संसद में हंगामा जारी, विपक्ष अपनी मांग पर डटा

एफसीआरए पर सत्ता पक्ष व विपक्ष में नहीं बनी सहमति

राज्यसभा की कार्यवाही जारी, लोकसभा स्थगित

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आज संसद के मानसून सत्र का 14वां दिन है। पिछले 13 दिनों के दौरान सरकार और विपक्षी दलों के बीच गतिरोध जारी रहा। विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार बाधित होती रही है। राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हो गई है। इससे पहले सुबह 11 बजे शुरू होने के आधे घंटे की चर्चा के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। राज्यसभा में फिलहाल, विपक्ष के हंगामे के बीच प्रश्नकाल के तहत सवाल-जवाब जारी है।
लोकसभा ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा बारिश के बीच संसद परिसर में अपनी गाड़ी का इंतजार करते दिखे। हालांकि, इस दौरान उन्होंने मीडिया के किसी सवालों का जवाब नहीं दिया।
संसद के मॉनसून सत्र में फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 26 (एफसीआए बिल) को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच आम सहमति न बनने के कारण गतिरोध जारी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को संसद में इस बिल को पेश किए जाने की संभावना बेहद कम है। सरकार और विपक्ष के बीच अन्य मुद्दों के साथ-साथ इस संशोधन की शर्तों को लेकर गहरा मतभेद बना हुआ है। विपक्ष अपनी इस मांग पर अड़ा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली में नीट प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के बारे में लोकसभा में बयान दें। उधर इन मुदें को लेकर दोनो सदनों में हंगामा जारी रहा। बाद लोक सभा को 2 बजे तक व रास को 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

इससे पहले विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। विपक्ष ने 2० जुलाई को सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी व गबन के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने चंदा चोर, गद्दी छोड़ लिखे पोस्टर दिखाए, जबकि अन्य विपक्षी सांसदों ने अमित शाह जवाब दो के पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि राम मंदिर में कथित चोरी का मुद्दा उठाने का मतलब भगवान राम का विरोध करना नहीं है। वहीं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस, सपा और सीपीआई पर भगवान राम विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन दलों ने पहले भी राम मंदिर निर्माण का विरोध किया था और अब संसद में इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।

इतना कठोर बिल पास नहीं होने देंगे : वेणुगोपाल

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पत्रकारों से कहा, यह सोच कि आरएसएस कुछ भी कर सकता है जबकि दूसरे एनजीओं नहीं, स्वीकार्य नहीं है। हम इसका कड़ा विरोध करेंगे। हम उन्हें इतना कठोर बिल पास नहीं करने देंगे।

मेटा का माफी मांगना भारत के कानून, संविधान और संसद की जीत : दुबे

भाजपा सांसद और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने के मामले में माफी मांगना भारत के कानून, संविधान और संसद की जीत है। उन्होंने कहा कि भारत में कारोबार करने वाली हर कंपनी को भारतीय कानून का पालन करना होगा। दुबे का यह बयान उस बैठक के बाद आया, जिसमें मेटा के प्रतिनिधिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की।

एफसीआरए एक्ट सरकार का तर्क

एफसीआरए एक्ट यह बताता है कि भारतीय नागरिक, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), ट्रस्ट, एसोसिएशन और कंपनियां भारत के बाहर से भेजे गए पैसे, सिक्योरिटी या सामान को कैसे प्राप्त और इस्तेमाल कर सकती हैं। यह विदेशी फंडिंग वाली उन चुनिंदा गतिविधियों पर रोक लगाता है जो भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था पर असर डाल सकती हैं। सरकार ने एक बयान में कहा कि संशोधन में रजिस्ट्रेशन खत्म होने या रद्द होने पर विदेशी फंडिंग वाली संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक तय अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है। नोटिफाइड अमेंडमेंट रूल्स रजिस्ट्रेशन को खास उद्देश्यों और मंजूर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से जोड़ते हैं, और धर्म परिवर्तन को मंजूर धार्मिक गतिविधियों में शामिल नहीं करते हैं।

एनजीओ की कीमत पर सरकार की शक्तियां बढ़ेंगी : विपक्ष

हालांकि, विपक्षी नेताओं का तर्क है कि प्रस्तावित संशोधन एनजीओ की कीमत पर सरकार की शक्तियों को बढ़ा सकता है, जिससे उसे उनकी संपत्तियों को ज़ब्त करने या उनका निपटान करने का अधिकार मिल सकता है। उनका कहना है कि संशोधन हृत्रह्र और ऐसे अन्य संगठनों को सरकार के सामने कमज़ोर बना सकता है और विदेशी चंदे पर निर्भर शैक्षणिक, धर्मार्थ और धार्मिक संस्थानों पर भी बहुत ज़्यादा असर डाल सकता है।

चावल से एथनॉल उत्पादन में हजारों लीटर पानी की खपत : जयराम रमेश

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश में ई2० ईंधन को जल्दबाजी में लागू कर रही है। उन्होंने दावा किया कि भारत में एथनॉल का उत्पादन मुख्यत: गन्ना, धान और मक्का जैसी अधिक पानी खपत वाली फसलों से हो रहा है। रमेश के अनुसार गन्ने से एक लीटर एथनॉल में 3,63०० लीटर और चावल से 1०79०० लीटर पानी लगता है, जिससे गिरते भूजल स्तर के बीच चिंता बढ़ रही है। जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है और इसके जल संसाधनों तथा खाद्य सुरक्षा पर पडऩे वाले प्रभावों की अनदेखी की जा रही है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ई2० ईंधन के पर्यावरणीय प्रभाव का समग्र आकलन तभी संभव है, जब इसके जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा पर पडऩे वाले असर को भी ध्यान में रखा जाए।
उन्होंने दावा किया, ‘‘जहां अन्य देशों में बड़े पैमाने पर कृषि अवशेषों और अन्य जैविक अपशिष्ट से एथनॉल का उत्पादन किया जाता है, वहीं भारत में इसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, धान और मक्का पर आधारित है, जो अधिक पानी की खपत वाली फसलें हैं।’’ रमेश के अनुसार, गन्ना और धान मिलकर देश के कुल सिंचाई जल का लगभग 7० प्रतिशत उपयोग करते हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद केंद्र सरकार एथनॉल उत्पादन के लिए चावल के उपयोग को प्रोत्साहन दे रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने हाल ही में संसद में स्वीकार किया है कि एथनॉल बनाने वाली इकाइयों को औसत खरीद मूल्य से लगभग 40 प्रतिशत कम कीमत पर चावल उपलब्ध कराया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि वास्तव में पर्यावरण हितैषी ईंधन नीति वही होगी, जो जिस ईंधन को बढ़ावा देती है, उसके समग्र पर्यावरणीय प्रभाव का भी आकलन करे।

बरसात का वार, बेहाल सरकारें, बेबस शहर

शहरों में जलभराव गांवों में गिर रहे घर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बारिश इस देश के लिए कभी खुशियों का मौसम कही जाती थी। खेतों की हरियाली नदियों का संगीत और मिट्टी की खुशबू कभी मानसून की पहचान हुआ करती थी। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। अब बादल बरसते नहीं डराते हैं। हर काली घटा के साथ किसी गांव का घर ढहने की आशंका बलवती हो जाती है किसी शहर के डूबने का भय सामने खड़ा हो जाता है और किसी परिवार की जिंदगी मलबे में दब जाने का खतरा मंडराने लगता है।
बीती दरम्यानी रात उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में पुराना मकान भरभराकर गिर गया और एक ही कमरे में सो रहा पूरा परिवार कुछ ही सेकंड में मलबे के नीचे दब गया। सुबह जब लोग जागे तो एक घर नहीं छह अर्थियां उनका इंतजार कर रही थीं। दो मासूम बच्चे उनके माता पिता दादा दादी पूरा परिवार खत्म हो गया। केवल एक युवक बचा जो अपने ही घर के मलबे से निकलकर मदद के लिए चीखता रहा।
यह केवल एक हादसा नहीं था बल्कि उन हजारों जर्जर मकानों कमजोर बुनियादी ढांचों और हर साल दोहराई जाने वाली चेतावनियों की कहानी भी है जिन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता। उधर असम में बाढ़ ने हजारों लोगों को घर छोडऩे पर मजबूर कर दिया है। सडक़ें टूट चुकी हैं खेत डूब चुके हैं और परिवार राहत शिविरों में जीवन काटने को विवश हैं। नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन ने संपर्क तोड़ा दिया है जबकि पश्चिम बंगाल में आकाशीय बिजली ने चार लोगों की जान ले ली। मौसम विभाग दक्षिण भारत के कई जिलों में अगले दौर की भारी बारिश की चेतावनी दे रहा है। यानी संकट अभी टला नहीं है बल्कि आगे बढ़ रहा है।

झूठे तेरे वादे झूठी तेरी तैयारियां

हर साल मानसून से पहले बैठकों का दौर चलता है। आपदा प्रबंधन की तैयारियों के दावे किए जाते हैं। राहत सामग्री का खाका बनाया जाता है। लेकिन जब बारिश अपने पूरे वेग से आती है तो सबसे पहले उन्हीं दावों की परतें बहने लगती हैं। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिन इलाकों में हर वर्ष बाढ़ आती है जहां जर्जर इमारतें वर्षों से खड़ी हैं और जहां जलभराव स्थायी समस्या बन चुका है वहां स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं बन पाए? इस प्रश्न का उत्तर केवल मौसम के खाते में नहीं डाला जा सकता। बारिश प्राकृतिक है लेकिन हर त्रासदी केवल प्राकृतिक नहीं होती। कई बार जानें पानी नहीं तैयारी की कमी लेती है। यही वजह है कि इस मानसून ने एक बार फिर देश के सामने केवल मौसम का नहीं बल्कि व्यवस्था योजना और जवाबदेही का भी प्रश्न खड़ा कर दिया है।

असम में पानी नहीं जिंदगी बह रही है

पूर्वोत्तर में हालात बद से बदतर है। असम के कई इलाकों में बाढ़ ने गांवों का नक्शा बदल दिया है। जिन घरों में कल तक चूल्हा जलता था वहां आज नावें चल रही हैं। खेत पानी में समा गए हैं मवेशी बह गए हैं और हजारों परिवार राहत शिविरों में नई सुबह का इंतजार कर रहे हैं। बच्चे स्कूल नहीं तिरपाल के नीचे दिन गुजार रहे हैं। जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं वह अब पीने के पानी और राशन की कतार में खड़े हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत और पुनर्वास का भरोसा दिया है लेकिन जिन परिवारों ने अपना घर खो दिया उनके लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह सामान्य जीवन में कब लौट पाएंगे।

अतीक अहमद के बेटे आबान समेत दो की हादसे में मौत

जेल में बंद भाई अली से मिलने आ रहे थे झांसी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
झांसी। दिवंगत अतीक अहमद के छोटे बेटे आबान अहमद (19) की बृहस्पतिवार तडक़े झांसी-कानपुर हाईवे पर सडक़ हादसे में मौत हो गई। वह झांसी जेल में बंद अपने भाई अली से मिलने प्रयागराज से झांसी आ रहा था। हादसे में कार सवार चार अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।
पुलिस ने सभी घायलों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 1०. 3० बजे तेज रफ्तार क्रेटा कार झांसी-कानपुर हाईवे पर प्रयागराज से झांसी की ओर आ रही थी। पूछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास अचानक एक जानवर सडक़ पर आ गया। उसे बचाने के प्रयास में कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में आगे की सीट पर बैठे आबान अहमद के सिर में गंभीर चोट आई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में कार सवार अहजम निवासी बादशाही मंडी (प्रयागराज), मोहम्मद जैद निवासी कोतवाली, उमर अहमद निवासी पूरा मुफ़्ती और सोनू घायल हो गए। सभी प्रयागराज के रहने वाले हैं।

यौन उत्पीडऩ मामले में तरुण तेजपाल को 10 साल की कैद

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बरी करने का फैसला रद्द कर दोषी करार दिया

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई । वर्ष 2013 के चर्चित यौन उत्पीडऩ मामले में पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने तेजपाल को दुष्कर्म और महिला की मर्यादा भंग करने का दोषी ठहराया है। उन्हे 1० साल की कैद हुई है।
मामला 13 में एक महिला सहकर्मी के साथ कथित यौन उत्पीडऩ से जुड़ा है, जिसने देशभर में काफी चर्चा बटोरी थी। मामले में न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसंडेकर की पीठ ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2)(एफ) (विश्वास या अधिकार की स्थिति का दुरुपयोग कर दुष्कर्म), 354(ए) (यौन उत्पीडऩ) और 354(बी) (महिला के कपड़े उतारने की नीयत से हमला या बल प्रयोग) के तहत दोषी ठहराया है।
सजा पर सुनवाई के दौरान तेजपाल के वकील ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि तरुण तेजपाल राजनीतिक कारणों से निशाना बनाए गए हैं और वह दो बेटियों के पिता हैं। वकील ने इन आधारों पर अदालत से सजा तय करते समय राहत देने का अनुरोध किया। फिलहाल हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया है। तेजपाल से अपनी उम्र का हवाला भी दिया था।

मेरे सोशल मीडिया अकाउंट को रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया : केजरीवाल

मेटा पर आप संयोजक ने भी लगाए आरोप
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय तथा टेक दिग्गज मेटा (मेटा) के बीच छिड़े विवाद के बीच आम आदमी पार्टी-आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कंपनी पर बड़ा आरोप लगाया है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने गुरुवार को दावा किया कि मेटा ने भारत में उनके सोशल मीडिया अकाउंट को रिस्ट्रिक्ट (सीमित) कर दिया है। केजरीवाल का कहना है कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद मेटा की ओर से कोई स्पष्ट कारण या जवाब नहीं दिया जा रहा है। उनके ये आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो हटाए जाने को लेकर मेटा और केंद्र सरकार के बीच चल रहे विवाद के दौरान सामने आए हैं।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक्स (पहले ट्विटर) पर मेटा इंडिया को टैग करते हुए अपने रिस्ट्रिक्टेड अकाउंट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने मेटा की सेवाओं को काफी खराब बताया और सोशल मीडिया कंपनी से कहा कि वह पीएम मोदी और उनकी सरकार के सामने झुके नहीं। हालांकि, केजरीवाल ने यह नहीं बताया कि उनका कौन सा अकाउंट – – रिस्ट्रिक्ट किया गया है। उन्होंने कहा,आपने मेरा अकाउंट क्यों रिस्ट्रिक्ट किया है? आपके भारत ऑफिस में पूछने पर पता चला कि मेरा अकाउंट भारत में रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया है और भारत में उपलब्ध नहीं है।
क्यों? आपके ऑफिस में कोई भी इसका कारण नहीं बता रहा है। कोई यह भी नहीं बता रहा है कि ये पाबंदियां कैसे हटाई जा सकती हैं। जितने भी ईमेल लिखे गए, उनका कोई जवाब नहीं मिला, बस एक रूटीन एक्नॉलेजमेंट (प्राप्ति की सूचना) मिला। पीएम मोदी की 23 जुलाई की फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाने को लेकर मेटा को केंद्र सरकार की नाराजगी का सामना करना पड़ा है। इसके चलते कंपनी को सफाई देनी पड़ी और सरकार से माफी भी मांगनी पड़ी। केंद्र सरकार ने मेटा के बड़े अधिकारियों को तलब किया है और पूछा है कि क्या वे अपने प्लेटफॉर्म पर गैर-कानूनी कंटेंट को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं।

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