कानपुर: 20 साल तक बिना योग्यता नौकरी! आखिर किसके संरक्षण में चलता रहा पूरा खेल?

कानपुर के श्रीआस्तिक मुनि इंटर कॉलेज में प्रधान लिपिक पर 20 साल से बिना आवश्यक योग्यता नौकरी करने और 50 लाख रुपये के कथित गबन के आरोप लगे हैं। डीआईओएस ने सुनवाई पूरी होने के बाद जल्द फैसला देने की बात कही।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा करती है। इसी बीच कानपुर के पुरियां गांव स्थित श्रीआस्तिक मुनि इंटर कॉलेज का मामला चर्चा में है। कॉलेज के प्रधान लिपिक सुरेश कुमार बाजपेई पर आरोप है कि वह करीब 20 वर्षों से आवश्यक टंकण (टाइपिंग) योग्यता और निर्धारित अर्हताओं के बिना पद पर कार्यरत हैं। साथ ही ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर उन पर करीब 50 लाख रुपये के कथित गबन के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

शिकायतकर्ताओं ने उठाए नियुक्ति और वित्तीय अनियमितताओं के सवाल

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से इस मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया जाता रहा, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि मामले को उठाने वालों पर ही दबाव बनाने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो इतने लंबे समय तक बिना आवश्यक योग्यता के सेवा जारी रहना गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े करता है।

डीआईओएस बोले- सुनवाई पूरी, जल्द होगा फैसला

जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब उपलब्ध तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। विभाग का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि शिक्षा विभाग की निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या आरोपों के अनुरूप कार्रवाई होती है। फिलहाल मामले में अंतिम निर्णय आना बाकी है।

रिपोर्ट – प्रांजुल मिश्रा

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