NEET पेपर लीक केस में आरोपियों पर शिकंजा, CBI की चार्जशीट को कोर्ट की मंजूरी
नीट पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट को संज्ञान लेते हुए दिल्ली की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह साफ है कि सभी आरोपी किसी न किसी तरह से नीट परीक्षा लीक सिंडिकेट का हिस्सा थे.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: नीट पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट को संज्ञान लेते हुए दिल्ली की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह साफ है कि सभी आरोपी किसी न किसी तरह से नीट परीक्षा लीक सिंडिकेट का हिस्सा थे.
नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा, प्रथम दृष्टया यह साफ है कि आरोपी किसी न किसी तरह से NEET (UG) 2026 परीक्षा पेपर लीक सिंडिकेट का हिस्सा थे. कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी आरोपियों ने तीनों विषयों के परीक्षा प्रश्न-पत्र को फैलाने और प्रसारित करने में सक्रिय भूमिका निभाई है.
मामले में CBI ने चार्जशीट आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, सबूत नष्ट करने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 से संबंधित धाराओं के तहत दायर की है.
सीबीआई की चार्जशीट पर सुनवाई
दरअसल दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि 13 आरोपियों के खिलाफ पेपर लीक करने और उसे प्रसारित करने के लिए गिरोह बनाने के प्रथम दृष्टया पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं. विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने 13 आरोपियों के खिलाफ जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट पर संज्ञान लिया.
नीट पेपर लीक गिरोह का हिस्सा थे आरोपी
कोर्ट ने गुरुवार को उपलब्ध कराए गए आदेश में कहा, सीबीआई द्वारा व्यापक जांच के दौरान जुटाए गए पर्याप्त और पुख्ता सबूतों से प्रथम दृष्टया साफ है कि उपरोक्त सभी आरोपी किसी न किसी रूप में नीट (स्नातक) 2026 के पेपर लीक गिरोह का हिस्सा थे. इनमें से प्रत्येक ने परीक्षा के तीनों विषयों फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर को प्रसारित करने में सक्रिय भूमिका निभाई.
कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कथित मुख्य आरोपी पीवी कुलकर्णी को पूरी जानकारी थी कि निर्धारित स्थान पर विषय विशेषज्ञों की तलाशी लेने की कोई व्यवस्था नहीं थी इसलिए उसने इसका फायदा उठाया और रसायन विज्ञान के पेर का अनुवाद करते समय गुप्त रूप से तैयार की गई पर्चियां या छोटे नोट अपने साथ ले गया.
उन्होंने कहा, रिकॉर्ड से यह भी साफ है कि इन तीनों विशेषज्ञों कुलकर्णी, फिजिक्स के लिए मनीषा संजय हवलदार और बायोलॉजी के लिए मनीषा गुरुनाथ मंधारे ने यह काम सौंपे जाने से पहले लिखित रूप में वचन दिया था कि वे नीट- यूजी 2026 से संबंधित सामग्री का कोई भी हिस्सा किसी के साथ किसी भी तरीके से साझा नहीं करेंगे.
नीट पेपर के ट्रांसलेशन का काम
कोर्ट ने कहा कि इस वचन का उल्लंघन प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि इन आरोपियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के साथ विश्वासघात किया. एनटीए ने इन्हें अपने-अपने विषयों के नीट पेपर के ट्रांसलेशन का काम सौंपा था. कोर्ट ने कहा, इसके अलावा, अपने उक्त कृत्य से उन्होंने प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम की धारा 13 के तहत लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार भी किया. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह भी स्पष्ट है कि इन तीनों विषय विशेषज्ञों ने अवैध आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची.
अभ्यर्थियों को कोचिंग देने के बहाने बेचे
उन्होंने परीक्षा से संबंधित सामग्री यानी अपने-अपने विषय के लीक हुए सवाल सह-आरोपियों और कई अभ्यर्थियों को कोचिंग देने के बहाने बेच दिए. कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों का संज्ञान लिया.



