ऑपरेशन से पहले बाहर से खरीदनी पड़ती हैं महंगी दवाइयां? बांदा मेडिकल कॉलेज पर गंभीर आरोप

बांदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की मौजूदगी, जांच रिपोर्ट और ऑपरेशन के लिए बाहर से दवाइयां मंगाने को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले में जांच की मांग उठी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क : सरकारी मेडिकल कॉलेज में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों के लिए व्यवस्था में छोटी सी चूक भी बड़ी परेशानी बन सकती है। बांदा के राजकीय रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में अब व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है। डॉक्टरों और कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी, जांच रिपोर्टों की प्रक्रिया और ऑपरेशन के लिए बाहर से दवाइयां व मेडिकल सामग्री खरीदने के आरोपों ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

डॉक्टरों और स्टाफ की मौजूदगी पर उठे सवाल

शिकायतों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज के ईएनटी और सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्षों की नियमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। फार्मेसी में स्थायी कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। मरीजों और तीमारदारों का आरोप है कि इन व्यवस्थागत समस्याओं का सीधा असर इलाज और अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

जांच रिपोर्ट और बाहर से सामान खरीदने का आरोप

मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच रिपोर्टों को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ रिपोर्टों पर स्थायी लैब टेक्नीशियन के हस्ताक्षर नहीं होते। शिकायतकर्ताओं ने जांच प्रक्रिया और रिपोर्ट की प्रमाणिकता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। वहीं ऑपरेशन कराने वाले मरीजों से बाहर से महंगी दवाइयां और चिकित्सा सामग्री मंगाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। दावा है कि कुछ मरीजों को ऑपरेशन से पहले हजारों रुपये का सामान बाजार से खरीदना पड़ता है।

लंबे समय की तैनाती और प्रभार पर भी सवाल

डॉक्टर मुकेश बंसल की लंबे समय से तैनाती और महत्वपूर्ण प्रशासनिक व बजट संबंधी प्रभार को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. सुनील कौशल के लंबे समय से पद पर बने रहने को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल खड़े किए हैं। अब निगाहें शासन और स्वास्थ्य विभाग की संभावित जांच पर हैं। यदि शिकायतों की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा, ताकि मेडिकल कॉलेज में मरीजों को पारदर्शी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

रिपोर्ट- इक़बाल खान, बांदा

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