सीतापुर में कागजों में ‘मृत’ हो गया जिंदा किसान, 14 बीघा जमीन पर अधिकार को लेकर जिलाधिकारी से लगाई गुहार

सीतापुर के महमूदाबाद क्षेत्र में एक किसान ने आरोप लगाया है कि राजस्व अभिलेखों में उसे मृत दिखाकर उसकी 14 बीघा पैतृक भूमि भतीजों के नाम दर्ज कर दी गई। मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की गई है। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  सरकारी अभिलेखों में एक छोटी सी गलती किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी को प्रभावित कर सकती है। सीतापुर जिले से सामने आया एक ऐसा मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक किसान खुद को जिंदा साबित करने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में उसे मृत दर्शा दिया गया, जिसके बाद उसकी पैतृक जमीन का नामांतरण दूसरे लोगों के नाम कर दिया गया।

महमूदाबाद तहसील क्षेत्र के इस मामले ने राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता और उनकी निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल किसान ने न्याय की उम्मीद में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपा है।

दुर्गापुर गांव का है मामला

मामला महमूदाबाद तहसील क्षेत्र के बाढ़ और कटान प्रभावित इलाके के दुर्गापुर गांव से जुड़ा है। गांव निवासी परसराम पुत्र पराग का आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में उन्हें मृत दर्शा दिया गया, जबकि वह जीवित हैं और वर्षों से अपनी पैतृक भूमि पर अधिकार रखते आए हैं। परसराम के अनुसार उनके पिता पराग की मृत्यु के बाद करीब 28 बीघा पैतृक भूमि का बंटवारा हुआ था, जिसमें उनका भी हिस्सा निर्धारित था।

भतीजों के नाम दर्ज हो गई जमीन?

किसान का आरोप है कि उनके भाई बनवारी की मृत्यु के बाद उनके चार पुत्रों ने वरासत दर्ज कराने के लिए आवेदन किया था। इसी प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटि हुई और उन्हें मृत दिखा दिया गया। परसराम का दावा है कि गाटा संख्या 205(ख), 178, 162, 207, 193 और 148 में वह सहखातेदार एवं भूमिधर हैं। इसके बावजूद उनके हिस्से की भूमि भी चारों भतीजों के नाम दर्ज कर दी गई। उनका कहना है कि उनके हिस्से में लगभग 14 बीघा जमीन आती है, जिस पर उनका वैधानिक अधिकार है।

कई अधिकारियों से शिकायत, नहीं मिली राहत

किसान का आरोप है कि उन्होंने इस मामले को लेकर कई बार तहसील प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। एसडीएम और तहसीलदार स्तर तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। लंबे समय तक समस्या का समाधान न होने पर उन्होंने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच और राजस्व अभिलेखों में सुधार की मांग की है।

राजस्व निरीक्षक ने क्या कहा?

मामले में राजस्व निरीक्षक वीरेंद्र सिंह ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि वरासत की पूरी प्रक्रिया लेखपाल के पोर्टल के माध्यम से संचालित होती है और कानूनगो सीधे तौर पर वरासत दर्ज नहीं करता। उन्होंने कहा कि संभवतः गाटा संख्या चिह्नित करने में कोई तकनीकी त्रुटि हुई हो सकती है। शिकायतकर्ता से दो-तीन दिन का समय मांगा गया है और रिकॉर्ड में आवश्यक दुरुस्तीकरण की प्रक्रिया जारी है।

एसडीएम ने दिए जांच के निर्देश

महमूदाबाद की एसडीएम अंजली सिंह ने बताया कि शिकायत की जांच कराई जा रही है। यदि जांच में राजस्व अभिलेखों में किसी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता पाई जाती है तो उसे नियमानुसार ठीक कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

राजस्व व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला केवल एक किसान की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड की शुद्धता और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी विवाद अक्सर लोगों की आजीविका और अधिकारों से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में अभिलेखों में किसी भी प्रकार की त्रुटि गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि क्या किसान के आरोप सही साबित होते हैं और क्या उसके अधिकारों को बहाल किया जाएगा।

रिपोर्ट: वली चौधरी, सीतापुर

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