भारत के मेगा मिसाइल टेस्ट से पहले बड़ा अलर्ट, 2530 किमी तक NOTAM लागू
भारत ने हिंद महासागर में संभावित मिसाइल टेस्टिंग के लिए 6-7 अगस्त 2026 को 2530 किलोमीटर का नो-फ्लाई जोन घोषित किया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारत ने हिंद महासागर में संभावित मिसाइल टेस्टिंग के लिए 6-7 अगस्त 2026 को 2530 किलोमीटर का नो-फ्लाई जोन घोषित किया है.
ये ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से होने वाला यह टेस्ट लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता को परखेगा, जिसमें अग्नि या K-4 जैसी मिसाइलें शामिल हो सकती हैं.
भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में संभावित मिसाइल परीक्षण को लेकर बड़ा नोटिफिकेशन जारी किया है. भारतीय एजेंसियों की ओर से जारी NOTAM यानी Notice to Airmen में 6 और 7 अगस्त 2026 के दौरान एक बड़े समुद्री इलाके को नो-फ्लाई जोन के तौर पर चिन्हित किया गया है.
इस NOTAM के मुताबिक, मिसाइल परीक्षण की संभावित शुरुआत 6 अगस्त को भारतीय समय के अनुसार शाम करीब 6 बजे से होगी. वहीं यह अवधि 7 अगस्त की रात करीब 9 बजे तक बताई गई है.
इस टेस्ट के लिए अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा के मिसाइल टेस्ट साइट से जुड़ा समुद्री क्षेत्र चिन्हित किया गया है. नोटिफिकेशन में अधिकतम 2,530 किलोमीटर तक की लंबाई वाला प्रतिबंधित क्षेत्र बताया गया है.
यानी अगर इस NOTAM के आधार पर परीक्षण होता है, तो यह लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली से जुड़ा अहम टेस्ट हो सकता है. हालांकि, NOTAM में मिसाइल या उसके मॉडल का नाम नहीं बताया गया है. इसलिए अभी यह कहना संभव नहीं है कि किस मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा.
इस मिशन का मकसद क्या?
हिंद महासागर में लगभग 2,530 किलोमीटर लंबे एक बड़े इलाके में हवाई जहाजों और जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने वाले नोटिस (NOTAM) को डिफेंस विशेषज्ञों, पड़ोसी देशों और दुनिया की सैन्य एजेंसियों ने ध्यान से देखा है.
सरकार अभी भी इस मिसाइल टेस्ट की पूरी जानकारी गुप्त रखे हुए है. लेकिन जो 2,530 किलोमीटर का रास्ता बताया गया है, वह ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से पहले हुए टेस्टों से मिलता-जुलता है.
इस द्वीप को DRDO और स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड चलाते हैं. इसके और भी के आंकड़ों से लगता है कि इस टेस्ट में नई पीढ़ी की जमीन से दागी जाने वाली अग्नि मिसाइल या समुद्र के अंदर से दागी जाने वाली K-4 मिसाइल हो सकती है.
इस मिशन का मकसद सटीक गाइडेंस, मल्टीपल वॉरहेड री-एंट्री सिस्टम और प्रोपल्शन परफॉर्मेंस जैसे अहम तकनीकी पैरामीटर्स को टेस्ट करना. भारत ने हाल ही में अपनी MIRV क्षमता का सफल परीक्षण किया है, जिससे उसकी “नो फर्स्ट यूज” (पहले इस्तेमाल न करने) वाली परमाणु रणनीति के तहत उसकी प्रतिरोधक क्षमता (deterrence capability) काफी बढ़ गई है.



