाह करने और अमेरिका-ईरान समझौते को पटरी से उतारने की कोशिशों पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। क्या तथाकथित फादरलैंड उनके लिए उनकी असली मदरलैंड से कहीं ज्यादा मायने रखती है।

ईरान ने अमेरिका के साथ रोक दी बातचीत
ईरान ने एलान किया है कि वह अमेरिका के साथ मीडिएटर के जरिए मैसेज का लेन-देन रोक रही है। तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक तेहरान की बातचीत करने वाली टीम लेबनान पर हमलों की वजह से अमेरिका के साथ मीडिएटर के जरिए मैसेज का लेन-देन रोक रही है। ईरानी न्यूज एजेंसी ने कहा है कि ईरान और रजिस्टेंस फ्रंट जिसमें यमन, लेबनान और इराक में उसके शिया साथी शामिल हैं ने इजरायल और उसके समर्थकों को सजा देने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से ब्लॉक करने और बाब अल मंडेब स्ट्रेट समेत दूसरे फ्रंट्स को सक्रिय करने का एजेंडा बनाया है। अगर यमन में ईरान के प्रॉक्सी हूती लड़ाई में एक नया फ्रंट खोलते हैं तो एक साफ टारगेट यमन के तट पर बाब अल मंडेब स्ट्रेट होगा। यह एक अहम शिपिंग चोकपॉइंट और पतला रास्ता है जो स्वेज कैनाल की ओर समुद्री ट्रैफिक को नियंत्रित करता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान में इजरायली ऑपरेशन का जिक्र करते हुए कहा है कि एक मोर्चे पर नहीं सभी मोर्चों पर सीजफायर का उल्लंघन है। किसी भी उल्लंघन के नतीजों के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार हैं। तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार ईरान की सेंट्रल मिलिट्री कमांड खतम अल-अनबिया ने उत्तरी इजरायल में रहने वाले लोगों को चेतावनी दी है कि अगर वह नुकसान नहीं चाहते हैं तो इलाका खाली कर दें। आउटलेट ने ब्रिगेडियर जनरल अली अब्दुल्लाही के हवाले से कहा है कि सरकार द्वारा सीजफायर के बार-बार उल्लंघन को देखते हुए हम उत्तरी सेक्टरों और कब्जे वाले इलाकों में मिलिट्री बस्तियों के निवासियों को चेतावनी देते हैं कि अगर वह नुकसान नहीं चाहते हैं तो उन्हें इलाका खाली कर देना चाहिए।
इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया
हिज्बुल्लाह को खत्म करने के इरादे से इजरायल की सेना ने दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। आईडीएफ के इस ऑपरेशन को आईडीएफ के चीफ ऑफ स्टाफ ईयाल जमीर ने मंजूरी दी थी। अभियान से पहले उत्तरी कमान के नेतृत्व में गोलाबारी की तैयारी और अन्य परिचालन तैयारियां व्यवस्थित रूप से पूरी की गईं। इस अभियान का संदेश साफ है कि इजरायल अब सीमा पर खतरे को सिर्फ रोकना नहीं बल्कि उसको खत्म करना चाहता है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई है या फिर उस लंबे संघर्ष की शुरुआत जो पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है? हिज्बुल्लाह कोई साधारण संगठन नहीं है। वर्षों से इसे ईरान समर्थित क्षेत्रीय शक्ति के रूप में देखा जाता रहा है। इसके पास प्रशिक्षित लड़ाके, मिसाइल नेटवर्क और सीमावर्ती इलाकों में गहरी पकड़ है। ऐसे में दक्षिणी लेबनान में इजरायली दबाव बढऩे का अर्थ सिर्फ दो पक्षों की भिड़ंत नहीं बल्कि व्यापक क्षेत्रीय तनाव का जोखिम भी है। युद्ध की सबसे खतरनाक बात यह होती है कि वह हमेशा अपने घोषित लक्ष्य तक सीमित नहीं रहता। एक मोर्चा खुलता है दूसरा अपने आप बन जाता है। एक मिसाइल दागी जाती है जवाब में कई और आती हैं। यही कारण है कि दुनिया की निगाहें अब दक्षिणी लेबनान पर टिक गई हैं। यदि अभियान लंबा खिंचता है तो इसका असर सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, तेल बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी दबाव बढ़ सकता है। पहले से तनावग्रस्त मध्य पूर्व में किसी भी बड़े सैन्य विस्तार के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। फिलहाल इजरायल ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है कि सीमा पर मौजूद खतरे को स्वीकार करने के बजाय उसे चुनौती देना। लेकिन इतिहास गवाह है कि लेबनान की धरती पर शुरू होने वाले संघर्ष अक्सर अनुमान से अधिक जटिल और लंबे साबित हुए हैं।
इबोला संक्रमित देशों से लौटें तो खुद को आइसोलेट करें
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को इबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर व्याप्त भय के बीच एक नई सलाह जारी की, जिसमें प्रभावित देशों से यात्रा करने वाले या वहां से होकर गुजरने वाले लोगों से खुद को अलग-थलग करने का आग्रह किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक विस्तृत बयान में स्पष्ट किया कि भारत में इबोला का कोई पुष्ट मामला नहीं है।
मंत्रालय ने कहा कि इबोला प्रभावित देशों की यात्रा करने वाले और कुछ विशेष लक्षण विकसित होने पर लोगों को खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित करना चाहिए। सलाह में कहा गया है कि यदि आपने पिछले 21 दिनों में इबोला प्रभावित देश से यात्रा की है या वहां से होकर गुजरे हैं और आपको बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त या बिना कारण रक्तस्राव आदि जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो खुद को आइसोलेट कर लें और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित करें। सरकार ने सहायता के लिए धिकारियों से संपर्क करने हेतु एक हेल्पलाइन नंबर – 175०- भी साझा किया है। बयान में कहा गया है कि जल्दी सूचना देने से जानें बचाई जा सकती हैं और बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है।सरकार द्वारा डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे देशों की यात्रा से बचने की सलाह जारी करने के कुछ दिनों बाद यह नई सलाह आई है। पिछले कुछ हफ्तों से भारत समेत पूरी दुनिया में इबोला वायरस के प्रकोप को लेकर चिंता बनी हुई है। हालांकि, गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने हाल ही में आशंकाओं को शांत करते हुए पुष्टि की है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से आए एक यात्री की संदिग्ध जांच में वायरस की पुष्टि नहीं हुई है।
10 दिन देर से भारत पहुंचेगा मॉनसून
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मॉनसून के भारत में दस्तक देने में अभी और देरी हो सकती है। मौसम विभाग ने शुरुआती पूर्वानुमान में 26 मई की तारीख दी थी, जो अब बढक़र 4 जून हो गई है, यानी मॉनसून आने में 1० दिन की देरी हो सकती है। भारत मौसम विभाग के ताजा अनुमानों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 4 जून के आसपास केरल पहुंच सकता है।
अगर मॉनसून की बारिश केरल पहुंचने में देरी हुई तो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा जैसे उत्तर भारत के इलाकों में भी बरसात आने का इंतजार और बढ़ जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के जून के पहले हफ्ते में केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों के अलावा साउथ वेस्ट और साउथ ईस्ट अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप, बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों और बंगाल की खाड़ी के शेष हिस्सों में आगे बढ़ रहा है। इससे पहले 15 मई को मॉनसून के आगमन पर पूर्वानुमान में कहा था कि ये 26 मई को केरल पहुंच सकता है। मॉनसून सीजन 1 जून के आसपास आता है। पिछले साल मॉनसून 1 जून 25 से 8 दिन पहले ही 24 मई को ही केरल तट पर पहुंच गया था। मॉनसून ने औसत से 9 दिन पहले 29 जून तक पूरे देश को कवर भी कर लिया था. भारत मौसम विभाग ने इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है। देशभर में औसत के 9० फीसद बारिश होने की संभावना है. बारिश में कमी आने की संभावना भी 6० फीसदी जाहिर की थी. भारत में उत्तर भारत और मध्य भारत के साथ पश्चिम भारत का बड़ा हिस्सा मॉनसून की बारिश पर निर्भर करता है. इसका सीधा असर खरीफ सीजन के दौरान फसलों की बुआई पर पड़ता है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके 6 को आएंगे भारत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घोषणा की कि वे 6 जून को भारत लौटेंगे और नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह विरोध प्रदर्शन दिपके की भारत की पहली यात्रा होगी, जब से उन्होंने इस व्यंग्यात्मक राजनीतिक संगठन की शुरुआत की है, जिसे सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रियता मिली है।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि सभी को नमस्कार, मैंने भारत लौटने का फैसला किया है। जी हां, मैं अपने देश, अपने घर, भारत लौट रहा हूं, ताकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर सकूं। आप कई दिनों से देख रहे हैं कि हम सोशल मीडिया पर आवाज उठा रहे हैं कि पेपर लीक, नीट परीक्षा में आत्महत्या करने वाले बच्चों और लाखों छात्रों की मेहनत के व्यर्थ जाने के कारण धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम सभी भारत के संविधान के मार्ग पर चलते हुए एकजुट हों और शांतिपूर्वक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाएं। अगर हम सब मिलकर आवाज उठाएंगे, तो उन्हें हमारी बात जरूर सुननी पड़ेगी।
स्वेच्छा से देह व्यापार करने वाली महिलाओं के लिए सुप्रीम राहत
शीर्ष कोर्ट बोली-हर मामले को एक ही नजरिये से नहीं देखा जा सकता
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने देह व्यापार, मानव तस्करी और वयस्क यौनकर्मियों के अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि हर मामले को एक ही नजरिये से नहीं देखा जा सकता।
अदालत ने अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम के तहत चल रही कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वेच्छा से देह व्यापार करने वाली वयस्क महिलाओं, तस्करी का शिकार महिलाओं और दबाव या हिंसा के कारण इस दलदल में धकेली गई महिलाओं को एक ही श्रेणी में रखकर देखना अन्यायपूर्ण है। न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी महिला को केवल इसलिए अपराधी नहीं माना जा सकता क्योंकि वह देह व्यापार से जुड़ी हुई है।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए एक विस्तृत पीड़ित संरक्षण योजना जारी की है। इस योजना में मानव गरिमा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों को केंद्र में रखा गया है।
अदालत ने साफ कहा कि यौनकर्मियों के अधिकार हो सकते हैं, भले ही देह व्यापार करने का कोई मौलिक अधिकार न हो। यह टिप्पणी भारतीय न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है, जहां पहली बार व्यक्तिगत इच्छा और स्वायत्तता को इतनी स्पष्टता से स्वीकार किया गया है।
करीब तीन सौ पृष्ठों के इस फैसले में अदालत ने माना कि वर्तमान कानून में सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह तस्करी और स्वेच्छा से किए जा रहे देह व्यापार के बीच स्पष्ट भेद नहीं करता। न्यायालय ने कहा कि कानून की इसी कमजोरी के कारण तस्करी की शिकार महिलाएं, बाद में स्वेच्छा से इस पेशे में बनी रहने वाली महिलाएं और अपनी इच्छा से यह काम चुनने वाली महिलाएं, सभी को एक जैसी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इससे न केवल भ्रम पैदा होता है बल्कि स्वेच्छा से काम कर रही महिलाओं को भी सामाजिक अपमान, पुलिस उत्पीडऩ और कानूनी असुरक्षा झेलनी पड़ती है।



