गोरखपुर यूनिवर्सिटी में बवाल! नारेबाजी के बीच कुलपति के निकलने का VIDEO चर्चा में

गोरखपुर विश्वविद्यालय में GUACTA शिक्षकों का आंदोलन तेज हो गया। प्रशासनिक भवन के रास्ते बाधित रहे और कुलपति के खिलाफ नारेबाजी हुई। प्रशासन ने छात्रों की परेशानी का हवाला देकर संवाद की अपील की।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों का आंदोलन बुधवार को उस समय चर्चा में आ गया, जब प्रशासनिक भवन के प्रवेश मार्ग प्रदर्शन के चलते बाधित रहे। परिसर में शिक्षकों ने जमकर नारेबाजी की और कुलपति के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। इसी दौरान सुरक्षा कर्मियों के साथ कुलपति के परिसर से बाहर निकलने का वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह तेजी से सड़क की ओर जाती दिखाई दे रही हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर अपना अलग पक्ष रखा है।

रास्ते बाधित होने से छात्रों को हुई परेशानी

गुआक्टा (GUACTA) के प्रदर्शन के कारण प्रशासनिक भवन में आवाजाही प्रभावित रही। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रवेश, परीक्षा, अंकपत्र, डिग्री और माइग्रेशन प्रमाणपत्र से जुड़े काम के लिए आने वाले विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी उठानी पड़ी।

प्रशासन का कहना है कि शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर पहले भी वार्ता होती रही है। विश्वविद्यालय ने आंदोलन के बजाय संवाद और विधिक प्रक्रिया के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

शोध केंद्र, मानदेय और फीस पर विश्वविद्यालय का पक्ष

शोध केंद्र का दर्जा देने के मामले में विश्वविद्यालय ने यूजीसी नियमों के अनुरूप समितियों के जरिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। शोधार्थियों के आवंटन को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि निर्णय संबंधित शोध उपाधि समिति द्वारा नियमों के अनुसार सामूहिक रूप से लिया जाता है।

लंबित पारिश्रमिक और मानदेय को लेकर विश्वविद्यालय ने कहा कि अधिकांश मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। जिनका भुगतान बाकी है, उनसे सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है। विलंब शुल्क के मामले में प्रशासन ने कार्यपरिषद के निर्णय का हवाला दिया और कहा कि संबंधित महाविद्यालय विधिक अधिकार के तहत कुलाधिपति के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं।

विश्वविद्यालय ने समितियों में प्रतिनिधित्व और शोधार्थियों की फीस से जुड़े मुद्दों पर भी नियमों के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है। साथ ही नए शैक्षणिक सत्र में छात्रों को हो रही परेशानी को देखते हुए शिक्षकों से आंदोलन समाप्त कर संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है।

रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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