हल्दवानी में खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ को लेकर मचा बवाल, सवालों के घेरे में भाजपा
कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम खरगे के दलित होने से जुड़ा हुआ है और इससे जातिगत भेदभाव की मानसिकता झलकती है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में नफरत इस कदर बढ़ गई है जिसकी कोई सीमा नहीं है। महंगाई, बेरोजगारी से भी ज्यादा जातिवाद बढ़ता जा रहा है।
इसी बीच एक मामला इन दिनों सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सड़क से लेकर संसद तक बवाल चल रहा है। दरअसल हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के हल्दवानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल के ‘शुद्धिकरण’ की।
इस ‘शुद्धिकरण’ की घटना के सामने आने के बाद बवाल बढ़ता जा रहा है। दरअसल रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ समाप्त होने के दो दिन बाद उसी स्थान पर हुए हवन-पूजन और कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए हैं.
कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम खरगे के दलित होने से जुड़ा हुआ है और इससे जातिगत भेदभाव की मानसिकता झलकती है. वहीं आयोजन करने वाले धार्मिक संगठन का कहना है कि रैली के दौरान लगाए गए कथित नारों और टिप्पणियों के विरोध में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था. विवाद बढ़ने के बाद दोनों दलों के नेताओं के बयान सामने आए हैं.
विवाद की शुरुआत 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद हुई. इसके दो दिन बाद, 10 अगस्त को ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ की ओर से उसी मैदान में हवन-पूजन और शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया. जिसके वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी खेमे ने मोर्चा खोल दिया।
शुद्धिकरण कार्यक्रम की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक संदेश देने की कोशिश है, जो दलित समुदाय की भावनाओं को आहत करती है. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी की और कार्रवाई की मांग की.
वहीं अब आज इस मामले को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी प्रतिक्रिया दी और जमकर लताड़ लगाई। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “…मैं हल्द्वानी में था, जहां मैंने रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां लाखों लोग मौजूद थे।
उस समय, मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, मैंने केवल सरकार से जुड़े मुद्दों को दोहराया। लेकिन मेरे भाषण के बाद, बीजेपी के लोगों ने उस मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए वहां हवन किया… क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? मैं विपक्ष का नेता हूं।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आगे कहा, “मैं इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता। मैं बरसों से इस सदन का सदस्य रहा हूं। मैं अनुसूचित जाति से आता हूं और दलित हूं, मैंने कभी किसी से यह गुहार नहीं लगाई कि ‘मेरी मदद करो’ या ‘मेरी रक्षा करो’।
वहीं प्रियंका गांधी ने इस मामले को लेकर घेरते हुए कहा कि- हल्द्वानी, उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी की जनसभा के बाद उस स्टेज का शुद्धिकरण करना RSS-BJP की मानसिकता का प्रदर्शन है। इससे पता चलता है कि इनकी विचारधारा क्या है। प्रधानमंत्री जी को इसका खंडन करना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।
वहीं इस मामले पर भाजपा की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई। इसे लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. जेपी नड्डा ने कहा, “जो कुछ भी हुआ वह दुखद है. ऐसी घटना आपके लिए ही नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए दुखद है. हम इसकी जांच करेंगे.” उन्होंने आगे कहा, “यह हम सभी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए दुखदायी है.
भाजपा ऐसी चीजों को स्वीकार नहीं करती.” इतना ही नहीं नड्डा ने यह भी कहा कि बीजेपी इस घटना से दुखी है और खरगे की भावनाओं का सम्मान करती है. वहीं इस घटना को लेकर राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने भी दुख जताया. उन्होंने कहा कि हम सभी लोग इस पर दुख जताते हैं. मैं सरकार से भी कहूंगा कि इस घटना को अंजाम देने वालों को पकड़ें और उन्हें सजा दिलाएं.
इसके साथ ही ‘शुद्धिकरण’ हवन पर कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा, “यह बीजेपी-आरएसएस सरकार और उनकी विचारधारा के लिए शर्म की बात है कि एक तरफ तो वे ‘तिरंगा यात्रा’ आयोजित करने और ऐसी पब्लिसिटी करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे नेता और विपक्ष के नेता के मामले में समानता के सिद्धांत का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
वह सिद्धांत जिसकी गारंटी हमारा संविधान देता है और जिसे देश और दुनिया मानती है। उत्तराखंड को देखिए, जो बीजेपी शासित राज्य है और जहाँ वे बड़े-बड़े दावे करते हैं, उसी जगह पर गौर कीजिए जहां खरगे और हम लोगों ने रैली की थी। वे वहां शुद्धिकरण कर रहे हैं। यह किस तरह का ‘शुद्धिकरण’ है?
गौरतलब है कि इस मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोकतंत्र में किसी राजनीतिक दल की सभा होने के बाद किसी सार्वजनिक स्थल के “शुद्धिकरण” की जरूरत क्यों महसूस हुई। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का अधिकार है। अगर किसी पार्टी के कार्यक्रम के बाद उस स्थान को अपवित्र बताकर शुद्धिकरण किया जाता है, तो इससे कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे समाज में विभाजन या कटुता न बढ़े।
विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। उनका तर्क है कि यदि किसी राजनीतिक नेता के कार्यक्रम के बाद शुद्धिकरण की बात की जाती है, तो इससे यह संदेश जाता है कि राजनीतिक मतभेदों को सामाजिक या धार्मिक रंग देकर पेश किया जा रहा है। ऐसे कदम समाज में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकते हैं। यही कारण है कि इस घटना पर कई राजनीतिक नेताओं ने चिंता जताई है।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार, विपक्ष, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों सभी की जिम्मेदारी है कि वे इस मुद्दे को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ देखें। लोकतंत्र की मजबूती टकराव से नहीं, बल्कि संवाद और सम्मान से होती है। खैर भाजपा राज में यह आम बात है किसी को भी नीचा दिखाना।



