प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ शत्रुओं जैसा व्यवहार कर रही है नरेन्द्र मोदी सरकार: सोनिया गांधी

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख ने भाजपा पर साधा निशाना

अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ के लिए लिखा लेख

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नयी दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने शुक्रवार को आरोप लगाया है कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था के ‘पतन’ के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन तथा जवाबदेही की मांग कर रहे छात्रों को नरेन्द्र मोदी सरकार ‘देश के शत्रु’ की तरह पेश कर रही है और उनकी आवाज दबाने के लिए दमनकारी ताकत का इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ के लिए लिखे लेख में यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगें सीधी और स्पष्ट हैं कि भारत सरकार की जवाबदेही तय हो और शिक्षा में सुधार किया जाए। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया, ‘‘मोदी सरकार ने उनकी बहादुरी का जवाब कायरता और निर्मम क्रूरता से दिया है, उनके साथ भविष्य के कर्णधारों की तरह नहीं, बल्कि देश के शत्रुओं की तरह व्यवहार किया है।’’ उन्होंने 20 जुलाई की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ‘‘शर्मनाक दिन’’ था, जब दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए ‘‘बिना किसी उकसावे के हिंसा’’ का सहारा लिया।
सोनिया गांधी ने दावा किया कि स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा पर कुल बजट में खर्च का अनुपात क्रमश: 5० प्रतिशत और 33 प्रतिशत कम हुआ है। उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या कोई इस तरह के बेतुके तरीके से पीछे हटने में कोई तुक देख सकता है?’’ उन्होंने पिछले 12 वर्षों में करीब एक लाख सरकारी स्कूल बंद किए जाने और 43,000 निजी स्कूल खोले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन निजी स्कूलों में से बड़ी संख्या में स्कूल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उससे जुड़े संगठनों द्वारा संचालित किए जाते हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों को मिलने वाले अनुदान में कटौती की और उन्हें ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेने के लिए मजबूर किया गया।

संवाद के बजाय हिंसा का इस्तेमाल करती है सरकार

सोनिया गांधी ने लिखा, ‘इसने हमारी सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ‘नियमित रूप से संवाद के बजाय हिंसा का इस्तेमाल करती है’’ और किसानों से लेकर कार्यकर्ताओं तक, असहमति को दबाने की एक स्पष्ट प्रवृत्ति दिखायी देती है। सोनिया गांधी ने लिखा, ‘हमारे भविष्य के डॉक्टरों और इंजीनियरों, शिक्षकों और लोक सेवकों, उद्यमियों और राष्ट्र निर्माताओं तक पहुंचने और उन्हें समझने के बजाय, सरकार ने उनके खिलाफ राज्य की दमनकारी शक्ति का इस्तेमाल किया।’ उन्होंने कहा कि इसे ‘न तो माफ किया जा सकता है और न ही भुलाया जा सकता है।’ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार ने ‘हर असहमति को राष्ट्र-विरोधी बताने वाले पुराने टूलकिट’ का इस्तेमाल किया है।

निजी शिक्षा हासिल करने की लागत लाखों प्रतिभाशाली छात्रों को कर रही हतोत्साहित

सोनिया गांधी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और सस्ती सार्वजनिक शिक्षा की कमी के कारण भारतीय परिवारों को अपने बच्चों की शिक्षा पर अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) की कोचिंग पर परिवारों द्वारा खर्च की जाने वाली कुल राशि उतनी है, जितना मोदी सरकार सार्वजनिक शिक्षा पर कुल मिलाकर निवेश करती है। उन्होंने लिखा, ‘निजी शिक्षा हासिल करने की लागत लाखों प्रतिभाशाली छात्रों को हतोत्साहित करती है, जो साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं लेकिन उनमें अपार क्षमता होती है।’ सोनिया गांधी ने कहा कि इन खर्चों से छात्रों पर परिवारों की उम्मीदों का ‘कुचल देने वाला बोझ’ भी पड़ता है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने परीक्षा प्रणाली में ‘केंद्रीकरण, निजीकरण और राजनीतिकरण’ का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

12 वर्षों में देशभर में 152 प्रश्नपत्र लीक हुए

सोनिया गांधी ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में 152 प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिनमें 17 में एनटीए के गठन के बाद उसके द्वारा आयोजित परीक्षाओं में नौ कथित प्रश्नपत्र लीक भी शामिल हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘‘पक्षपातपूर्ण निष्ठा’’ के आधार पर अयोग्य कुलपतियों की नियुक्ति और राजनीतिक रूप से जुड़े लेकिन अयोग्य शिक्षकों की भर्ती ने सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में शिक्षण का संकट पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा व्यवस्था बदलते तरीकों और मानकों के साथ कदम नहीं मिला पा रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित दुनिया की जरूरतों के अनुरूप ढलने में विशेष रूप से असमर्थ है।उनका कहना है, ‘‘छात्रों को एक ऐसी व्यवस्था में सफल होने की कोशिश करनी पड़ रही है जिसकी मांगें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि वे स्वयं इसके लिए पर्याप्त संसाधनों से बहुत दूर हैं।

संयुक्त परिवार पर सुप्रीम टिप्पणी, कहा माता-पिता की जगह ले रहा मोबाइल

१११ 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। संयुक्त परिवार प्रणाली के लगातार खत्म होने और एकल परिवारों में बच्चों को समय देने के बजाय मोबाइल-गैजेट्स थमा देने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि माता-पिता की जगह गैजेट्स (मोबाइल) ले लेंगे, तो यह स्थिति समाज के लिए विनाशकारी साबित होगी और आने वाली पीढ़ी पारिवारिक रिश्तों व बंधनों से पूरी तरह अनजान हो जाएगी।
दरअसल, हाल ही में पति-पत्नी की हत्या की घटनाओं में, जिनमें सोनम रघुवंशी का मामला भी शामिल है, इसका विश्लेषण करते हुए स्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि यह बदलते समाज का प्रतिबिंब है। पीठ ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी अधिक बुद्धिमान और जानकार है, लेकिन आज की पीढ़ी अत्यधिक दबाव झेलने में सक्षम नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजकल लोग व्हाट्सएप पर प्रसारित संदेशों पर भरोसा करते हैं और उन्हें ज्ञान मान लेते हैं। अदालत की चिंता से सहमत होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह एक सामाजिक समस्या बन गई है और मानवीय संबंधों में विश्वास कम हो रहा है तथा सहिष्णुता की कमी हो रही है।

यह एक आपदा है

न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि हाल ही में वे एक रेस्तरां में थे और उन्होंने देखा कि एक परिवार ने खाना खाते समय बच्चे को व्यस्त रखने के लिए उसे फोन दे दिया। उन्होंने कहा, अगर माता-पिता की जगह गैजेट्स ने ले ली, तो यह एक आपदा है। भविष्य में ऐसा और भी ज्यादा होगा। संयुक्त परिवार एक संपत्ति है, और लोग इसे समझते नहीं हैं। खुशी भौतिक चीजों से नहीं, बल्कि मानवीय बंधन और रिश्तों से मिलती है। हम मशीनों की तरह होते जा रहे हैं।

दिल्ली, यूपी-पंजाब में कई ठिकानों पर ईडी ने की छापेमारी

45० करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी का मामला
१११ 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए यूपी के बुलंदशहर, दिल्ली और पंजाब में एक साथ कई ठिकानों पर छापा मारा। यह कार्रवाई करीब 45० करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2००2 के तहत की जा रही है।
इडी के लखनऊ जोनल कार्यालय की ओर से की जा रही इस कार्रवाई में संतोष ओवासीज और उससे जुड़ी कंपनियों के परिसरों की तलाशी ली जा रही है। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई द्वारा दर्ज बैंक धोखाधड़ी के मामले पर आधारित है। आरोप है कि संतोष ओवासीज ने बैंकों के एक कंसोर्टियम से करीब 45० करोड़ रुपये का ऋण लिया। ऋण राशि का निर्धारित उद्देश्य के विपरीत दुरुपयोग किया गया। इससे बैंकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

भारी हंगामें के बीच लोस 27 तक स्थगित, राज्यसभा की कार्यवाही थमी

संसद से सडक़ तक हंगामा जारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का आज पांचवां दिन है। आज भी नीट पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा जारी है। विपक्ष के हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही को 12 बजे तक स्थगित क दिया गया। वहीं, राज्यसभा में इस चर्चा जारी है।
विपक्ष के नारेबाजी के बीच लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। विपक्षी सांसद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। अब लोकसभा की अगली बैठक 27 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे होगी।

हम चर्चा नहीं करेंगे, तो देश में नहीं जाएगा सही संदेश : रिजिजू

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, मैंने आज एक बार फिर केसी वेणुगोपाल जी से अनुरोध किया है कि जब हम सभी इस बात से सहमत हैं कि नीट पर चर्चा होनी चाहिए, तो हमें चर्चा करनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिया है। सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है और चर्चा की मांग की है। अगर हम चर्चा नहीं करेंगे तो देश में सही संदेश नहीं जाएगा।

विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन में शामिल हुए खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन में शामिल हुए। वहीं राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल युद्ध के वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने देश के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान और अटूट साहस को याद करते हुए उन्हें नमन किया।

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