पहले नो.. फिर गो..
राहुल की गूंज पर यूपी सरकार का यूटर्न

- क्या युवाओं में राहुल गांधी के बढ़ते समर्थन से डर गयी है सरकार
- राहुल गांधी के छात्र संवाद से घबराई सरकार
- 30 जुलाई को इजाजत, 6 अगस्त को कैंसिलेशन 7 अगस्त को फिर बहाल
- भागवत भी मान चुके हैं कि जेन जी की शिकायतें जायज
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सासंद राहुल गांधी को आखिरकार प्रयागराज के केपी ग्राउंड में आयोजित होने जा रहे कांग्रेस के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होने की इजाजत मिल गयी है। वह यहां बड़ी संख्या में जुटे छात्रों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम को लेकर कुछ दिन पहले विवाद खड़ा हो गया था। केपी ट्रस्ट ने पहले कार्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी थी। लेकिन ट्रस्ट ने कुछ शर्तों के साथ कांग्रेस को कार्यक्रम करने की इजाजत दे दी है। इसके बाद तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजन होगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यूपी सरकार इस कार्यक्रम को रोकने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने कहा था कि चाहे जो चुनौती हो छात्रों की गूंज तय समय पर होगा।
सोचिए… कार्यक्रम को रोकने की नौबत क्यों आयी?
सोचिए एक कार्यक्रम की इजाजत दी जाती है। तैयारी शुरू होती है। पैसा जमा होता है। मैदान में टेंट लगने लगता है। फिर अचानक कहा जाता है कि कार्यक्रम नहीं होगा मैदान खाली करो। वजह पढ़ाई प्रभावित होना बताई गयी यह भी कहा गया कि बारिश से मैदान खराब होगा हाईकोर्ट का आदेश है। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती। अगले ही दिन वही मैदान फिर मिल जाता है। वही कार्यक्रम फिर होने लगता है। वही छात्र फिर बुलाए जाते हैं। तो सवाल सिर्फ इतना नहीं कि राहुल गांधी प्रयागराज में छात्रों से संवाद करेंगे या नहीं। सवाल यह है कि आखिर 24 घंटे में ऐसा क्या बदल गया कि नहीं अचानक हां हो गयी। 30 जुलाई को कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट ने राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए अनुमति दी थी। कांग्रेस के मुताबिक निर्धारित राशि भी जमा की गई और आयोजन की तैयारियां शुरू हो गयी। लेकिन 6 अगस्त को ट्रस्ट ने अनुमति वापस ले ली। ट्रस्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 अगस्त 2025 के आदेश शैक्षणिक गतिविधियों पर असर और मानसून में मैदान को नुकसान की आशंका का हवाला दिया। कांग्रेस ने इसे महज मैदान का मामला नहीं माना। आरोप लगाया कि राहुल गांधी का छात्रों से सीधा संवाद सत्ता को असहज कर रहा है और इसी दबाव में आयोजन रोकने की कोशिश की गयी। फिर कहानी पलटी। 7 अगस्त को कायस्थ पाठशाला ने यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की ओर से दिए गए अंडरटेकिंग के बाद अनुमति बहाल कर दी। आयोजन के लिए सात शर्तें/निर्देश भी लगाए गए। यानी जिस कार्यक्रम पर एक दिन पहले ब्रेक लग गया था वह फिर पटरी पर लौट आया।
‘जेन जी की शिकायतें सही है’
6 अगस्त को भारत के इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस के कार्यक्रम में भागवत ने करीब 2,000 छात्रों के सवाल सुने। उनसे जब जेन जी के आंदोलन और छात्र विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतें वास्तविक हैं और शिक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। उन्होंने विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र में संवाद का एक माध्यम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध का उद्देश्य विभाजन नहीं बल्कि सहमति और व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। यानी एक तरफ संघ प्रमुख कह रहे हैं कि जेन जी की शिकायते सही है तो दूसरी तरफ यूपी में राहुल गांधी के उसी जेन जी से संवाद के कार्यक्रम पर 24 घंटे के भीतर अनुमति का खेल चल रहा है। यही तुलना आज की सबसे बड़ी राजनीतिक कहानी है।
पहले ना ना… फिर हां हां
राहुल गांधी आज 8 अगस्त को दोपहर 2 बजे दिल्ली से प्रयागराज के लिए रवाना होंगे। दोपहर करीब 3:30 बजे वह प्रयागराज एयरपोर्ट पहुंचेंगे। वहां से वे आनंद भवन जाएंगे और फिर केपी ग्राउंड पहुंचकर छात्रों से बातचीत करेंगे। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने राहुल गांधी का पूरा कार्यक्रम साझा करते हुए बताया है कि नेता प्रतिपक्ष शाम 6 बजे से रात 8:30 बजे तक केपी ग्राउंड में छात्रों से संवाद और संबोधन करेंगे। कार्यक्रम के बाद वह एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे और रात करीब 9:30 बजे विशेष विमान से दिल्ली लौट जाएंगे। नई दिल्ली में हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रें स में यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और सांसद किशोरी लाल शर्मा, तनुज पुनिया और इमरान मसूद ने कहा है कि भाजपा राहुल गांधी के छात्र युवा मुद्दों को उठाने से घबरा गई है। प्रयागराज में यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी कहा कि चाहे अनुमति अस्थायी रूप से वापस ली गई हो पार्टी कार्यक्रम करेगी। कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने आरोप लगाया कि भाजपा इस कार्यक्रम को रोकना चाहती थी क्योंकि वह युवाओं में राहुल गांधी के बढ़ते समर्थन से डरी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं को लगातार उठाती रहेगी।
सवाल राहुल का नहीं सवाल छात्रों का है
राहुल गांधी का छात्रों की गूंज अभियान सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं है। कांग्रेस इसे पेपर लीक, भर्ती में देरी, बेरोजगारी, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का राष्ट्रीय मंच बता रही है। प्रयागराज में भी राहुल गांधी के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यही वह जगह है जहां यूपी सरकार के लिए असली राजनीतिक चुनौती शुरू होती है। क्योंकि बेरोजगार युवा को मंच से रोकना और उसके सवाल का जवाब देना दो बिल्कुल अलग राजनीतिक रास्ते हैं। एक रास्ता कहता है कि कार्यक्रम मत होने दो। तो दूसरा रास्ता कहता है कार्यक्रम होने दो सवाल पूछने दो और जवाब दो। अब प्रयागराज में तीसरा रास्ता दिखाई दिया पहले अनुमति दी गयी फिर उसे रद्द किया गया फिर उसके बाद जब दबाव बड़ा तो फिर अनुमति दे दी गयी। यही यू टर्न अब विपक्ष के लिए राजनीतिक हथियार बन गया है। कांग्रेस इसे सरकार के दबाव और राहुल गांधी के कार्यक्रम के डर के तौर पर पेश कर रही है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने तो यह तक कहा कि बीजेपी को छात्रों के सामने झुकना पड़ेगा। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल के कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की गई लेकिन छात्रों के दबाव के सामने फैसला बदलना पड़ा।




