विपक्षी नेताओं ने अमित शाह से दागे सवाल, प्रियंका गांधी ने कर दिया एक्सपोज

विपक्ष का मुख्य मुद्दा 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र और युवा प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई है। उस दिन जंतर मंतर और संसद मार्ग के आसपास प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई और कुछ रिपोर्टों में पेलेट गन के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में हर वर्ग परेशान नजर आ रहा है। सदन से लेकर संसद तक बवाल मचा हुआ है।संसद के मौजूदा मानसून सत्र 2026 में विपक्ष दल जैसे कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य पार्टियां लगातार एक ही मांग दोहरा रही हैं।

वे जोर-जोर से नारे लगा रहे हैं कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं, अमित शाह जवाब दें और अमित शाह संसद से गायब क्यों हैं। बता दें कि यह सत्र जुलाई 20 से शुरू हुआ था और अगस्त के पहले हफ्ते तक भी यह हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा।

विपक्ष का मुख्य मुद्दा 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र और युवा प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई है। उस दिन जंतर मंतर और संसद मार्ग के आसपास प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई और कुछ रिपोर्टों में पेलेट गन के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है। दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए विपक्ष का कहना है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी गृह मंत्री अमित शाह पर है। वे चाहते हैं कि शाह खुद सदन में आकर साफ-साफ बताएं कि आदेश किसने दिए, इतनी सख्ती क्यों बरती गई और क्या यह कार्रवाई जरूरत से ज्यादा तो नहीं थी।

विपक्षी सांसद रोज संसद परिसर में प्रदर्शन कर रहे हैं। बारिश में भी छाते लेकर मकर द्वार पर खड़े होकर बैनर लेकर नारेबाजी करते दिख रहे हैं। एक तरफ वे राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी उठा रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा जोर अमित शाह की अनुपस्थिति पर है। इसी बीच आज भी सदन के बाहर जमकर नारेबाजी हुई जिसका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

विपक्ष का आरोप है कि अमित शाह जानबूझकर सदन से दूर रह रहे हैं क्योंकि वे इस मुद्दे पर सवालों का सामना नहीं करना चाहते। वे कहते हैं कि अगर पुलिस कार्रवाई सही थी तो शाह को आकर साफ-साफ बताना चाहिए था। लेकिन दो हफ्ते से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद वे सदन में नहीं आए। इससे संसद का कामकाज ठप पड़ा है और देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही। कई सांसद इसे लोकतंत्र की भावना के खिलाफ बता रहे हैं। वे कहते हैं कि गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति का संसद से दूर रहना सही नहीं है। प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की जांच होनी चाहिए और उसके लिए मंत्री को खुद सामने आना चाहिए।

न सिर्फ प्रियंका गाँधी बल्कि अन्य विपक्षी नेताओं ने भी जोरदार हमला बोला। इसी बीच खरगे ने दावा किया कि राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने अमित शाह को निर्देश जारी किया था। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के इस दावे का खंडन किया। उन्होंने कहा, जब गृह मंत्री जवाब देंगे, तो आप सुन नहीं पाएंगे। बारिश के बीच केंद्र सरकार के खिलाफ छाते और तख्तियां लिए सांसदों ने संसद के मकर द्वार के सामने ‘अमित शाह जवाब दो’ जैसे नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

जब राज्यसभा में चर्चा चल रही थी तो कांग्रेस समेत विपक्ष ने ‘अमित शाह जवाब दो’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजूजू ने जवाब दिया। उन्होंने ‘अमित शाह जवाब दो’ वालों को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा-‘गृह मंत्री अमित शाह वो इंसान हैं, जिनका नाम सुनकर सारे आतंकवादी उग्रवादी कांप उठते हैं। जिस दिन यहां चर्चा शुरू होगी, अमित शाह जवाब देंगे, आप सुन नहीं पाएंगे।’ उन्होंने कहा-ये नारा लगाने का जो तरीका है, वो ठीक नहीं है।

इससे पहले कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘आपने गृह मंत्री से सदन में आकर बयान देने को कहा था। लेकिन वे आपकी बात नहीं मान रहे हैं और सदन का अपमान कर रहे हैं।’ इस पर आपत्ति जताते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि कौन सा मंत्री कब सदन में आएगा। संसद में न आने के आरोपों के बीच उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्री शाह रोज संसद परिसर आते हैं।

वहीं इससे पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जंतर मंतर के पास छात्रों पर हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों से पूरा विपक्ष इस मांग पर अड़ा है कि गृह मंत्री खुद सदन में आएं और जवाब दें। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि छात्रों के साथ अन्याय और अत्याचार हुआ।

जिस तरह से उन पर लाठीचार्ज और फायरिंग की गई, वह गलत था।उन्होंने कहा, “ऐसी चीजें इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए थीं। पैलेट गन, आंसू गैस, लाठी, इलेक्ट्रिक बैटन, कील वाली लाठी- सब कुछ छात्रों पर चलाया गया। छात्रों ने कोई बवाल नहीं किया था। क्या उन्होंने 20-50 सरकारी गाड़ियां तोड़ीं? क्या किसी नेता को रोका और सवाल पूछा? वे शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन उन्हें हटाने के लिए जो तरीके अपनाए गए, वह बहुत गलत है।”

खड़गे ने मांग की कि गृह मंत्री खुद सदन में आकर सफाई दें। उन्होंने कहा, “इनको सदन में आकर जवाब देने में क्या मजबूरी है? इसके दो ही मतलब हो सकते हैं। एक तो ये सोच रहे हैं कि इस मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया जाए। दूसरा, ये डर गए हैं। मैं बस इतना पूछना चाहता हूं कि जो दुख आपने विद्यार्थियों को पहुंचाया है, जो उनके माता-पिता तक पहुंचा है, उसके लिए हम आपकी हाजिरी सदन में चाहते हैं।”उन्होंने कहा, “वे सदन में नहीं आ रहे हैं, इसलिए सदन नहीं चल पा रहा है।

सदन नहीं चलने की जिम्मेदारी केवल गृह मंत्री अमित शाह की है, संसद सदस्यों की नहीं। इसी वजह से आज हमने राज्यसभा में यह मुद्दा फिर से उठाया है।”कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि प्रधानमंत्री माफी मांगें और गृह मंत्री सदन में बयान दें। उन्होंने कहा, “चाहे झारखंड हो, पंजाब हो या दिल्ली हो, हम विद्यार्थियों के साथ हैं। उनकी समस्याओं को हल कराने के लिए हम लड़ते रहेंगे।”

वहीं संसद में गतिरोध पर दिल्ली कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “चेयर से चेयरमैन ने भी निर्देश दिया कि गृह मंत्री से कहिए कि वो सदन में आए। यही नहीं, जब मंदिर चोरी का जो मुद्दा उठा, तो प्रधानमंत्री ही जवाब दे सकते हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला लिया था, उसके अनुसार प्रधानमंत्री ने ही ट्रस्ट बनाया, प्रधानमंत्री ही मंदिर के निर्माण में गए, उन्होंने ही प्राण प्रतिष्ठा की नियमों के विपरीत। वो संसद भवन में तो आते हैं मगर संसद में नहीं आते हैं। यह मामला अभी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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