AD हेल्थ के छापे में खुली अस्पताल की पोल! 11 महीने से वेतन नहीं, मरीजों को हफ्तों का इंतजार
बरेली के जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के औचक निरीक्षण में अल्ट्रासाउंड की लंबी वेटिंग, 11 महीने से वेतन बकाया होने के आरोप, मरीजों से अभद्रता और कार्य व्यवस्था की खामियां सामने आईं। एडी हेल्थ ने जांच और सुधार के निर्देश दिए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बरेली के जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में सोमवार को हुए औचक निरीक्षण ने स्वास्थ्य विभाग की जमीनी हकीकत को सामने ला दिया। एडी हेल्थ डॉ. सीमा अग्रवाल जब दोनों अस्पतालों का जायजा लेने पहुंचीं तो मरीजों की समस्याओं से लेकर कर्मचारियों की नाराजगी तक कई मुद्दे एक साथ सामने आ गए। निरीक्षण के दौरान जहां मरीजों ने अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि की शिकायत की, वहीं आउटसोर्स कर्मचारियों ने महीनों से वेतन न मिलने का मुद्दा उठाया। इसके अलावा कार्य व्यवस्था और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।
अल्ट्रासाउंड के लिए हफ्तों की वेटिंग, मरीज परेशान
जिला अस्पताल में सबसे बड़ा मुद्दा अल्ट्रासाउंड जांच को लेकर सामने आया। मरीजों का कहना है कि जांच के लिए कई-कई हफ्तों बाद की तारीख दी जा रही है, जिससे इलाज प्रभावित हो रहा है। निरीक्षण के दौरान पत्रकारों ने जब एडी हेल्थ डॉ. सीमा अग्रवाल से लंबी वेटिंग को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने विस्तृत जवाब देने के बजाय मामले को दिखवाने की बात कही। इससे यह सवाल और गहरा हो गया कि आखिर गरीब मरीजों को समय पर जांच सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही है।
11 महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप
निरीक्षण के दौरान एक आउटसोर्स महिला कर्मचारी ने अपनी परेशानी खुलकर सामने रखी। कर्मचारी शशि यादव ने आरोप लगाया कि उन्हें पिछले 11 महीनों से वेतन नहीं मिला है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वेतन की मांग करने पर उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। हालांकि इस आरोप पर एडी हेल्थ ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना जाएगा।
चपरासी कर रहा बाबू का काम, व्यवस्था पर सवाल
निरीक्षण के दौरान कार्य प्रणाली को लेकर भी कई सवाल सामने आए। आरोप है कि अस्पताल में चपरासी से बाबू का कार्य कराया जा रहा है, जबकि कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप नहीं चल रही हैं। इसके अलावा एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप भी सामने आए। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल में व्यवहार संबंधी समस्याओं की शिकायत की।
महिला अस्पताल में मिलीं कई खामियां
महिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान भी कई कमियां सामने आईं। एडी हेल्थ ने अस्पताल प्रबंधन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने माना कि अस्पताल की कुछ व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि समस्याएं पहले से मौजूद थीं तो अब तक उनका समाधान क्यों नहीं किया गया।
जवाबदेही पर उठे सवाल
निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े हो गए हैं-
- मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए हफ्तों इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?
- आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन 11 महीने से लंबित क्यों है?
- मरीजों से अभद्र व्यवहार की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- निर्धारित पदों के बजाय अन्य कर्मचारियों से अलग कार्य क्यों कराया जा रहा है?
क्या बदलेगी व्यवस्था?
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में केवल निरीक्षण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिकायतों के समाधान और जवाबदेही तय करना भी उतना ही जरूरी है। स्वास्थ्य सेवाएं आम लोगों के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं, इसलिए किसी भी स्तर की लापरवाही का असर हजारों मरीजों पर पड़ता है। फिलहाल निरीक्षण के बाद कई मुद्दे चर्चा में हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों की जांच कर ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी केवल निरीक्षण तक सीमित रह जाता है।
रिपोर्ट – सुनील सक्सेना
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