संसद भवन तक पहुंच गये प्रदर्शनकारी

- जगह-जगह बैरिकेटिंग और दिल्ली पुलिस के आंसू गैस के गोले
- अमित शाह से मिले धर्मेन्द्र प्रधान, क्या इस्तीफा होगा?
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आज दिल्ली में सिर्फ सड़कें ब्लाक नहीं हुईं बल्कि सरकार की ओर से उस नैरेटिव को ब्लाक करने की कोशिश की गयी जिसने उसकी नींद उड़ा दी। दिल्ली में एक तरफ संसद का मानसून सत्र चला तो दूसरी तरफ संसद की ओर बढ़ते हजारों कदम।
बीच में बैरिकेड पुलिस और धारा 163 के साथ मीडिया के अनगित कैमरे। आज ऐसा लगा कि जैसे पूरी राजधानी किसी वेब सिरीज की पालिटिकल फिल्मी स्टोरी का लाइव एपिसोड बन गयी हो। बस फर्क इतना है कि यहां स्क्रिप्ट राइटर कोई नहीं था जो कुछ भी हुआ वह लाइव हुआ है जो होगा लाइव होगा।

क्या इस्तीफा देंगे धर्मेन्द्र प्रधान
संसद मार्च के बीच राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मानसून सत्र शुरू होने के पहले दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद उनके इस्तीफे को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि अभी तक सरकार या प्रधान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
दिल्ली पुलिस को छोड़ने पड़े आंसू गैस के गोले
आज हम सब ने एक अजीब तस्वीर देखी संसद चल रही थी लेकिन संसद तक जाने वाला रास्ता बंद था। जंतर मंतर से निकले कदम बैरिकेडों पर थम गए। नारों की जगह धक्का-मुक्की की तस्वीरें वायरल होने लगीं। पुलिस सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देती रही प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करते रहे। कुछ घंटों के भीतर सोशल मीडिया पर वीडियो बयान और आरोपों की बाढ़ आ गई। काकरोच जनता पार्टी और सोनम वांगचुक के संसद चलो आह्वान पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद भवन पहुंच गए हैं। इस दौरान उनकी रास्ते में पुलिस से कई बार झड़प भी हुई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया। जबकि संसद भवन के सामने प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
अब आंदोलन का अगला चरण क्या
यही वजह है कि अब आंदोलन का अगला चरण सिर्फ सड़क पर होने वाले विरोध तक सीमित नहीं माना जा रहा। एक तरफ सरकार के साथ संभावित संवाद की कोशिश है, तो दूसरी ओर राजनीतिक स्तर पर हो रही बैठकों को भी बारीकी से देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या बातचीत टकराव की जगह ले पाएगी या फिर संसद के बाहर शुरू हुआ यह संघर्ष मानसून सत्र की पूरी राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेगा। फिलहाल इतना तय है कि आंदोलन अब केवल नारों का नहीं, बल्कि बातचीत, रणनीति और राजनीतिक संदेश—तीनों का केंद्र बन चुका है।
सदन हंगामें की वजह से स्थगित होता रहा
विपक्ष का हंगामा नहीं थमने पर स्पीकर ने कार्रवाई दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर में कार्यवाही फिर से शुरू होने के बाद यह सिर्फ सात मिनट तक चली और फिर विपक्ष की भारी नारेबाजी के बीच लोकसभा को दोबारा स्थगित कर दिया गया। उधर, रास में सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होने पर नए सदस्यों को शपथ दिलाई गई। कुछ देर बाद विपक्ष के सदस्यों ने नीट पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों का मुद्दा उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसके कारण कार्यवाही दोपहर 12 बजे स्थगित करनी पड़ी। दोपहर में कार्यवाही शुरू होने पर महज एक मिनट सदन चला। दोबारा में कार्यवाही को 12.30 तक स्थगित किया गया।
हंगामे की भेंट चढ़े प्रश्नकाल और शून्यकाल
मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल हंगामे की भेंट चढ़ गए। नीट पेपर लीक मामले पर संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के सदस्यों का हंगामा बरकरार रहा। इसके बाद सुबह 11 बजे से तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 12.30 बजे दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस और अन्य दलों के सांसदों की नारेबाजी जारी रही। पीठासीन दिलीप सैकिया ने विपक्ष के सदस्यों से कहा, सुबह से लगातार आप लोग सदन को बाधित कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बाढ़ से गंभीर हालात हैं और लोग परेशानी में हैं। ऐसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। बाढ़ के मुद्दे पर सदन में चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने शून्यकाल बेहद महत्वपूर्ण समय होता है और सांसदों को मुद्दा उठाने का अवसर मिलता है। विपक्ष के सदस्यों का व्यवहार बिल्कुल सही नहीं है। दिलीप सैकिया के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्ष के सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इसके बाद सदन की कार्यकारी दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित की गई। इससे पहले, सुबह 11 बजे सत्र शुरू होने पर लोकसभा में दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के सांसदों से अनुरोध किया कि वे अपनी सीट पर बैठे रहें। सदन चलाने में सहयोग करें।
जेपी नड्डा से मिला सीजेपी प्रतिनिधिमंडल, शाह-प्रधान मुलाकात से तेज हुई सियासी अटकलें
संसद मार्च के बीच अब आंदोलन का दूसरा मोर्चा सड़क से निकलकर सत्ता के गलियारों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ जंतर-मंतर और संसद के बीच प्रदर्शन, बैरिकेड और राजनीतिक टकराव की तस्वीरें हैं, तो दूसरी तरफ बातचीत की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के लिए रवाना हुआ है। पार्टी का कहना है कि आंदोलन केवल विरोध तक सीमित नहीं है बल्कि समाधान के लिए सरकार के साथ बातचीत भी जरूरी है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि आशुतोष रांका और वह स्वयं सरकार से बातचीत के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार पार्टी की मांगें पहले दिन से स्पष्ट हैं और देशभर से बड़ी संख्या में युवा इस आंदोलन के साथ खड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पार्टी संवाद के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी बातचीत का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रमुख मांगों पर ठोस समाधान होना चाहिए। उनका दावा है कि आंदोलन अब किसी एक शहर या एक संगठन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं की भागीदारी ने इसे व्यापक स्वरूप दिया है। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में एक और मुलाकात ने चर्चाओं को हवा दे दी।



