छात्र आंदोलन अब देश की सबसे बड़ी राजनीतिक जंग

  • शिक्षा पर संग्राम सत्ता से सीधी टक्कर
  • न सरकार झुकने को तैयार न विपक्ष पीछे हटने को राजी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जब देश में किताबों से ज्यादा बहस राजनीति पर होने लगे जब छात्रों के सवाल सत्ता और विपक्ष के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन जाएं तब समझ लीजिए कि मामला सिर्फ शिक्षा का नहीं रहा। देश इस वक्त ठीक उसी मोड़ पर खड़ा है। कैंपस का गुस्सा अब संसद की दीवारों से टकरा रहा है और छात्र आंदोलन धीरे-धीरे भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी परीक्षा बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार है जो अपने फैसलों और अपने मंत्रियों के बचाव में मजबूती से खड़ी है। दूसरी तरफ विपक्ष है जिसने इस मुद्दे को सीधे जवाबदेही और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ दिया है। आरोप प्रत्यारोप प्रदर्शन गिरफ्तारी नारे और राजनीतिक बयान हर नया दिन इस टकराव को और तीखा बना रहा है। शिक्षा का मुद्दा अब केवल विश्वविद्यालयों का मुद्दा नहीं रह गया यह राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ बैठा है।

कौन चुका रहा है असली कीमत

सवाल यह भी है कि आखिर इस लड़ाई की असली कीमत कौन चुका रहा है? सत्ता और विपक्ष अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में हैं, लेकिन बीच में खड़ा छात्र आज भी उसी जवाब का इंतजार कर रहा है, जिसके लिए यह पूरा आंदोलन शुरू हुआ था। संसद में शब्दों की लड़ाई जारी है, सड़कों पर नारों की गूंज है और देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह गतिरोध किसी समाधान तक पहुंचेगा या फिर और गहराएगा। हर राजनीतिक संघर्ष का एक ऐसा क्षण आता है जब पीछे हटना दोनों पक्षों को कमजोरी लगता है। शिक्षा का यह विवाद भी शायद उसी मोड़ पर पहुंच चुका है। सरकार के लिए यह अधिकार और निर्णय की विश्वसनीयता का सवाल बन गया है जबकि विपक्ष इसे जवाबदेही और राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक बनाकर पेश कर रहा है। ऐसे में देश के सामने सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं कि कौन जीतेगा, बल्कि यह है कि क्या छात्रों के मूल मुद्दे इस शोर के बीच सुने भी जाएंगे।

क्यों हो रहा है पेपर लीक

आशुतोष रांका ने कहा कि पेपर लीक इसलिए हो रहे हैं क्योंकि ऊपर से लेकर नीचे तक सिस्टम में नाकाबिल लोग बैठे हैं। जब तक जिम्मेदारी तय नहीं की जाएगी जब तक दोषियों के मन में डर पैदा नहीं होगा और जब तक सिस्टम को इस तरह मजबूत नहीं किया जाएगा कि पेपर लीक की गुंजाइश ही न रहे तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक एक संगठित गिरोह के जरिए होता है जिसमें नीचे से लेकर ऊपर तक कई लोग शामिल होते हैं और आर्थिक लाभ पहुंचता है। इसलिए केवल कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है बल्कि उस व्यवस्था को बदलना जरूरी है जिसकी वजह से पेपर लीक हो रहे हैं। उन्होंने पीएम के एक्स पोस्ट पर कहा है कि आपने चोट लगने के बाद मरहम लगाने की बात की है जबकि हमारी लड़ाई यह है कि चोट लग ही क्यों रही है। उनका कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। देश में कई बड़े मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए लेकिन मूल समस्या खत्म नहीं हुई क्योंकि सरकार ने मूल कारणों और व्यवस्था से जुड़ी खामियों को दूर नहीं किया। रांका ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं की जड़ अक्षमता और भ्रष्टाचार है जिसकी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय तक जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

व्यवस्था में बदलाव जरूरी : सीजेपी

नीट यूजी पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों को जल्द सख्त सजा दिलाने की घोषणा की। इसको लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि पेपर लीक होने के बाद दोषियों को क्या सजा दी जाएगी यह एक अलग बात है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पेपर लीक ही क्यों रहे हैं?

कॉकरोच जनता पार्टी ने ठुकराया बातचीत का प्रस्ताव

  • भाजपा के कार्यकर्ता पत्थर फेंककर कर रहे सीजेपी को बदनाम : दिपके

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को बातचीत जारी रखने का प्रस्ताव दिया गया। लेकिन सीजेपी के नेतृत्व ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। सरकार के सत्रों के हवाले से गुरुवार को यह जानकारी दी। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की मुहिम से जुड़े युवा एकजुट होकर भारत की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। धर्म, जाति, दल और विचारधारा के मुद्दे पीछे हट गए और लगभग पूरा देश सीजेपी की मुहिम से जुड़ता दिख रहा है। अभिजीत दिपके ने गुरुवार को आरोप लगाया कि छात्रों के चल रहे विरोध-प्रदर्शन को जानबूझकर बाधित करने के लिए बाहर से लोगों को भेजा जा रहा है। उन्होंने भाजपा के कार्यकर्ताओं पर पत्थर फेंकने और प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। पत्रकारों से बात करते हुए दिपके ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन एक महीने से बिना किसी ऐसी घटना के चल रहा था, लेकिन प्रदर्शन के जोर पकडऩे के बाद स्थिति बदल गई।

राहुल के खुलासों से बढ़ी सरकार की बौखलाहट : जयराम रमेश

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नीट मुद्दे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रें स के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के खुलासों से सरकार की बौखलाहट लगातार बढ़ती जा रही है। जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट में लिखा है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से देर शाम आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस राहुल गांधी के सीधे खुलासों के जवाब में आई है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार की बौखलाहट लगातार बढ़ती जा रही है। जेपी नड्डा को इस बचकानी उंगली उठाने की राजनीति से आगे बढ़कर पहले मंत्री प्रधान और प्रधानमंत्री की अभूतपूर्व विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए।

एनटीए है जड़

एनटीए की स्थापना वर्तमान सरकार ने विशेष रूप से परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए की थी। सरकार ने जानबूझकर परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण किया उसे एनटीए के माध्यम से संचालित किया और विश्वविद्यालयों व राज्यों पर इसे अपनाने का दबाव बनाया। पहले से मौजूद व्यवस्था को खत्म करके एनटीए को खड़ा किया गया। इसके बाद एनटीए लगातार पूरी तरह कॉम्प्रोमाइज और अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह अक्षम साबित हुई। उन्होंने कहा कि एनटीए की स्थापना के बाद से अब तक इसके कार्यकाल में कम-से-कम 9 बार पेपर लीक हुए हैं। इनमें 24 की वे घटनाएं भी शामिल हैं जब अनियमितताओं के कारण एनटीए को कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं।

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