अमित चावड़ा की बड़ी सेंधमारी, कई नेता और निर्दलीय पार्षद कांग्रेस में शामिल
गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमितभाई चावड़ा, AICC सचिव रामकिशन ओझा और अहमदाबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश गोहिल की मौजूदगी में...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है.. आम आदमी पार्टी यानी AAP को राज्य में बड़ा झटका लगा है.. पार्टी के कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.. इस घटनाक्रम ने गुजरात की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है.. आपको बता दें कि यह कार्यक्रम गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा, सेंट्रल ज़ोन के इंचार्ज और AICC सचिव रामकिशन ओझा.. तथा अहमदाबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश गोहिल की मौजूदगी में आयोजित किया गया.. इस दौरान बरेजा नगरपालिका के चार निर्दलीय पार्षद.. और दस्क्रोई तालुका के आम आदमी पार्टी के कई पदाधिकारियों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया.. इसे गुजरात की स्थानीय राजनीति में कांग्रेस के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है.. जबकि AAP के लिए यह चिंता की बात है..
जानकारी के अनुसार यह कार्यक्रम अहमदाबाद में हुआ.. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में AAP के कार्यकर्ताओं.. और निर्दलीय पार्षदों का पार्टी में शामिल होना एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है.. बरेजा नगरपालिका के ये चारों पार्षद लंबे समय से अपने इलाके में सक्रिय थे.. उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी.. अब उनका कहना है कि कांग्रेस के साथ मिलकर वे अपने क्षेत्र में और बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे..
वहीं, दस्क्रोई तालुका के AAP पदाधिकारियों ने भी कांग्रेस का हाथ थाम लिया.. उनका कहना है कि पार्टी के अंदर कुछ मुद्दों को लेकर असंतोष बढ़ रहा था.. कई कार्यकर्ताओं को लग रहा था कि स्थानीय समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है.. इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया.. इस मौके पर अमित चावड़ा ने कहा कि यह कांग्रेस के संगठन विस्तार का हिस्सा है.. उन्होंने सभी नए साथियों का स्वागत करते हुए कहा कि गुजरात में कांग्रेस लगातार मजबूत हो रही है..
रामकिशन ओझा ने कहा कि विपक्ष को मजबूत होना चाहिए.. जबकि राजेश गोहिल ने इसे अहमदाबाद और आसपास के इलाकों के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बताया.. AAP पिछले कुछ वर्षों से गुजरात में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही थी.. दिल्ली और पंजाब में मिली सफलता के बाद पार्टी ने गुजरात में भी अपनी जगह बनाने का प्रयास किया.. लेकिन स्थानीय स्तर पर उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा..
कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी की रणनीति राष्ट्रीय मुद्दों पर ज़्यादा केंद्रित रही.. जबकि गुजरात के स्थानीय मुद्दे—जैसे पानी, बिजली, रोजगार और किसानों की समस्याएं उतनी प्राथमिकता नहीं पा सकीं.. इसी कारण कई पुराने कार्यकर्ता अब कांग्रेस की ओर रुख कर रहे हैं.. दूसरी तरफ कांग्रेस लंबे समय से गुजरात की राजनीति का हिस्सा रही है.. पार्टी का कहना है कि उसे राज्य की जमीनी हकीकत.. और स्थानीय मुद्दों की बेहतर समझ है.. यही वजह है कि निर्दलीय पार्षदों का कांग्रेस में शामिल होना पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है..
गुजरात लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है.. 1990 के दशक से भाजपा राज्य की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत रही है.. कांग्रेस मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाती रही है.. AAP के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हुआ था.. लेकिन अब AAP से कांग्रेस की ओर हो रहे इस बदलाव से विपक्षी राजनीति पर असर पड़ सकता है.. पिछले विधानसभा चुनाव में AAP ने कुछ सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया था.. लेकिन सरकार बनाने से काफी दूर रही.. वहीं, स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है..



