कानपुर में 722 पेड़ों की कटाई पर गिरी गाज! एनएसआई निदेशक निलंबित

कानपुर के नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट परिसर में 722 हरे पेड़ों की कथित अवैध कटाई के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। निदेशक डॉ. सीमा परोहा को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पर्यावरण संरक्षण और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही को लेकर एक बड़ा मामला कानपुर से सामने आया है। नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) परिसर में कथित रूप से 722 हरे पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए संस्थान की निदेशक डॉ. सीमा परोहा को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई ने न केवल प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी है।

मामला सामने आने के बाद पुलिस, वन विभाग और संबंधित एजेंसियां जांच में जुट गई हैं। वहीं, इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

केंद्र सरकार ने जारी किया निलंबन आदेश

सूत्रों के अनुसार खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने डॉ. सीमा परोहा के निलंबन का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई एनएसआई परिसर में बड़ी संख्या में हरे पेड़ों की कटाई से जुड़े आरोपों के मद्देनजर की गई है।

निलंबन के साथ ही संस्थान के प्रशासनिक कार्यों को सुचारु बनाए रखने के लिए शुगर एंड वेजिटेबल ऑयल निदेशालय के निदेशक अरविंद कुमार रावत को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

722 हरे पेड़ों की कटाई बना जांच का विषय

मामले के अनुसार नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट परिसर में 722 हरे पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप है। पर्यावरणीय दृष्टि से यह संख्या बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि मामला प्रशासनिक स्तर से आगे बढ़कर कानूनी जांच का विषय बन गया है।

डॉ. सीमा परोहा समेत अन्य अधिकारियों पर एफआईआर

कानपुर के कल्याणपुर थाने में इस मामले को लेकर डॉ. सीमा परोहा समेत अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और विभिन्न दस्तावेजों तथा अनुमति संबंधी प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि पेड़ों की कटाई नियमानुसार की गई थी या फिर निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ।

पुलिस और वन विभाग कर रहे संयुक्त जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि पेड़ों की कटाई के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं, और यदि अनुमति थी तो उसकी शर्तों का पालन किया गया या नहीं।

पर्यावरण संरक्षण पर फिर उठे सवाल

यह मामला एक बार फिर विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को सामने लेकर आया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संस्थान या परियोजना द्वारा बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं और पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए। अब पूरे मामले पर प्रशासनिक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस प्रकरण में किस स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

रिपोर्ट- प्रांजुल मिश्रा

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