AAP की शिक्षा क्रांति से बदला पंजाब, अब गुजरात पूछ रहा, बीजेपी ने 30 साल में क्या किया?

पंजाब में सरकारी स्कूलों की बदली तस्वीर, शिक्षा मॉडल बना पूरे देश में मिसाल... अब गुजरात की जनता पूछ रही है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारत में शिक्षा हमेशा से विकास का आधार मानी जाती रही है.. अच्छी स्कूली शिक्षा न सिर्फ बच्चों के भविष्य को संवारती है.. बल्कि पूरे राज्य और देश की प्रगति को गति देती है.. हाल ही में पंजाब ने इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है.. नीति आयोग की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार.. पंजाब स्कूली शिक्षा व्यवस्था में देश का नंबर 1 राज्य बन गया है.. यह खबर दिल्ली के बाद आम आदमी पार्टी के लिए दूसरी बड़ी सफलता है..

जब 2022 में भगवंत मान की अगुवाई में AAP की सरकार बनी.. तब पंजाब की स्कूली शिक्षा 27वें स्थान पर थी.. अकाली दल-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस की पिछली सरकारों में शिक्षा व्यवस्था काफी खराब हो गई थी.. सरकारी स्कूलों की हालत जर्जर थी, शिक्षक कम थे.. बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं.. और पढ़ाई का स्तर गिर गया था.. लेकिन AAP सरकार के आने के बाद स्थिति बदली.. चार साल में पंजाब ने जो उपलब्धियां हासिल कीं, वे सराहनीय हैं..

पंजाब भारत का एक समृद्ध राज्य रहा है.. यहां की मिट्टी उपजाऊ है.. लोग मेहनती हैं और शिक्षा पर हमेशा जोर दिया जाता रहा है.. लेकिन 2010 के दशक में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ने लगी.. 2017-18 में पंजाब 22वें स्थान पर था.. फिर 2018-19 में 13वें पर पहुंचा.. लेकिन 2020 तक फिर 27वें पर चला गया.. सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने लगी थी.. माता-पिता प्राइवेट स्कूलों की ओर जाने लगे थे..

पिछली सरकारों पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया.. बजट कम था, शिक्षकों की भर्ती रुकी रही.. स्कूलों की मरम्मत नहीं हुई और पढ़ाई का स्तर गिरता गया.. ग्रामीण इलाकों में हालत और खराब थी.. बच्चे स्कूल जाते तो थे.. लेकिन बुनियादी पढ़ाई भी ठीक से नहीं सीख पाते थे.. भाषा और गणित जैसे विषयों में प्रदर्शन कमजोर था.. 2022 में AAP सरकार बनते ही शिक्षा को प्राथमिकता दी गई.. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकारी स्कूल ही मुख्य फोकस होंगे.. सरकार ने शिक्षा बजट को दोगुना कर दिया.. हजारों नए शिक्षकों की भर्ती की गई.. स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं विकसित की गईं..

नीति आयोग की 2026 की रिपोर्ट में पंजाब ने केरल जैसे पारंपरिक टॉप राज्य को भी पीछे छोड़ दिया.. क्लास 3 में भाषा में 82% और गणित में 78% प्रोफिशिएंसी दर्ज की गई.. जो केरल से बेहतर है.. लगभग सभी स्कूलों में बिजली, कंप्यूटर और इंटरनेट उपलब्ध है.. 80% से ज्यादा स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम हैं.. छात्र-शिक्षक अनुपात 22:1 है.. जो अच्छा माना जाता है.. सरकार ने 19,000 स्कूलों पर काम किया.. 10,000 से ज्यादा नए क्लासरूम बनाए गए.. 14,000 किलोमीटर बाउंड्री वॉल बनाई गई.. 95,000 ड्यूल डेस्क लगाए गए.. लगभग हर स्कूल में अब बाउंड्री वॉल है.. शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई.. यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी.. परिणामस्वरूप प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों में बच्चे वापस लौटने लगे.. 8,900 से ज्यादा बच्चे प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में आए..

आपको बता दें कि यह बदलाव रातोंरात नहीं हुआ.. सरकार ने मिशन मोड में काम किया.. स्कूलों को आकर्षक बनाने के लिए पेंटिंग, खेल के मैदान, लाइब्रेरी.. और साफ-सफाई पर जोर दिया गया.. शिक्षकों को प्रोत्साहित किया गया.. नतीजा यह हुआ कि नेशनल अचीवमेंट सर्वे.. और नीति आयोग की रिपोर्ट में पंजाब टॉप पर पहुंच गया.. AAP समर्थक इसे क्रांति कहते हैं.. उनका कहना है कि चार साल में जो काम हुआ.. वह पिछले दशकों में नहीं हुआ.. लेकिन विपक्षी पार्टियां कहती हैं कि सुधार पहले से ही चल रहे थे.. 2017-18 से पंजाब की रैंकिंग में सुधार दिख रहा था.. NAS 2021 में भी अच्छा प्रदर्शन था.. हालांकि AAP ने तब कुछ रिपोर्ट्स को फर्जी बताया था.. अब वे उसी को अपनी उपलब्धि बता रहे हैं..

सच्चाई शायद बीच में है.. पिछली सरकारों ने कुछ आधार तैयार किया.. लेकिन AAP ने उसे तेजी से आगे बढ़ाया.. बजट बढ़ाना, शिक्षक भर्ती और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करने का असर दिखा.. पंजाब में सरकारी स्कूल अब आकर्षक लगते हैं.. बच्चे ज्यादा नियमित रूप से आते हैं और बेहतर सीख भी रहे हैं.. अब सवाल यह उठता है कि अगर पंजाब में 4 साल में इतना बदलाव हो सकता है.. तो गुजरात में भाजपा के 30 साल के शासन में ऐसा क्यों नहीं हुआ..

गुजरात को विकास का मॉडल कहा जाता है.. अच्छी सड़कें, उद्योग और बिजली व्यवस्था वहां की ताकत हैं.. लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में यह राज्य लगातार टॉप पर नहीं रहा.. नीति आयोग की विभिन्न रिपोर्ट्स में गुजरात मध्यम स्तर पर रहा है.. SDG इंडेक्स में शिक्षा स्कोर लगभग 58 के आसपास रहा.. जबकि केरल 82 पर है.. गुजरात में प्राथमिक स्कूलों में नामांकन अच्छा है.. लेकिन लर्निंग आउटकम्स औसत हैं.. ASER रिपोर्ट्स में ग्रामीण गुजरात के बच्चों का पढ़ने-लिखने का स्तर कई राज्यों से पीछे दिखा है..

 

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