प्रखर की मौत आत्महत्या या हत्या? कोर्ट के आदेश ने खोल दिए कई बड़े सवाल
कानपुर के चर्चित प्रखर त्रिवेदी मौत मामले में बड़ा मोड़ आया है। एनआरआई सिटी की 9वीं मंजिल से गिरकर हुई 14 वर्षीय छात्र की मौत पर कोर्ट ने 7 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मां ने पति और ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कानपुर के चर्चित प्रखर त्रिवेदी मौत मामले में अब न्यायिक हस्तक्षेप के बाद नया मोड़ आ गया है। बीते वर्ष दिसंबर में एनआरआई सिटी की नौवीं मंजिल से गिरकर जान गंवाने वाले 14 वर्षीय छात्र प्रखर त्रिवेदी की मौत को लेकर अदालत ने पुलिस को सात दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया है। यह मामला शुरुआत से ही सवालों और आरोपों के घेरे में रहा है। एक ओर जहां परिवार के कुछ सदस्यों ने घटना को आत्महत्या बताया, वहीं दूसरी ओर किशोर की मां ने इसे सुनियोजित हत्या करार देते हुए अपने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
16 दिसंबर की शाम मैनावती मार्ग स्थित एनआरआई सिटी में रहने वाले आठवीं कक्षा के छात्र प्रखर त्रिवेदी की नौवीं मंजिल से गिरने के कारण मौत हो गई थी। उस समय परिवार की ओर से बताया गया था कि प्रखर पढ़ाई को लेकर नाराज था और दादी की डांट से आहत होकर उसने बालकनी से छलांग लगा दी। परिवार के अनुसार, घटना वाले दिन ट्यूशन टीचर ने होमवर्क पूरा न होने की शिकायत प्रखर की दादी से की थी। इसके बाद दादी ने उसे फटकार लगाई। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर किशोर ने आत्मघाती कदम उठा लिया।
मां ने खारिज किया आत्महत्या का दावा
मृतक छात्र की मां बोस्की त्रिपाठी ने शुरू से ही इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। वह पिछले चार वर्षों से अपनी बेटी के साथ कल्याणपुर स्थित मायके में रह रही हैं और पति से उनका वैवाहिक विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। बोस्की त्रिपाठी का आरोप है कि उनके बेटे को लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने अपने पति, ताऊ, दादा और दादी पर मिलकर बेटे की हत्या करने तथा बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने का आरोप लगाया है। उनका यह भी कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और प्रभावशाली लोगों के दबाव में पुलिस ने उनकी शिकायत पर एफआईआर तक दर्ज नहीं की।
पुलिस पर एफआईआर न दर्ज करने का आरोप
मृतक छात्र की मां ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्होंने लगातार न्याय की मांग की, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान मां की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और प्रार्थनापत्र पर विचार करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार शुक्ला ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया।
कोर्ट का सख्त निर्देश
मृतक छात्र की मां की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अयाज अहमद खान के अनुसार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बीएनएस की धारा 173(4) के तहत दाखिल आवेदन स्वीकार करते हुए नवाबगंज थाना प्रभारी को निर्देशित किया है कि प्रार्थनापत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। अदालत ने यह भी कहा है कि विधिसम्मत विवेचना सुनिश्चित करते हुए सात दिनों के भीतर न्यायालय के समक्ष कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
अब जांच पर टिकी निगाहें
कोर्ट के आदेश के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक बार फिर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और क्या प्रखर की मौत आत्महत्या थी या फिर उसके पीछे कोई आपराधिक साजिश छिपी हुई थी। फिलहाल अदालत के निर्देश के बाद मामले की औपचारिक जांच प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। प्रखर त्रिवेदी की मौत की सच्चाई अब पुलिस विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सामने आने की उम्मीद है।
रिपोर्ट – प्रांजुल मिश्रा
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