अमेरिका से दोस्ती का अगला पड़ाव महाराष्ट्र-उत्तर प्रदेश

कार्यक्रम में 4पीएम के संपादक संजय शर्मा, पत्रकार हेमंत तिवारी व ममता त्रिपाठी रहीं मौजूद

  • निवेशकों के लिए यूपी-महाराष्ट्र भरोसेमंद गंतव्य
  • भारत-अमेरिका साझेदारी को नई ऊंचाई देने की तैयारी
  • निवेश, तकनीक और विनिर्माण के मोर्चे पर दो राज्यों ने कसी कमर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। भारत-अमेरिका रिश्तों की कहानी अब सिर्फ दिल्ली और वाशिंगटन के बीच कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित रहने वाली नहीं है। दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी को जमीन पर उतारने की तैयारी में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य भी अपनी भूमिका तेजी से तलाश रहे हैं। एक तरफ महाराष्ट्र खुद को अमेरिका समेत दुनिया के निवेशकों के लिए भारत का सबसे सफल और भरोसेमंद गंतव्य बता रहा है तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश बदलती औद्योगिक तस्वीर में अपनी नई पहचान गढ़ते हुए अमेरिकी निवेश और तकनीक के लिए दरवाजे खोल रहा है। संदेश साफ है कि भारत-अमेरिका साझेदारी का अगला बड़ा अध्याय यूपी जैसे राज्यों की औद्योगिक ताकत से लिखा जाएगा।
मुंबई में इंडो-अमेरिकन चैंबर आफ कामर्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि महाराष्ट्र निवेशकों के लिए देश का सबसे सफल गंतव्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने राज्य की आर्थिक क्षमता औद्योगिक आधार और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए तैयार है। दरअसल भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तार लेते रहे हैं। निवेश, तकनीक, विनिर्माण, रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कारोबारी सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी का दायरा बढ़ा है। ऐसे में राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा भी तेज हुई है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश इसी बदलते परिदृश्य में अपने अपने मॉडल के साथ सामने आते दिखाई दे रहे हैं। महाराष्ट्र की ताकत उसकी औद्योगिक विरासत, वित्तीय राजधानी मुंबई, मजबूत बुनियादी ढांचे और समुद्री संपर्क में है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इसी ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि समुद्र के रास्ते भारत में प्रवेश करने वाले निवेशकों के लिए महाराष्ट्र सबसे सफल गंतव्य है। राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 66० अरब डॉलर बताया गया है और पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने लगभग 1०. 2 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। राज्य की करीब 69 प्रतिशत आबादी कामकाजी उम्र की है, जो उसकी आर्थिक क्षमता को और मजबूत करती है।मुंबई के बाद अब नजर उस औद्योगिक विस्तार पर है, जिसमें महाराष्ट्र को वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन, तकनीक और कारोबार का बड़ा केंद्र बनाया जा सके। अमेरिका से आने वाले निवेश को लेकर राज्य की सक्रियता इसी रणनीति का हिस्सा है।

यूपी-महाराष्ट्र की सक्रियता बड़े बदलाव का संकेत

महाराष्ट्र जहां मुंबई और अपने विशाल औद्योगिक नेटवर्क के बल पर वित्त, विनिर्माण और वैश्विक कारोबार का दरवाजा बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश अपने विशाल बाजार, युवा आबादी, बदलते औद्योगिक ढांचे और नए क्षेत्रों में विस्तार के जरिए खुद को भविष्य के औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है। इसीलिए भारत-अमेरिका साझेदारी के इस नए दौर को केवल दो देशों के रिश्तों की कहानी मानना अधूरा होगा। असल तस्वीर यह है कि इस साझेदारी का लाभ राज्यों तक पहुंचे और अमेरिकी पूंजी तथा तकनीक को सीधे राज्य की अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजगार से जोड़ा जाए। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की सक्रियता इसी बड़े बदलाव का संकेत है। महाराष्ट्र पहले ही वैश्विक निवेशकों के सामने अपनी दावेदारी मजबूती से रख चुका है। उत्तर प्रदेश भी अब पीछे रहने के मूड में नहीं है। एक राज्य के पास मुंबई जैसा वैश्विक कारोबारी दरवाजा है तो दूसरे के पास विशाल बाजार और तेजी से बदलती औद्योगिक जमीन। दोनों की जरूरतें अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक है—अमेरिका के साथ बढ़ते आर्थिक रिश्तों में अपने हिस्से की बड़ी भूमिका सुनिश्चित करना।

यूपी की औद्योगिक ताकत का सभी मान रहे हैं लोहा

दूसरी ओर उत्तर प्रदेश ने भी अपनी आर्थिक पहचान में बड़ा बदलाव लाने की कोशिश तेज कर दी है। कभी केवल कृषि और पारंपरिक उद्योगों के लिए पहचाने जाने वाले इस राज्य में अब इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिफेंस, तकनीक, फिल्म निर्माण और विनिर्माण जैसे नए क्षेत्रों को विकास का आधार बनाया जा रहा है। यही कारण है कि अमेरिकी निवेशकों की नजर में उत्तर प्रदेश अब केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि उत्पादन और तकनीक के संभावित केंद्र के रूप में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की ओर से भी निवेश के लिए उपयुक्त स्थान और क्षेत्र उपलब्ध कराने की बात सामने आई। राज्य सरकार का जोर इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश को केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, तकनीकी क्षेत्र, फिल्म निर्माण और आधुनिक विनिर्माण के लिए भी वैश्विक कंपनियों के अनुकूल बनाया जाए।

यूपी में तेजी से विकसित होती महिलाओं की आर्थिक भागीदारी

इस पूरी कवायद में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है। उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लाखों महिलाओं की मौजूदगी को आर्थिक बदलाव की संभावित ताकत के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था से लेकर छोटे कारोबार तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को बड़े निवेश और रोजगार के अवसरों से जोडऩे की कोशिश की जा रही है। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक साझेदारी के लिए राज्यों की यह सक्रियता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक कंपनियां अब केवल बाजार नहीं देखतीं। वे निवेश के लिए बुनियादी ढांचा, कुशल मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता, कारोबार की सुविधा और बड़े बाजार तक पहुंच जैसे कई पहलुओं को एक साथ परखती हैं।

आक्रामक नीति के साथ आगे बढ़ी है यूपी सरकार

योगी आदित्यनाथ की सरकार पिछले कुछ वर्षों में निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर जिस आक्रामक नीति पर आगे बढ़ी है उसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा विदेशी निवेश को आकर्षित करना है। राज्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार, नए औद्योगिक क्षेत्रों और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया गया है। अब इसी कोशिश को भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी के व्यापक फ्रेम से जोडऩे की तैयारी दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों की ओर से यह भी रेखांकित किया गया कि राज्य अब केवल फिल्म और आईटी तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, कोर डिफेंस, तकनीकी क्षेत्र और फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।

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