बंगाल में फिर आया सियासी भूचाल
टीएमसी में बगावत के बीच ममता ने खुद संभाली अध्यक्ष की कमान

- राज्यसभा चुनाव के लिए कसनी होगी कमर, 24 जुलाई को मतदान
- मदन मित्रा और कुणाल घोष महासचिव होंगे
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकता। पश्चिम बंगाल टीएमसी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा पश्चिम बंगाल की राजनीति में मचे भारी हंगामे के बीच आया है। कोलकाता में टीएमसी के राज्य पार्टी कार्यालय के मालिक ने परिसर को अंदर से बंद कर दिया था, क्योंकि ऐसी खबरें आई थीं कि विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने इमारत पर कब्जा कर लिया है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की कि वह पार्टी की राज्य इकाई की अध्यक्ष की भूमिका भी संभालेंगी और मदन मित्रा तथा कुणाल घोष को राज्य समिति में महासचिव के तौर पर शामिल किया।
वहीं पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया था इन सीटों पर निर्वाचन आयोग ने चुनाव का ऐलान कर दिया है। इन तीनों ही सीटों पर 24 जुलाई को मतदान होगा। वहीं ममता बनर्जी को लिखे अपने इस्तीफ़े के पत्र में, भट्टाचार्य ने कहा कि वह जून 26 में उन्हें मिले राज्य अध्यक्ष के पद से हट रही हैं। उन्होंने पार्टी के बैंक खातों के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और भारत के चुनाव आयोग के सामने दीदी के अधिकृत व्यक्ति के तौर पर भी अपना नाम वापस ले लिया। बनर्जी ने एक वीडियो संदेश में कहा टीएमसी चेयरपर्सन के तौर पर, मैं घोषणा करती हूं कि आज से मैं पश्चिम बंगाल राज्य अध्यक्ष की भूमिका भी संभालूंगी। पार्टी समिति में दो और लोगों–मदन मित्रा और कुणाल घोष–को शामिल किया गया है। दोनों को इस समिति का महासचिव नियुक्त किया गया है। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी संगठनात्मक कलह और रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट द्वारा पार्टी मुख्यालय पर कब्जा करने के बाद सामने आया है।
सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव व प्रकाश चिक ने दिए थे इस्तीफे
ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले सुखेंदु शेखर रॉय पहले राज्यसभा सांसद थे, जिन्होंने आठ जून को टीएमसी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दिया था।उन्होंने टीएमसी में भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। सुखेंदु शेखर रॉय के बाद बाद सुष्मिता देव ने 1० जून को टीएमसी छोडऩे का ऐलान कर दिया था। इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद सुष्मिता देव नेदिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की थी, जिसके बाद कयास लगाए जाने लगे थे कि वह बीजेपी में शामिल हो सकती हैं और बीजेपी उन्हें असम से राज्यसभा भेज सकती है। सुष्मिता देव असम के सिलचर की रहने वाली हैं और 14 में कांग्रेस की टिकट पर सिलचर से सांसद बनी थीं। इसके अलावा कांग्रेस ने उन्हें महिला कांग्रेस का अध्यक्ष भी बनाया था। सुष्मिता पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता संतोष मोहन देव की बेटी है। वहीं शुखेंदु शेखर और सुष्मिता देव के बाद प्रकाश चिक बराइक तीसरे राज्यसभा सांसद थे, जिन्होंने टीएमसी से इस्तीफा दिया था. हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे में न तो ममता बनर्जी और न ही टीएमसी पर कोई आरोप लगाया।



