‘मेरी पत्नी को बांग्लादेश मत भेजो’ पति की गुहार, लव मैरिज के 12 साल बाद छिड़ा विवाद

12 साल पहले गुजराती युवक से लव मैरिज करने वाली महिला को लेकर पति ने भावुक अपील की है... पति का दावा है कि पत्नी को... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के आणंद जिले में एक दिलचस्प लेकिन दर्द भरी कहानी सामने आई है.. यह कहानी प्यार, संघर्ष, परिवार और कानून के बीच फंसी एक महिला की है.. काजुली जो अब काजल बन चुकी हैं.. करीब 12 साल पहले बांग्लादेश से भारत आईं.. फेसबुक पर एक गुजराती युवक तरुण पटेल से मुलाकात हुई.. प्यार हुआ, शादी हुई, दो प्यारे बच्चे हुए.. लेकिन अब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है.. क्योंकि वे अवैध रूप से भारत आई थीं.. उनके डिपोर्टेशन यानी वापस बांग्लादेश भेजने की तैयारी हो रही है.. पति तरुण पटेल सरकार से रो-रोकर गुहार लगा रहे हैं कि.. उनकी पत्नी को नागरिकता दे दी जाए.. बच्चे अपनी मां के बिना तड़प रहे हैं.. वहीं यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं.. और कानूनी नियमों के बीच के टकराव का है..

कहानी की शुरुआत करीब 15 साल पहले होती है.. आणंद जिले के लम्भवेल गांव में रहने वाले तरुण पटेल एक साधारण युवक थे.. वे फेसबुक पर समय बिताते थे.. उसी दौरान बांग्लादेश की एक लड़की काजुली से उनकी दोस्ती हुई.. शुरू में बातचीत सामान्य थी.. लेकिन धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे को समझने लगे.. काजुली बांग्लादेश के एक छोटे से गांव की रहने वाली थीं.. उनके घर में मुस्लिम परिवार था.. तरुण हिंदू परिवार से थे.. दोनों की बातें बढ़ती गईं और प्यार में बदल गईं.. काजुली तरुण से शादी करना चाहती थीं.. लेकिन बांग्लादेश में उनके परिवार वाले उन्हें किसी दूसरे मुस्लिम लड़के से शादी करने के लिए दबाव डाल रहे थे..

काजुली ने शादी के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की कोशिश की.. और उन्होंने पासपोर्ट बनवाने के लिए एजेंट को 13,000 रुपये दिए.. लेकिन एजेंट ने धोखा दे दिया और पासपोर्ट नहीं मिला.. परिवार का दबाव बढ़ता जा रहा था.. आखिरकार 2016 में काजुली ने फैसला किया कि वे प्यार के लिए कुछ भी कर सकती हैं.. वे अवैध रूप से सीमा पार करके भारत आईं.. पहले पश्चिम बंगाल पहुंचीं और फिर गुजरात के आणंद पहुंच गईं.. वहां तरुण से मुलाकात हुई.. काजुली ने हिंदू धर्म अपना लिया और तरुण से हिंदू रीति-रिवाजों से शादी कर ली.. अब उनका नाम काजल हो गया था। दोनों ने एक नया जीवन शुरू किया..

शादी के बाद दोनों का परिवार बढ़ा.. उनके दो बेटे हुए.. बड़ा बेटा ध्यान 8 साल का है.. और छोटा बेटा अर्श सिर्फ 2 साल का है.. काजल घर संभालतीं, बच्चों की देखभाल करतीं और तरुण के साथ खुशहाल जीवन बितातीं.. गांव के लोग उन्हें काजल के नाम से जानते थे.. वे मंदिर जातीं, हिंदू त्योहार मनातीं.. और पूरी तरह स्थानीय संस्कृति में घुल-मिल गई थीं.. तरुण बताते हैं कि काजल किसी अपराधी मंसूबे से नहीं आई थीं.. वे सिर्फ प्यार की तलाश में आई थीं.. उन्होंने अपना धर्म भी बदल लिया था ताकि परिवार में रिश्ता मजबूत हो..

लेकिन पिछले दिनों गुजरात पुलिस ने ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ शुरू किया.. यह अभियान अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ने के लिए चलाया जा रहा है.. इसी अभियान के तहत आणंद पुलिस ने काजल को गिरफ्तार कर लिया.. करीब 12 साल बाद उनकी असली पहचान सामने आई.. पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर रही है.. काजल को महिलाओं के शेल्टर होम में रखा गया है.. पिछले 15 दिनों से बच्चे अपनी मां के बिना रो-रोकर दिन काट रहे हैं.. 8 साल का ध्यान अपनी मां का चेहरा देखे बिना तड़प रहा है.. उसने रोते हुए कहा है कि वह अपनी मां के बिना नहीं रह सकता..

तरुण पटेल इस पूरे मामले में बहुत परेशान हैं.. और उन्होंने गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी.. और भारत सरकार से अपील की है.. तरुण कहते हैं कि काजल मेरी पत्नी है.. वह अब पूरी तरह हिंदू है.. अगर उसे बांग्लादेश भेज दिया गया तो वहां उसका परिवार उसे स्वीकार नहीं करेगा.. मुस्लिम समाज में धर्म बदलने वाली महिला को बहुत खतरा होता है.. कट्टरपंथी उसे मार भी सकते हैं.. हमारे दो छोटे बच्चे हैं.. उनका भविष्य क्या होगा.. परिवार टूट जाएगा..

तरुण ने कहा कि भारत सरकार पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले उत्पीड़ित हिंदुओं को नागरिकता दे रही है.. काजल ने भी मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है.. इसलिए उन्हें भी मानवीय आधार पर नागरिकता मिलनी चाहिए.. यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं है, बल्कि भावनात्मक भी है.. ध्यान और अर्श जैसे मासूम बच्चे अपनी मां की गोद के बिना कैसे रहेंगे.. काजल के बिना घर सूना हो गया है.. तरुण रोजाना पुलिस और अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं.. और उन्होंने मीडिया को भी बताया कि उनकी पत्नी कभी किसी गलत काम में शामिल नहीं रही.. वे पूरे 12 साल से गांव में रह रही हैं और सब उन्हें अच्छी पत्नी और मां के रूप में जानते हैं..

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की स्थिति पर भी चर्चा हो रही है.. तरुण कहते हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के कई मामले सामने आते रहते हैं.. अगर काजल वापस गईं तो उन्हें न सिर्फ परिवार से बल्कि समाज से भी खतरा है.. वे कहते हैं कि वहां कट्टर लोग उन्हें जिंदा नहीं छोड़ेंगे.. इसीलिए पति परिवार की पूरी उम्मीद भारत सरकार से है..

भारतीय कानून के अनुसार अवैध घुसपैठ पर सख्ती बरती जाती है.. लेकिन कई मामलों में मानवीय आधार पर छूट दी जाती है.. खासकर जब शादी, बच्चे और लंबा समय गुजर चुका हो.. काजल का मामला ऐसे ही कई मुद्दों को उठाता है.. क्या प्यार और परिवार को कानून से ऊपर रखा जा सकता है.. क्या धर्म परिवर्तन और लंबे समय के निवास को ध्यान में रखकर नागरिकता दी जा सकती है..

वहीं यह घटना गुजरात में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चल रही कार्रवाई का हिस्सा है.. पुलिस ने सैकड़ों लोगों को पकड़ा है.. लेकिन काजल का मामला अलग है क्योंकि इसमें एक भारतीय परिवार शामिल है.. स्थानीय लोग भी तरुण परिवार का साथ दे रहे हैं.. वे कहते हैं कि काजल अच्छी महिला है.. उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया..

वहीं अब सवाल यह है कि सरकार क्या फैसला लेगी.. CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के तहत कुछ श्रेणियों को राहत मिलती है.. तरुण उसी आधार पर अपील कर रहे हैं.. वे कहते हैं कि काजल उत्पीड़न से बचने के लिए आई थीं.. परिवार का दबाव और धर्म के कारण खतरा था.. बच्चों की स्थिति बहुत दयनीय है.. छोटा बच्चा अर्श अभी मां की गोद में खेलने का आदी है.. 15 दिन से वह रो रहा है.. बड़ा बच्चा ध्यान स्कूल जाता है.. लेकिन घर आकर मां को याद करके सुबकता है.. पड़ोसी कहते हैं कि पूरा गांव इस परिवार के साथ है.. वे सरकार से अनुरोध कर रहे हैं कि इस मामले को मानवीय दृष्टि से देखा जाए..

 

Related Articles

Back to top button