धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब नितिन गडकरी पर गिरेगी गाज! विपक्ष ने बनाया बड़ा प्लान

धर्मेद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया तो लगा की अब मामला शांत हो जाएगा लेकिन ऐसा हो न सका अब जनता को एक और नेता का इस्तीफा चाहिए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आज-कल भाजपा सरकार की दिशा और दशा दोनों सही नहीं चल रही है। एक तरफ भाजपा सरकार में मंत्री जहां कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। उन्हें आज मुँह की खानी पड़ी है।

क्योंकि देश का युवा जाग चुका है, हिन्दू-मुसलमान से ऊपर उठ चुका है। उसे शिक्षा, रोजगार और विकास की बातें समझ आने लगी हैं और यही वजह है कि केंद्र में बैठी मोदी सरकार में डर का माहौल फैला हुआ है। जबसे CJP का प्रोटेस्ट हुए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
हुआ तबसे मोदी सरकार के लिए और परेशानी बढ़ती जा रही है।

दरअसल धर्मेद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया तो लगा की अब मामला शांत हो जाएगा लेकिन ऐसा हो न सका अब जनता को एक और नेता का इस्तीफा चाहिए। नीट के बाद अब E 20 को लेकर बवाल मच गया है ऐसा कहा जा रहा है कि नितिन गडकरी की कुर्सी खतरे में है।

जैसे सीजेपी ने परीक्षा में सुधार के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रखी थी. उसी तरह से ई20 जनता पार्टी मैदान की ओर से मांग की जा रही है कि ग्राहकों को 100% पेट्रोल खरीदने का विकल्प दिया जाए और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस्तीफा दें.

इस कैंपेन को ट्रांसपोर्टर्स का समर्थन मिला है. ‘दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन’ ने 4 अगस्त को E20 पेट्रोल के खिलाफ संसद तक मार्च करने का ऐलान किया है. एसोसिएशन का आरोप है कि इथेनॉल-ब्लेंडिंग पॉलिसी से फ्यूल की क्षमता कम हुई है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ा है और इंजन की परफॉर्मेंस पर असर पड़ा है, खासकर पुरानी गाड़ियों में.

‘E20 जनता पार्टी’ – ने कहा कि वह सब्सिडी, मुफ़्त फ्यूल या इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल को हटाने की मांग नहीं कर रही है, बल्कि सिर्फ़ यह चाहती है कि ग्राहकों को अपनी पसंद का फ्यूल खरीदने का विकल्प मिले. इसने फ्यूल की पारदर्शी लेबलिंग की भी मांग की ताकि ग्राहकों को पता चले कि वे क्या खरीद रहे हैं; साथ ही फ्यूल ब्लेंड्स की लागत, फायदों और असर से जुड़े डेटा को पब्लिश करने और माइलेज, इंजन परफॉर्मेंस, एमिशन और मेंटेनेंस लागत पर स्वतंत्र स्टडीज़ कराने की भी मांग की.

वहीं इसे लेकर अरविंद केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में टाउनहॉल कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा है। केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के युवाओं और लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया है। अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘देश के युवाओं ने एक होकर आवाज उठाई तो धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। ई20 पर भी हमें एक होकर आवाज उठानी पड़ेगी।

इस शनिवार हम ‘नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट ई20′ आयोजित कर रहे हैं, जिसमें शामिल होकर आप ई20 पर अपनी बात रख सकते हैं। आप इसमें ऑनलाइन भी शामिल हो सकते हैं।’ अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ई20 का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से अपील की कि लगे हाथ इसका भी समाधान हो जाए। केजरीवाल ने ई20 के खिलाफ दिल्ली में एक टाउनहॉल आयोजित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि उम्मीद की काफी संख्या में लोग इसमें शामिल होंगे।

न सिर्फ केजरीवाल बल्कि टीम भारत के संस्थापक तहसीन पूनावाला ने ई20 ईंधन नीति के खिलाफ नया आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि ई20 नीति सबसे खराब तरीके से लागू की गई नीतियों में से एक है। उनका कहना है कि अगर इस नीति में सही सुधार किए जाएं तो लोगों को 80 से 90 रुपये प्रति लीटर के बीच शुद्ध और बिना मिलावट वाला पेट्रोल मिल सकता है।

इसी मांग को लेकर उन्होंने 31 जुलाई को दिल्ली में ‘गाड़ी मार्च, गांधी मार्च’ निकालने की घोषणा की है। तहसीन पूनावाला ने लोगों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह मार्च इंडिया गेट से शुरू होगा और संसद मार्ग होते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हरदीप पुरी के कार्यालय तथा आवास के बाहर पहुंचेगा। उन्होंने लोगों से अपनी कार, बाइक और अपनी आवाज के साथ आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह नागरिकों के अधिकार और उनकी पसंद का सवाल है।

तहसीन पूनावाला ने घोषणा की कि ‘गाड़ी मार्च, गांधी मार्च’ 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को आयोजित किया जाएगा। यह मार्च नई दिल्ली के इंडिया गेट से शुरू होकर संसद मार्ग तक जाएगा। उन्होंने कहा कि मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी नितिन गडकरी और हरदीप पुरी के कार्यालय और आवास के बाहर भी जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपनी कार और बाइक के साथ इस अभियान में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह “मेरी गाड़ी, मेरा अधिकार” और “मेरी बाइक, मेरी पसंद” का आंदोलन है।

पूनावाला ने कहा कि यह अभियान केवल ईंधन की कीमतों का मुद्दा नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को विकल्प देने और नीति में पारदर्शिता लाने की मांग भी है। उनका कहना है कि सरकार को ई20 नीति की समीक्षा करनी चाहिए और उन वाहन मालिकों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, जिनके वाहन इस ईंधन मिश्रण से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने अपने अभियान के तहत ‘गाड़ी मार्च-गांधी मार्च’ और मेरी गाड़ी-मेरा अधिकार जैसे अभियानों का भी उल्लेख किया और लोगों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील की।

तहसीन पूनावाला ने आंदोलन के लिए कई मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि ई10 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों के लिए ई10 पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए। ई20 पेट्रोल की कीमत में 20 प्रतिशत की कमी की जाए। शुद्ध यानी ई0 पेट्रोल, जिसकी मौजूदा खुदरा कीमत उन्होंने 165 से 170 रुपये प्रति लीटर बताई, उसे सस्ता किया जाए।

एक्टिविस्ट और विपक्षी पार्टियों द्वारा उठाया गया एक और मुद्दा हितों के टकराव से जुड़ा है. उनका यह दावा है कि नितिन गडकरी के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाले व्यवसाय को एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी से काफी फायदा हो सकता है. विरोध करने वालों ने ज्यादा पारदर्शिता की मांग करते हुए इन आरोपों का जिक्र किया है.

इस अभियान की एक बड़ी मांग यह है कि उपभोक्ता को E20 फ्यूल और 100% पेट्रोल के बीच चुनने की आजादी मिलनी चाहिए. विरोध करने वालों का यह तर्क है कि रेगुलर पेट्रोल या तो अब आसानी से उपलब्ध नहीं है या फिर काफी ज्यादा कीमत पर बेचा जा रहा है. उनका कहना है कि अगर वाहन चालक चाहे तो उन्हें बिना ब्लेंडिंग वाला पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए. यह विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है.

नीट पेपर लीक विवाद के बाद धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद विपक्षी पार्टी और इसका विरोध करने वालों ने नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी पर दबाव बढ़ा दिया है और E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर जवाबदेही की मांग की है. खैर दोस्तों यह मामला आगे कितना बढ़ता है ये तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा। खैर ऐसा माना जा रहा है कि पेपर लीक के बाद अब E20 का मुद्दा सियासी गलियारों में नया रंग भर सकता है।

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