5 साल से फंसी भारतीय महिला का रेस्क्यू, बिना पासपोर्ट दूतावास ने खोज निकाला, कंपनी पर एक्शन

एक भारतीय महिला जो पिछले 5 सालों से बिना पासपोर्ट और किसी संपर्क के विदेश में फंसी हुई थी... आखिरकार भारतीय दूतावास ने... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारत सरकार का विदेश मंत्रालय.. और भारतीय दूतावास दुनिया भर में फंसे अपने नागरिकों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.. खासकर उन भारतीयों की जो विदेश में काम करते समय किसी समस्या में फंस जाते हैं.. ऐसा ही एक बड़ा और भावुक मामला संयुक्त अरब अमीरात के दुबई से सामने आया है.. ओडिशा राज्य की रहने वाली हस्ता महानंदा नाम की एक भारतीय महिला पिछले पांच साल से दुबई में फंसी हुई थीं.. उनके परिवार वाले उन्हें घर वापस लाने के लिए बहुत परेशान थे.. आखिरकार भारतीय वाणिज्य दूतावास की लगातार कोशिशों से अब उनकी वापसी का रास्ता साफ हो गया है.. यह कहानी न सिर्फ एक परिवार की खुशी की है.. बल्कि विदेश में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा.. और दूतावास की सक्रिय भूमिका का भी उदाहरण है..

जानकारी के अनुसार हस्ता महानंदा ओडिशा की एक साधारण महिला हैं.. वे साल 2022 में काम के सिलसिले में यूएई गई थीं.. वहां उन्होंने एक कंपनी में नौकरी शुरू की.. शुरुआती दिनों में सब कुछ ठीक चल रहा था.. लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बदलने लगी.. कंपनी ने उनकी वापसी की अनुमति नहीं दी.. पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज उनके पास नहीं थे या कंपनी के पास थे.. इस वजह से वे पांच साल तक अपने घर-परिवार से दूर रही.. उनकी तीन बेटियां और अन्य रिश्तेदार उनकी चिंता में दिन-रात परेशान रहते थे.. वे सोचते थे कि मां सुरक्षित तो हैं या नहीं.. क्या उनके साथ कोई गलत व्यवहार तो नहीं हो रहा.. यह चिंता हर मां-बेटी या परिवार के लिए बहुत बड़ी होती है..

परिवार ने आखिरकार कानूनी रास्ता अपनाया.. हस्ता महानंदा की तीन बेटियों और रिश्तेदारों ने ओडिशा उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की.. याचिका में उन्होंने मां की सुरक्षा की जांच कराने.. और उन्हें भारत वापस लाने की अपील की.. अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई.. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक महत्वपूर्ण घटना घटी.. फेसबुक पर हस्ता महानंदा का एक वीडियो वायरल हो गया.. उस वीडियो में उन्होंने मदद की गुहार लगाई थी.. और उन्होंने बताया कि वे दुबई में फंसी हुई हैं.. और घर वापस आना चाहती हैं.. यह वीडियो परिवार तक पहुंचा और फिर दूतावास तक भी.. सोशल मीडिया की इस ताकत ने पूरे मामले को नई दिशा दी..

भारतीय वाणिज्य दूतावास, दुबई के अधिकारियों ने वीडियो देखते ही तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी.. उन्होंने यूएई के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया.. और महिला की तलाश में मदद मांगी.. दूतावास की टीम बहुत सक्रिय हुई.. और उन्होंने हस्ता महानंदा का पासपोर्ट नंबर और वीजा रिकॉर्ड ट्रैक करना शुरू किया.. इन रिकॉर्ड से उनके लोकल स्पॉन्सर का पता चला.. स्पॉन्सर से बात करके दूतावास की टीम कंपनी के मैनेजर तक पहुंची..

12 मई 2026 को एक अहम बैठक हुई.. दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास के कार्यालय में हस्ता महानंदा, कंपनी के मैनेजर और दूतावास के अधिकारियों की मुलाकात हुई.. इस बैठक में महिला ने अधिकारियों से खुलकर बात की.. और उन्होंने बताया कि वे सुरक्षित हैं.. उनके साथ कोई गलत व्यवहार या शोषण नहीं हुआ है.. समस्या सिर्फ यह थी कि कंपनी ने उन्हें भारत वापस जाने की अनुमति नहीं दी.. यात्रा की अनुमति न मिलने और दस्तावेजों की अड़चन के कारण वे पांच साल से घर नहीं लौट पाईं.. यह सुनकर दूतावास के अधिकारी बहुत गंभीर हुए..

भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया.. कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए.. नियोक्ता (कंपनी) को तुरंत हस्ता महानंदा का पूरा बकाया वेतन चुकाना होगा.. साथ ही सेवा समाप्ति के भत्ते का भी भुगतान करना होगा.. सबसे महत्वपूर्ण यह कि महिला के ऊपर लगा वीजा ओवरस्टे जुर्माना भी कंपनी को ही भरना होगा.. ये सारे कदम इसलिए उठाए गए ताकि हस्ता महानंदा जल्द से जल्द बिना किसी आर्थिक या कानूनी अड़चन के भारत वापस आ सकें.. दूतावास ने पूरा मामला निगरानी में रखा है.. और महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है..

बता दें कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है.. विदेश में काम करने वाले लाखों भारतीयों की कहानियां ऐसी ही होती हैं.. खासकर महिलाओं को कई बार भाषा, कानून, कंपनी की नीतियों.. और दस्तावेजों की समस्या का सामना करना पड़ता है.. ओडिशा जैसे राज्यों से बहुत से लोग बेहतर नौकरी और कमाई के लिए विदेश जाते हैं.. लेकिन कभी-कभी वे फंस जाते हैं.. ऐसे में परिवार टूट जाता है.. बच्चे मां के बिना बड़े होते हैं.. पति या अन्य सदस्य चिंता में रहते हैं.. हस्ता महानंदा की कहानी ऐसे ही कई परिवारों की कहानी है..

भारतीय दूतावास की भूमिका यहां बहुत सराहनीय है.. विदेश मंत्रालय के तहत काम करने वाले दूतावास और वाणिज्य दूतावास 24 घंटे तैयार रहते हैं.. वे फोन कॉल, ईमेल, सोशल मीडिया और अदालती आदेशों के आधार पर तुरंत मदद पहुंचाते हैं.. इस मामले में भी अदालत की याचिका, सोशल मीडिया वीडियो.. और दूतावास की तेज कार्रवाई ने मिलकर काम किया.. दूतावास ने न सिर्फ महिला को ढूंढा बल्कि कंपनी पर दबाव बनाकर उनके अधिकार सुनिश्चित किए..

हस्ता महानंदा की वापसी के बाद उनका परिवार बहुत खुश है.. तीन बेटियां अपनी मां को गले लगाने के लिए बेसब्र हैं.. रिश्तेदार और पड़ोसी भी राहत की सांस ले रहे हैं.. ओडिशा उच्च न्यायालय में भी यह खबर अच्छी मानी जा रही है.. अदालत ने परिवार की याचिका पर संज्ञान लिया था.. और अब दूतावास की सफलता से पूरा मामला सुलझने की ओर है..

विदेश में रह रहे भारतीयों के लिए कई योजनाएं चल रही हैं.. जैसे भारतीय नागरिक सुरक्षा योजना या मददगार हेल्पलाइन.. दूतावास हर देश में भारतीयों के रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा देते हैं.. ताकि कोई समस्या आए तो तुरंत संपर्क हो सके.. यूएई जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं.. निर्माण, नर्सिंग, घरेलू काम, होटल आदि क्षेत्रों में वे योगदान देते हैं.. लेकिन कभी-कभी वीजा नियम, स्पॉन्सर सिस्टम.. और कंपनी की मनमानी से दिक्कतें होती हैं..

 

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