NALSAR दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत होंगे मुख्य अतिथि? छात्रों ने जताया विरोध

छात्रों ने कहा कि उन्हें CJI के उस रवैये पर आपत्ति है, जो उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी सुनवाई के दौरान दिखाया था.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: छात्रों ने कहा कि उन्हें CJI के उस रवैये पर आपत्ति है, जो उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी सुनवाई के दौरान दिखाया था.

नालसर (NALSAR) के 450 से ज़्यादा छात्रों ने यूनिवर्सिटी से CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने के फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की.

नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 450 से ज़्यादा छात्रों ने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. इसमें यूनिवर्सिटी प्रशासन से अपील की गई है कि वे इस साल के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने के फ़ैसले पर फिर से विचार करें.

वाइस-चांसलर, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि भले ही दीक्षांत समारोह की तारीख़ और मुख्य अतिथि के नाम को अभी तक आधिकारिक तौर पर तय नहीं किया गया है, लेकिन छात्र कोई भी फ़ैसला होने से पहले अपनी चिंताएं जाहिर करना चाहते थे.

वीडियो सबूत देखने से इनकार

छात्रों का कहना है कि उन्हें जस्टिस सूर्यकांत के उस हालिया रवैये पर आपत्ति है, जो उन्होंने 20 जुलाई, 2026 को जंतर-मंतर पर ‘चलो संसद’ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी सुनवाई के दौरान दिखाया था.

उन्होंने उन रिपोर्टों का जिक्र किया, जिनमें कहा गया है कि 23 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान, CJI ने कथित तौर पर पुलिस की ज्यादती दिखाने वाले वीडियो सबूत देखने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कथित तौर पर कहा था, हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है. हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है, और बाद में याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों को बीच में ही रोक दिया था.

ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि कथित पुलिस कार्रवाई की स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर जांच कराने के लिए CJI के सामने पहले ही एक और याचिका दायर की जा चुकी थी. इसमें उन रिपोर्टों का हवाला दिया गया था, जिनमें कहा गया था कि महिलाओं और बच्चों समेत 70 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए थे.

पुलिस की बर्बरता के आरोपों को किया नजरअंदाज

पत्र में कहा गया है, कानून के छात्र होने के नाते, हमारी चिंता सीमित है और खास तौर पर हमारे, यानी ग्रेजुएट होने वाले बैच के नजरिए से है. इसमें तर्क दिया गया है कि दीक्षांत समारोह में यूनिवर्सिटी की संवैधानिक अधिकारों, न्याय तक पहुंच और शिकायतों पर तर्कसंगत तरीके से विचार करने की प्रतिबद्धता झलकनी चाहिए.

छात्रों का कहना है कि ऐसे सम्मानित व्यक्ति से डिग्री लेना, जिनका हालिया व्यवहार प्रदर्शनकारी नागरिकों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता के आरोपों को नजरअंदाज करने वाला रहा हो, नालसर में सिखाए गए मूल्यों के अनुरूप नहीं होगा.

छात्रों के विचारों की ‘सच्ची और सम्मानजनक अभिव्यक्ति’

हस्ताक्षर करने वालों ने यूनिवर्सिटी से मुख्य अतिथि के चयन पर गंभीरता से पुनर्विचार करने और कोई भी औपचारिक निमंत्रण भेजने से पहले ग्रेजुएट होने वाले बैच से सलाह-मशविरा करने का अनुरोध किया है.

उन्होंने बैठकों या अन्य उचित माध्यमों से प्रशासन के साथ बातचीत करने की इच्छा भी जाहिर की है. ज्ञापन का समापन यूनिवर्सिटी से जल्द जवाब, खासकर सोमवार तक, मांगते हुए किया गया है. इसमें पत्र को ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के विचारों की ‘सच्ची और सम्मानजनक अभिव्यक्ति’ बताया गया है.

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