केरल हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, वाइब्रेटिंग डिवाइस के इस्तेमाल को माना रेप
केरल हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. इस फैसले के मुताबिक, महिला के प्राइवेट पार्ट पर वाइब्रेटिंग मशीन या उपकरण रखना POCSO एक्ट और बलात्कार माना जाएगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: केरल हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. इस फैसले के मुताबिक, महिला के प्राइवेट पार्ट पर वाइब्रेटिंग मशीन या उपकरण रखना POCSO एक्ट और बलात्कार माना जाएगा. कोर्ट ने 17 वर्षीय लड़की से यौन उत्पीड़न करने वाले आरोपी जोशी की 10 साल की सजा बरकरार रखी और उसकी अर्जी खारिज कर दी.
केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और सख्त कानूनी फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने साफ किया है कि किसी भी महिला या नाबालिग के प्राइवेट पार्ट पर वाइब्रेटिंग मशीन या कोई भी उपकरण रखना केवल यौन उत्पीड़न नहीं है. यह पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत ‘पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ और आईपीसी (IPC) की धारा 375(b) के तहत सीधे तौर पर बलात्कार (Rape) की श्रेणी में आता है. अदालत ने ये फैसला त्रिशूर निवासी आरोपी जोशी के. जे. (Joshy K J) की याचिका को खारिज करते हुए सुनाया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी को एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से बलात्कार और गंभीर यौन उत्पीड़न के जुर्म में ट्रायल कोर्ट द्वारा 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसे हाई कोर्ट ने पूरी तरह सही ठहराया है. यह घटना 20 जुलाई 2019 की है. पीड़िता 12वीं की परीक्षा में फेल होने के बाद पढ़ाई और नौकरी की तलाश में थी. चर्चित फर्जी एंटीक कलेक्टर मनसून मावुंकल ने उसे कॉस्मेटोलॉजी सिखाने और नौकरी देने का झांसा देकर अपने घर बुलाया.
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच के अनुसार, मनसून के सहयोगी आरोपी जोशी ने पीड़िता को ट्रीटमेंट रूम में जबरन लिटाया. इसके बाद उसने एक वाइब्रेटिंग मशीन जैसा उपकरण पीड़िता के योनिक द्वार पर चालू अवस्था में जबरन लगाया. आरोपी ने पीड़िता को मुंह बंद रखने की धमकी भी दी थी. मनसून की गिरफ्तारी के बाद पीड़िता ने इस दरिंदगी का खुलासा किया. हाई कोर्ट ने कहा कि किसी उपकरण को योनिक द्वार या उसके आसपास रखना ही पेनेट्रेशन और गंभीर यौन हमले की पुष्टि के लिए पर्याप्त है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत तय न्यूनतम 10 साल की सजा में कोई कानूनी कटौती संभव नहीं है.



