इसुदान गढ़वी ने मोदी पर बोला हमला, चैतर वसावा का अपमान बर्दाश्त नहीं

PM मोदी के बयान को लेकर आदिवासी समाज में नाराज़गी देखने को मिल रही है... आम आदमी पार्टी गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की आदिवासी बेल्ट में इन दिनों राजनीतिक माहौल काफी गरम है.. आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.. और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि.. नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा से AAP के नेता चैतर वसावा के खिलाफ की जा रही कार्रवाई से आदिवासी समाज में गहरी नाराजगी है.. और उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय अपने बेटे चैतर वसावा का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेगा.. उनका कहना है कि यह केवल एक नेता का मामला नहीं.. बल्कि पूरे आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बन चुका है..

इसुदान गढ़वी का यह बयान ऐसे समय में आया है.. जब चैतर वसावा विभिन्न कानूनी मामलों को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं.. AAP का आरोप है कि उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामले राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हैं.. जबकि भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है.. और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है.. इसी टकराव ने गुजरात की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है..

चैतर वसावा नर्मदा जिले की डेडियापाड़ा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक रहे हैं.. वर्ष 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने प्रभावशाली जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई.. आदिवासी समाज से आने वाले चैतर वसावा ने जंगल, जमीन, पानी.. और आदिवासी अधिकारों जैसे मुद्दों को लगातार प्रमुखता से उठाया.. इसी वजह से वे आदिवासी युवाओं, किसानों.. और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हुए.. वे अक्सर खुद को जंगल का स्वतंत्र शेर कहकर संबोधित करते हैं.. और अपने समर्थकों के बीच इसी छवि के कारण चर्चित हैं..

AAP का दावा है कि यही बढ़ती लोकप्रियता भाजपा के लिए चुनौती बन गई है.. पार्टी का आरोप है कि जब भी चैतर वसावा आदिवासी किसानों के अधिकारों.. वन भूमि पर खेती करने वाले गरीब परिवारों या स्थानीय लोगों की समस्याओं को लेकर सरकार से सवाल पूछते हैं.. तब उन्हें निशाना बनाया जाता है..

इसुदान गढ़वी ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि चैतर वसावा पर दर्ज किए गए मामले पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं.. उनके अनुसार आदिवासी समाज की आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक.. और कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया जा रहा है.. गढ़वी ने यह भी दावा किया कि चैतर वसावा की सभाओं में लोग बिना किसी दबाव या व्यवस्था के अपने खर्च पर पहुंचते हैं.. जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए सरकारी संसाधनों.. और बसों का उपयोग किया जाता है.. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है.. और भाजपा ने ऐसे आरोपों को खारिज किया है..

आपको बता दें कि पूरा विवाद वर्ष 2023 की एक घटना से जुड़ा है.. आरोपों के अनुसार  नर्मदा जिले में वन विभाग की टीम ने कथित रूप से वन भूमि पर उगाई गई फसल को हटाने की कार्रवाई की थी.. इस दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी किसान विरोध में उतर आए.. चैतर वसावा भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों के साथ विवाद हो गया.. इसके बाद पुलिस ने आरोप लगाया कि चैतर वसावा ने वन विभाग के अधिकारियों को धमकाया.. हवा में फायरिंग की और फिरौती मांगने जैसे गंभीर अपराध किए.. इस मामले में चैतर वसावा उनकी पत्नी शकुंतला वसावा तथा अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया..

इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा.. जून 2026 में राजपीपला की अदालत ने चैतर वसावा को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष की सजा सुनाई.. सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई.. अदालत के फैसले के बाद गुजरात की राजनीति में विवाद और तेज हो गया.. आम आदमी पार्टी ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया.. पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चैतर वसावा आदिवासी समाज की मजबूत आवाज हैं.. और उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है.. वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस कार्रवाई को आदिवासी समाज के खिलाफ मानसिकता का प्रतीक बताया..

दूसरी ओर भाजपा का स्पष्ट कहना है कि मामला पूरी तरह कानून और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है.. पार्टी का कहना है कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया है.. और कानून सभी नागरिकों के लिए समान है.. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि AAP इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है.. इसुदान गढ़वी ने अदालत के फैसले पर भी सवाल उठाए.. उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी सजा सुनाए जाने से कई तरह के सवाल खड़े होते हैं.. उन्होंने पूछा कि क्या आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ना ही चैतर वसावा का अपराध है.. उनके अनुसार आदिवासी समाज में यह धारणा बन रही है कि सत्ता एक मजबूत आदिवासी नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पा रही है..

गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में लंबे समय से कई मुद्दे चर्चा का विषय रहे हैं.. इनमें जंगल की जमीन पर अधिकार, खनन से जुड़े विवाद, शिक्षा.. और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, रोजगार की समस्या तथा किसानों की आर्थिक स्थिति जैसे विषय प्रमुख हैं.. चैतर वसावा लगातार इन मुद्दों को विधानसभा और जनसभाओं में उठाते रहे हैं.. और उन्होंने कई बार आरोप लगाया कि आदिवासी विकास के लिए आवंटित धन का सही उपयोग नहीं हो रहा.. एक जनसभा में उन्होंने दावा किया था कि सरकारी कार्यक्रमों.. और बड़े आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं.. जबकि आदिवासी क्षेत्रों की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं.. भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताया है..

इसुदान गढ़वी का कहना है कि भाजपा वर्षों से आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखती रही है.. लेकिन जब उसी समाज से कोई प्रभावशाली नेता उभरता है.. तो उसे राजनीतिक और कानूनी दबाव का सामना करना पड़ता है.. उनके अनुसार चैतर वसावा के खिलाफ कार्रवाई केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं.. बल्कि पूरे आदिवासी समाज के आत्मसम्मान पर हमला है..

AAP का दावा है कि आदिवासी युवाओं में चैतर वसावा को लेकर खासा उत्साह है.. पार्टी के अनुसार, उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से शामिल होते हैं.. बिरसा मुंडा जयंती जैसे कार्यक्रमों में भी उनकी मौजूदगी को व्यापक जनसमर्थन मिला.. इन आयोजनों में उन्होंने आदिवासी संस्कृति, शिक्षा, स्वाभिमान.. और संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया तथा कहा कि आदिवासी समाज ने देश के निर्माण.. और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.. इसलिए उन्हें उनका उचित सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए..

 

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