मंदिर में करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप, चंपत राय के खिलाफ SIT जांच की मांग
चंपत राय पर अयोध्या के श्री राम निवास मंदिर की संपत्ति के गबन और अवैध कब्जे का नया आरोप लगा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: चंपत राय पर अयोध्या के श्री राम निवास मंदिर की संपत्ति के गबन और अवैध कब्जे का नया आरोप लगा है.
हरिशंकर सफरीवाला ने एसआईटी को शिकायत दी है कि चंपत राय और उनके सहयोगियों ने देवोत्तर संपत्ति को 5.8 करोड़ में बेचने का सौदा किया और 70 लाख रुपये का गबन किया. शिकायतकर्ता ने मंदिर का कब्जा और देवी-देवताओं के आभूषणों की जांच की मांग की है.
श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के चढ़ावे में चोरी के मामले की जांच अभी चल रही है कि जमीन घोटाले के एक और आरोप से चंपत राय फिर से विवादों में घिरते दिखाई दे रहे हैं. अयोध्या के ही रहने वाले हरिशंकर सफरीवाला ने चंपत राय पर मंदिर हथियाने और जबरन कब्जे के सीधे आरोप लगाये हैं.
शिकायतकर्ता हरिशंकर सफरीवाला ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी को शिकायत देकर श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में करोड़ों रुपये के गबन, दान की धनराशि के दुरुपयोग, मंदिर की संपत्तियों पर अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्ति खरीदने-बेचने और आर्थिक अनियमितताओं का आरोप लगाया है.
शिकायत में कहा गया है कि इन सभी मामलों में चंपतराय और उनके सहयोगियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए. हरिशंकर सफरीवाला का आरोप है कि वो श्री राम निवास मंदिर, बरहटा, रामकोट (अयोध्या) की पंच समिति के प्रमुख है.
उसकी नियुक्ति तत्कालीन महंत रामगोपाल दास ने 30 दिसंबर 1987 को की थी. बाद में 2 फरवरी 2018 को मंदिर का प्रबंधन विधिवत रजिस्टर्ड कराया गया, जिसके अनुसार वह मंदिर का मुख्य कार्यपालक एवं प्रशासनिक प्रमुख है.
महंत की नियुक्ति
शिकायत के अनुसार 11 अगस्त 2021 को प्रार्थी ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए वीरेंद्र दास उर्फ वीरू को मंदिर का महंत नियुक्त किया. नियुक्ति पत्र में स्पष्ट शर्त रखी गई कि समिति की अनुमति के बिना मंदिर की किसी भी संपत्ति का विक्रय नहीं किया जा सकेगा.
संपत्ति बेचने का आरोप
शिकायतकर्ता हरि शंकर सफरीवाला ने आरोप लगाया गया है कि चंपतराय को ये जानकारी होने के बावजूद कि मंदिर और उसकी भूमि देवोत्तर संपत्ति है, जिसका क्रय-विक्रय नहीं किया जा सकता, उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर लगभग 5 करोड़ 80 लाख रुपये में सौदा तय किया. पंजीकृत बयान नामा, जिसमे चंपत राय की फोटो लगी है उसमें भी जमीन को देवोत्तर संपत्ति बताया गया है.
आरोप है कि इस सौदे के लिए 70 लाख रुपये बतौर पेशगी दिए गए और 22 दिसंबर 2022 को बयानामा बिना कब्जा नाम का डॉक्यूमेंट रजिस्टर्ड कराया गया. शिकायतकर्ता हरि शंकर का आरोप है कि ये रकम मंदिर के खाते में जमा नहीं हुई बल्कि कथित रूप से उसका गबन कर लिया गया.
मंदिर पर कब्जे का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि मंदिर परिसर में प्रार्थी और अन्य पंचों का प्रवेश रोक दिया गया तथा मंदिर कार्यालय पर कब्जा कर लिया गया. आरोप है कि मंदिर की आलमारी, फर्नीचर और अन्य सामान के अलावा भगवान की मूर्ति, उनके जेवर, सोने की परत चढ़ा पलंग और सोने चांदी के बर्तन को भी कब्जे में ले लिया गया.
आभूषण गायब होने का आरोप
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि मंदिर के देवी-देवताओं के आभूषणों का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है. आरोप है कि इस संबंध में 2 अगस्त 2024 को पंजीकृत नोटिस भेजी गई, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला.
शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि अलग-अलग प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
किरायेदारों से वसूली का आरोप
हरि शंकर का आरोप है कि मंदिर की दुकानों और भवनों को खाली कराने के नाम पर चेक या ड्राफ्ट के अतिरिक्त नकद धनराशि भी ली गई, जिसका कोई लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है.
एसआईटी से शिकायत में की गई प्रमुख मांगें
1. राम निवास मंदिर का कब्जा उसकी मूल प्रबंधन समिति को वापस दिलाया जाए. 2. मंदिर के सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां और उनके आभूषण सुरक्षित वापस दिलाए जाएं तथा उनकी जांच कराई जाए. 3. मंदिर परिसर खाली कराकर पंचायत समिति को उसका कार्यालय, फर्नीचर और अन्य सामान लौटाया जाए
. 4. कथित फर्जी बयानामा बिना कब्जा के आधार पर दिए गए 70 लाख रुपये ट्रस्ट में वापस जमा कराए जाएं. 5. पूरे मामले की जांच कर ये पता लगाया जाए कि ट्रस्ट के कितने लोग इस कथित अनियमितता में शामिल थे, कितनी धनराशि का गबन हुआ और मंदिर की कौन-कौन सी संपत्तियां हटाई या बेची गईं. 6. यदि एसआईटी उचित समझे तो मंदिर प्रबंधन समिति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कम से कम 5 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाया जाए.



