मणिपुर हिंसा जांच: CBI-SIT को पूरा सहयोग मिले, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने शुक्रवार को कहा कि जांच में बहुत ज़्यादा देरी को देखते हुए रोजाना सुनवाई की जरूरत पड़ सकती है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अदालत ने शुक्रवार को कहा कि जांच में बहुत ज़्यादा देरी को देखते हुए रोजाना सुनवाई की जरूरत पड़ सकती है.
CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने CBI, SIT और कोर्ट द्वारा नियुक्त मॉनिटर दत्तात्रेय पडसलगीकर की नई स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए ये आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के मामलों में फास्ट ट्रैक ट्रायल के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने का प्रस्ताव दिया है. अदालत ने कहा कि जांच में बहुत ज़्यादा देरी को देखते हुए रोजाना सुनवाई की जरूरत पड़ सकती है. CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने CBI, SIT और कोर्ट द्वारा नियुक्त मॉनिटर दत्तात्रेय पडसलगीकर की नई स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए ये आदेश दिया.
अदालत ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद मणिपुर सरकार और मणिपुर व गुवाहाटी हाई कोर्ट से सलाह करके स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह जांच में आ रही चुनौतियों से निपटने में CBI और SIT को पूरा सहयोग दे.
वैध धार्मिक ढांचे पर अतिक्रमण ना हो’
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हिंसा प्रभावित मणिपुर में जिन जगहों पर पहले वैध धार्मिक ढांचे मौजूद थे वहां किसी भी तरह का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा. जस्टिस गीता मित्तल कमेटी की रिपोर्ट और दो वीडियो पर विचार करते हुए CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये निर्देश दिया. बेंच ने कहा कि जातीय हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त होने से पहले जहां वैध धार्मिक ढांचे मौजूद थे, उन जगहों पर आगे कोई अतिक्रमण नहीं होने दिया जाए.
वकील शाहरुख़ आलम ने आज कहा कि जो तोड़-फोड़ हुई, उसमें सब कुछ लूट लिया गया, यहां तक कि मालिकाना हक़ के कागज़ात भी. कुछ चर्चों का इस्तेमाल जिम के तौर पर भी किया जा रहा है. जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अब और कोई कब्ज़ा नहीं होना चाहिए. यही मुख्य चिंता है.
कमेटी का कार्यकाल बढ़ाया गया
CJI सूर्यकांत ने कहा कि जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट और दो वीडियो सौंपे हैं. कमेटी यह सुनिश्चित करेगी कि जहां भी कोई वैध ढांचा मौजूद था, उस जगह पर कोई कब्ज़ा न हो. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ऐसी जगहों पर आगे कोई कब्ज़ा नहीं होने दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली कमेटी का कार्यकाल 31 मार्च तक बढ़ा दिया.



