राम मंदिर के मुद्दे पर सियासत गर्म, बुरी तरह फंसी भाजपा, उद्धव-अखिलेश ने कर दिया एक्सपोज!

राम मंदिर का निर्माण बहुत सालों की लड़ाई के बाद हुआ। हिंदू समाज के लिए यह भावना का प्रतीक था। करोड़ों लोग चाहते थे कि भगवान राम का भव्य घर बने।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में अलग ही गोरखधंधा चल रहा है। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है।

नेताओं की लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है एक तरफ जहां भाजपाई सफाइयां पेश कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष लगातार आक्रामक नजर आ रहा है। इसी बीच उद्धव ठाकरे ने हाल ही में परभणी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “राम मंदिर कम, दुकान ज्यादा हो गया है।” यह बयान राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों के बीच आया है।

लाखों भक्तों के भावुक चढ़ावे में गड़बड़ी की खबरें सामने आने के बाद विपक्षी नेता बीजेपी पर हमला बोल रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने आगे कहा, “राम मंदिर हिंदुओं का पूजा स्थल है, लेकिन बीजेपी ने वहां दुकान खोल ली है और भगवान राम के नाम पर धंधा शुरू कर दिया है.” उन्होंने यह भी कहा, “राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की मामले सिर्फ चोरी नहीं बल्कि यह हिंदुओं और हिंदुत्व के साथ धोखा है.”

राम मंदिर का निर्माण बहुत सालों की लड़ाई के बाद हुआ। हिंदू समाज के लिए यह भावना का प्रतीक था। करोड़ों लोग चाहते थे कि भगवान राम का भव्य घर बने। 2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने इसका उद्घाटन किया। पूरा देश खुश था। लेकिन अब कुछ साल बाद ही चढ़ावे की चोरी, लापरवाही और कमर्शियलाइजेशन यानी व्यापार बन जाने की शिकायतें आ रही हैं। उद्धव ठाकरे जैसे नेता कह रहे हैं कि मंदिर की जगह दुकानों का बाजार बन गया है।

चढ़ावा चोरी का मामला क्या है? अयोध्या राम मंदिर में भक्त सोना, चांदी, नकद पैसे, गहने आदि चढ़ाते हैं। ये चढ़ावे मंदिर की देखभाल, गरीबों की मदद और तीर्थयात्रियों के लिए होने चाहिए। लेकिन आरोप है कि करोड़ों रुपये गायब हो गए। कुछ पूर्व विधायक और कर्मचारी इसकी शिकायत कर चुके हैं। SIT जांच कर रही है, कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई? मंदिर ट्रस्ट के लोगों पर भी उंगली उठ रही है। बीजेपी पर आरोप है कि उन्होंने राम मंदिर को राजनीतिक प्रोजेक्ट बना दिया।

चुनाव में हिंदुत्व का नारा दिया, मंदिर बनवाया, लेकिन मैनेजमेंट में पारदर्शिता नहीं रखी। लाखों गरीब भक्तों के पैसे जो राम के नाम पर चढ़ाए गए, उनमें से कुछ हिस्सा कहीं और चला गया। यह भक्तों के विश्वास के साथ धोखा है। उद्धव ठाकरे कहते हैं कि असली हिंदुत्व इंसानियत सिखाता है, न कि मंदिर लूटने वाला हिंदुत्व। उन्होंने “बीजेपी मुक्त राम” की बात की।

वहीं इसी बीच अन्य नेताओं की भी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इसी दरमियान सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी बड़ा फैसला किया है। , प्रयागराज में आयोजित पत्रकार वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा है कि, “रामनगरी में गोरखधंधा हो रहा है, इसकी जानकारी हमलोगों ने जारी किया था. सपा चीफ ने कहा कि मर्यादा पुरषोतम राम मंदिर का दर्शन करने जाएंगे, बीजेपी के लिये नेशन फस्ट नहीं डोनेशन फस्ट है.

अखिलेश यादव ने कहा है कि रामनगरी में ‘गोरखधंधा’ चल रहा है. जहां तक सनातन धर्म की रक्षा की बात है, समाजवादी लोग चाहते हैं कि सनातन धर्म की रक्षा हो, लेकिन सनातन धर्म की आड़ में ‘गोरखधंधा’ न हो. उन्होंने कहा कि ‘भाजपा का नाम भाचपा रखना चाहिए – चतुराई, चंदा, चोरी, चालबाजी…’

अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी के शब्दकोष में न धर्म है न शर्म है, इनके लिए नेशन फर्स्ट नहीं, डोनेशन फर्स्ट है. क्या कोई कल्पना कर सकता था कि श्रद्धा और आस्था से इतना बड़ा खिलवाड़ होगा. सीसीटीवी फुटेज है. कितनी बार बंद किया गया, ये सारे आंकड़े हैं. यूपी में कुछ दिन पहले हारे हैं – पीडीए की ताकत को और मजबूत करना है.

सपा चीफ ने कहा कि इटावा में मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या जाएंगे. उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ थकते नहीं थे कहते कि अयोध्या इतनी बार गए. अयोध्या इतनी बार गए लेकिन जानकारी नहीं मिली. चिराग तले अंधेरा. गौरतलब है कि इस मामले पर भाजपा सरकार भी घिरती हुई नजर आ रही है। इतना ही नहीं सवाल अब पीएम मोदी पर भी उठने लगे हैं।

इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल की नेता और लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री से इस मामले पर प्रतिक्रिया देने की मांग की। रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर छोटे-बड़े मुद्दे पर बोलते और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में उनकी चुप्पी सवाल खड़े करती है। उन्होंने पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर मौन क्यों हैं।

इतना ही नहीं रोहिणी ने आगे कहा कि भूमि पूजन से लेकर मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा तक का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी ने लिया था। ऐसे में यदि चंदे और चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया है, तो इसकी जिम्मेदारी और श्रेय कौन लेगा? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कायदे से इसका श्रेय भी मोदी जी को ही लेना चाहिए।

रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट के अंत में कहा कि प्रभु श्रीराम में आस्था रखने वाले देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालु इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए लिखा कि पर्ची और टेलीप्रॉम्प्टर की मदद ले लीजिए, मगर अपनी चुप्पी तोड़िए।

अगर बात की जाए मंदिर के आसपास क्या हो रहा है। तो आपको बता दें कि अयोध्या में होटल, दुकानें, मॉल जैसी चीजें तेजी से बढ़ रही हैं। बाहर से लोग आकर प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं। जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि उनका फायदा कम हो रहा है, बड़े बिजनेस वाले ज्यादा कमा रहे हैं। राम भक्ति की जगह व्यापार की कहानी बन गई। यही उद्धव का “मंदिर कम, दुकान ज्यादा” वाला पॉइंट है।

बीजेपी सरकार में दो इंजन वाली व्यवस्था है – केंद्र और यूपी। दोनों जगह उनकी सरकार। फिर भी चढ़ावे की सुरक्षा पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया? CCTV, सख्त निगरानी, स्वतंत्र ऑडिट जैसी बेसिक चीजें क्यों नहीं लागू की गईं? भक्तों का पैसा ट्रस्ट में जाता है, लेकिन ट्रस्ट का गठन और कामकाज पर सवाल हैं। कुछ लोग कहते हैं कि राजनीतिक लोगों का प्रभाव ज्यादा है, धार्मिक पारदर्शिता कम। यह सिर्फ एक मंदिर का मुद्दा नहीं है।

देश भर में कई मंदिरों में चढ़ावे के पैसे का इस्तेमाल सही नहीं होता। लेकिन राम मंदिर जैसे प्रतीकात्मक जगह पर यह ज्यादा दर्द देता है। करोड़ों हिंदू जो सालों से राम मंदिर के सपने देख रहे थे, उनके भावनाओं का फायदा उठाया गया। बीजेपी ने राम को वोट बैंक बनाने का काम किया। मंदिर बनने के बाद विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट लाए, लेकिन आम भक्त की भावना की रक्षा नहीं की।

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) बीजेपी की पुरानी सहयोगी थी। राम मंदिर आंदोलन में उनका भी योगदान था। लेकिन अब वे कह रहे हैं कि बीजेपी ने हिंदुओं को धोखा दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि मंदिर वही बनाएंगे, लेकिन अब पता चला क्यों बनवाना था। यह इशारा है कि बीजेपी ने सिर्फ राजनीति के लिए इस्तेमाल किया।

अब बात करें कि आखिर ये चोरी के आरोप कैसे लगे।  कुछ कर्मचारियों की तनख्वाह कम थी, लेकिन उनके पास अचानक महंगे होटल, गाड़ियां आ गईं। CCTV में चोरी पकड़ी गई। 70-200 करोड़ तक के गबन के आंकड़े चर्चा में हैं। SIT ने रिपोर्ट दी, लेकिन विपक्ष कहता है कि पूरी सच्चाई बाहर नहीं आ रही। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल हुई हैं, CBI जांच की मांग हो रही है।

बीजेपी के समर्थक कहते हैं कि यह विपक्ष की साजिश है, मंदिर को बदनाम करने की कोशिश। लेकिन जब खुद बीजेपी नेता अयोध्या के राजनिश सिंह ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर जांच की मांग की, तो सवाल और गहरा हो जाता है। अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे समेत कई नेता इस पर हमला कर रहे हैं। राम मंदिर को कमर्शियल बनने से क्या नुकसान हुआ? पहले अयोध्या शांत तीर्थ था। अब ट्रैफिक, भीड़, होटल की होड़ है। गरीब भक्त जो दूर से आते हैं, उन्हें महंगे होटल और खाने-पीने का बोझ सहना पड़ता है।

मंदिर के आसपास की पुरानी छोटी दुकानें, मठ-मंदिर बंद हो रहे हैं या प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय संस्कृति बचाने के बजाय बड़े बिजनेस हावी हो गए।बीजेपी की आलोचना यह है कि वे विकास के नाम पर सब कुछ बेच रहे हैं। हिंदुत्व का नाम लेकर पावर में आए, लेकिन सत्ता में रहते हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही को बढ़ावा दिया। राम जैसे पवित्र नाम का इस्तेमाल करके वोट लिए, लेकिन मंदिर की पवित्रता की रक्षा नहीं की। उद्धव ठाकरे का बयान इसी गुस्से को दिखाता है।

जरा अगर चढ़ावे का पैसा सही इस्तेमाल होता तो क्या हो सकता था? गरीब बच्चों की शिक्षा, अस्पताल, तीर्थयात्रियों की सुविधा, पर्यावरण संरक्षण आदि में लगाया जा सकता था। लेकिन आरोप है कि कुछ लोग अमीर हो गए। एक पूर्व ऑटो ड्राइवर के पास अब 70 कमरों का होटल है – ऐसी खबरें आ रही हैं।

यह दिखाता है कि सिस्टम में कितनी कमजोरी है। बीजेपी पर और सवाल – ट्रस्ट में कौन-कौन है? हिसाब-किताब कौन देखता है? स्वतंत्र ऑडिट क्यों नहीं? मंदिर को पॉलिटिकल प्रोपगैंडा के लिए इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है? प्राण प्रतिष्ठा के समय पूरा फोकस चुनाव पर था। अब जब समस्या आई तो बचाव की कोशिश भाजपा की तरफ से जामकर की जा रही है।

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