क्या वाकई फास्ट हैं फास्ट ट्रैक कोर्ट? 3 साल के आंकड़े बताते हैं पूरी तस्वीर

फास्ट ट्रैक” यह शब्द बीते कुछ दिनों से खूब चर्चा में हैं. पीएम मोदी की ओर से नीट पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन की बात के बाद से ही यह फिर से सुर्खियों में है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट का मकसद दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में त्वरित न्याय देना है, लेकिन पिछले तीन वर्षों में 2 लाख से ज्यादा मामलों के निपटारे के बावजूद लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 2.45 लाख से अधिक पहुंच गई है.  2023 से 25 तक कोर्ट में कितने मामले आए. किस साल कितनों का निपटारा हुआ और कितने अभी पेडिंग हैं.

फास्ट ट्रैक” यह शब्द बीते कुछ दिनों से खूब चर्चा में हैं. पीएम मोदी की ओर से नीट पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन की बात के बाद से ही यह फिर से सुर्खियों में है. इससे पहले भी निर्भया कांड और उसके बाद के तमाम जघन्य अपराधों के मामलों में भी जनता की यही मांग रही कि न्याय में देरी न हो.

अभी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में अनियमितता को लेकर भी प्रदर्शन चल रहा है, लेकिन क्या आपको पता है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट असल में कितना फास्ट है. इसमें कितने माममे सुलझाए जा चुके हैं.

इसको लेकर खुद सरकार के मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जवाव दिया है, जिसके मुताबिक बीते 3 सालों में स्पेशल कोर्ट के सामने करीब 3 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जिनमें पॉक्सो भी शामिल है और उनमें से 2 लाख 28 हजार मामलों का निपटारा हो पाया है. आइए आपको इसके बारे में डिटेल से बताते हैं. सरकार ने क्या-क्या जवाब दिया है उसे आसान शब्दों में समझाने की कोशिश करते हैं.

सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या घटने के बजाय लगातार बढ़ती चली गई है. साल 2023 में जहां 2.02 लाख मामले लंबित थे.

वहीं, 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.04 लाख पहुंच गया. 2025 के अंत तक स्थिति और बिगड़ गई और लंबित मामलों की संख्या 2.45 लाख से भी ज्यादा हो गई. साफ है कि हर साल नए मामले जिस रफ्तार से दर्ज हो रहे हैं, उस अनुपात में निपटारे की गति नहीं बढ़ पाई, जिसका सीधा असर पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने पर पड़ रहा है.

साल-दर-साल आंकड़े क्या कहते हैं

साल 2023 में 81,471 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 76,319 मामलों का निपटारा हुआ. 2024 नए मामलों की संख्या बढ़कर 88,902 पहुंची और 85,595 मामलों का निपटारा किया गया.

जबकि, 2025 में सबसे ज्यादा 1.43 लाख से अधिक नए मामले दर्ज हुए, लेकिन केवल 66,500 मामलों का निपटारा हो सका. सबसे बड़ी चिंता 2025 में नए मामलों की तुलना में निपटारे की रफ्तार आधे से भी कम रही.

देशभर में अदालतों का जाल, फिर भी दबाव कम नहीं

30 अप्रैल 2026 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट काम कर रही थीं, जिनमें से 398 विशेष रूप से पॉक्सो मामलों के लिए बनी एक्सक्लूसिव कोर्ट हैं. इतनी बड़ी संख्या में अदालतें होने के बावजूद लंबित मामलों में कमी न आना यह दर्शाता है कि समस्या सिर्फ अदालतों की संख्या की नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और संसाधनों की भी है. फिलहाल यह योजना 30 सितंबर 2026 तक के लिए बढ़ाई जा चुकी है, यानी सरकार इसे जारी रखने के पक्ष में है.

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