रामगढ़ ताल में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, काश्तकारों ने पिलर लगाने का किया विरोध
रविवार को महादेव झारखंडी मंदिर परिसर में झारखंडी-रामगढ़ ताल जमीन व आवास बचाओ समिति की बैठक हुई। इसमें काश्तकारों ने कहा कि अपनी जमीन पर किसी भी कीमत पर पिलर नहीं लगने देंगे। समिति ने 19 अगस्त को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष से मिलकर ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रामगढ़ ताल क्षेत्र में प्रभावित क्षेत्र के सीमांकन और पिलर लगाए जाने को लेकर काश्तकारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
रविवार को महादेव झारखंडी मंदिर परिसर में झारखंडी-रामगढ़ ताल जमीन व आवास बचाओ समिति की बैठक हुई। इसमें काश्तकारों ने कहा कि अपनी जमीन पर किसी भी कीमत पर पिलर नहीं लगने देंगे। समिति ने 19 अगस्त को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष से मिलकर ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया।
समिति के अध्यक्ष बृजपाल सिंह ने कहा कि जीडीए की ओर से कभी 50 मीटर, कभी 100 मीटर तो कभी 120 मीटर तक के क्षेत्र को ताल का प्रभावित क्षेत्र बताकर सीमांकन और पिलर लगाने की बात कही जा रही है। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सात दिसंबर 2020 को जारी गजट में निर्धारित प्रभावित क्षेत्र को लेकर काश्तकारों में असहमति है।
उन्होंने कहा कि आद्रभूमि की परिभाषा के अनुसार नदी या ताल का पानी बरसात में जहां तक फैलता है और सामान्य दिनों में वापस अपने क्षेत्र में आ जाता है, उस क्षेत्र को आद्रभूमि माना जाता है। समिति का दावा है कि वर्ष 2009 में रामगढ़ ताल के चारों ओर बांध बनाए जाने के बाद से ताल का पानी बांध के बाहर नहीं आया है। ऐसे में बांध के बाहर की जमीन को आद्रभूमि के रूप में चिह्नित करने पर उन्होंने सवाल उठाया।
मुआवजे का भुगतान न होने का आरोप
समिति ने आरोप लगाया कि बांध को चौड़ा कर सड़क निर्माण के दौरान काश्तकारों की जमीन ली गई थी। समिति के अनुसार, उच्च न्यायालय में प्राधिकरण की ओर से मुआवजा देने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक प्रभावित काश्तकारों को मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है। इसके बावजूद सड़क निर्माण का कार्य पूरा होने की ओर है। बृजपाल सिंह ने कहा कि जब जमीन काश्तकारों की है तो उनकी सहमति के बिना उस पर पिलर लगाने का अधिकार प्राधिकरण को किसने दिया। उन्होंने कहा कि काश्तकार अपनी जमीन की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
बड़े प्रोजेक्टों पर भी उठाए सवाल
बैठक में मौजूद लोगों ने रामगढ़ ताल के आसपास हो रहे व्यावसायिक और आवासीय निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि मोहद्दीपुर, पड़हा, तारामंडल, लोहिया एनक्लेव, पाम सिटी और सहारा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कॉलोनियां और बहुमंजिली इमारतें विकसित हो रही हैं। समिति ने आरोप लगाया कि बड़े प्रोजेक्टों के मामले में नियमों के पालन को लेकर अलग-अलग रवैया अपनाया जा रहा है, जबकि छोटे काश्तकारों की जमीन पर कार्रवाई की जा रही है।
बैठक में समिति अध्यक्ष बृजपाल सिंह के अलावा सत्यवान चंद, विशाल चंद, मैनेजर सिंह, महेंद्र जी, राय साहब यादव, रेनू सिंह, विनोद यादव समेत करीब 150 लोग मौजूद रहे। सभी ने एकमत होकर कहा कि अपनी जमीन पर पिलर नहीं लगने देंगे। समिति ने बताया कि 19 अगस्त, बुधवार को जीडीए उपाध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां रखी जाएंगी और ज्ञापन सौंपा जाएगा।
रिपोर्ट- अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर



