NRI इंजीनियर से इतने लाख की ठगी का आरोप, IVRI कर्मचारी समेत चार के खिलाफ मुकदमा

उत्तर प्रदेश के बरेली के कतर में कार्यरत एक NRI इंजीनियर से 40 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में इज्जतनगर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) का एक कर्मचारी, उसकी पत्नी, बेटा और बहू शामिल हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के बरेली के कतर में कार्यरत एक NRI इंजीनियर से 40 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में इज्जतनगर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

आरोपियों में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) का एक कर्मचारी, उसकी पत्नी, बेटा और बहू शामिल हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस जमीन का बैनामा इंजीनियर के नाम कराया गया, वह प्लॉट पहले ही किसी अन्य व्यक्ति को बेचा जा चुका था। रकम लेने के बावजूद जमीन पर कब्जा नहीं दिया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले में जमीन के स्वामित्व, कथित फर्जी दस्तावेज, रकम के भुगतान और कब्जे को लेकर विवाद है। इसके अलावा रुपये वापस मांगने पर धमकी और मारपीट किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर शिकायत की जांच के बाद मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।

कतर में काम करने वाले इंजीनियर ने खरीदा था प्लॉट
खुशबू इंक्लेव निवासी अहमद अजीज खां ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके भाई अहमद अजीम खां कतर में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। शिकायत के मुताबिक, 16 अगस्त 2019 को उन्होंने मुड़िया अहमदनगर स्थित गाटा संख्या 128 मि. में 168.44 वर्गमीटर का एक प्लॉट खरीदने का सौदा किया था।

बताया गया है कि इस जमीन की कीमत 40 लाख रुपये तय हुई थी। बैनामे में भुगतान दर्शाने के लिए चार-चार लाख रुपये के चार चेक दिए जाने की बात शिकायत में कही गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी शेर बहादुर ने इन चेकों को बैंक में जमा न कराने की बात कही और पूरी रकम नकद ले ली। जमीन की खरीद के बाद पीड़ित पक्ष को उम्मीद थी कि वह प्लॉट पर कब्जा लेकर निर्माण या अन्य उपयोग कर सकेगा।

कब्जा लेने पहुंचे तो सामने आया जमीन का विवाद
शिकायतकर्ता के मुताबिक, जब वह जमीन पर कब्जा लेने पहुंचे तो वहां स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आया। आरोप है कि जिस प्लॉट का बैनामा उनके भाई के नाम कराया गया था, उसे पहले ही किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया था।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित गाटा संख्या में जितना रकबा उपलब्ध था, उससे अधिक जमीन के बैनामे किए गए। इस वजह से जमीन के वास्तविक स्वामित्व और हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हो गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जमीन को विवादमुक्त बताते हुए कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैनामा कराया गया और इसके एवज में 40 लाख रुपये लिए गए।

कब्जा दिलाने का मिलता रहा आश्वासन
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब जमीन पर कब्जे की मांग की गई तो आरोपियों की ओर से लगातार आश्वासन दिया जाता रहा। उन्हें बताया गया कि जमीन की पैमाइश कराकर संबंधित प्लॉट पर कब्जा दिला दिया जाएगा। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि काफी समय बीतने के बावजूद न तो जमीन पर कब्जा मिला और न ही 40 लाख रुपये वापस किए गए। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने रकम वापस करने या जमीन का कब्जा देने की मांग तेज कर दी।

रिपोर्ट-सुनील सक्सेना, बरेली

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