सेक्स की दवा का प्रचार करने वाले शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में गए सनी देओल और फिल्म ‘बंटवारा’ का हो गया बंटाधार!

- देश पूछ रहा है माइक किसके लिए चालू है? दर्शकों के लिए या बाजार के लिए?
- गलगोटिया विवाद में फजीहत करावा चुके शुभांकर मिश्रा पर छात्र आंदोलन में हिंदू-मुस्लिम करवाने का आरोप
- शुभांकर के शो में एक तरफ फुल मोड में पैनीट्रेशन तो दूसरी तरफ अध्यात्म के गोते, व्यूज के लिए ताक पर रखी नैतिकता
- सवाल शुभांकर मिश्रा से यह भी कि क्या यह पॉडकास्ट है या प्रमोशन की प्रीमियम दुकान?
- अपने पॉडकास्ट में कीड़ा जड़ी से 2 मिनिट में घोड़ा बनने का बता रहे हैं फार्मूला
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है और एक गलत फैसला करोड़ों की फिल्म का खेल बिगाड़ सकता है। सनी देओल ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस पॉडकास्ट पर वह अपनी फिल्म के प्रचार के लिए जा रहे हैं वही इंटरव्यू सोशल मीडिया पर उनकी फिल्म से ज्यादा पॉडकास्टर शुभांकर मिश्रा को लेकर सवालों की आग भड़का देगा और फिल्म का बंटाधार हो जाएगा। सनी देओल की फिल्म बंटवारा के पिट जाने के बाद सवाल यह नहीं कि सनी देओल किसी पॉडकास्ट पर क्यों गए।
सवाल यह है कि गए कहां। उस मंच पर जिस पर सोशल मीडिया पर पहले भी तरह तरह के विवाद उठ चुके हैं। जिस मंच को लेकर कभी सेक्स और रिश्तों से जुड़े उत्पादों के प्रचार पर सवाल उठे कभी छात्र आंदोलनों की कवरेज और उसके सांप्रदायिक एंगल को लेकर आलोचना हुई कभी गलगोटिया विवाद के दौरान सोशल मीडिया की अदालत ने जमकर निशाना साधा। और अब उसी मंच पर सनी देओल अपनी फिल्म लेकर पहुंचे तो आलोचकों ने व्यंग्य में कहना शुरू कर दिया पा जी फिल्म का प्रमोशन कराने गए थे या विवादों के वाई-फाई से कनेक्ट होने।
बड़ा खतरनाक है डिजिटल मीडिया का नया जमाना
जी हां डिजिटल मीडिया का यह नया जमाना बड़ा खतरनाक है। यहां माइक सामने होता है कैमरा चालू होता है मेहमान मुस्कुराता है होस्ट सवाल पूछता है और दर्शक सोचता है कि वाह क्या शानदार इंटरव्यू है। लेकिन स्क्रीन के पीछे सवालों की दूसरी दुनिया चल रही होती है। यह इंटरव्यू है प्रमोशन है या फिर ब्रांडिंग है या फिर प्रचार का वह पैकेट है जिस पर ऊपर बातचीत लिखा है और अंदर पूरा मार्केटिंग प्लान भरा पड़ा है? शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट को लेकर सोशल मीडिया पर यह सवाल नया नहीं है। आलोचकों का आरोप रहा है कि बड़े फिल्मी सितारों और चर्चित चेहरों के इंटरव्यू के जरिए शुभांकर मिश्रा ने प्रचार का एक ऐसा तंत्र खड़ा किया गया है जिसमें पत्रकारिता और प्रमोशन के बीच की लाइन मिट चुकी है। शुभांकर मिश्रा पर फिल्मी हस्तियों से इंटरव्यू के बदले मोटी रकम लेने जैसे आरोप भी सोशल मीडिया और आलोचनात्मक बहसों में लगे हैं।
और सबसे बड़ा सवाल
जब गलगोटिया विवाद में सोशल मीडिया ने पॉडकास्टर शुभांकर मिश्रा को निशाने पर लिया था। जब दूसरे विवादों पर भी सवाल उठे थे तब क्या सनी देओल की टीम को यह नहीं सोचना चाहिए था कि फिल्म के प्रचार के लिए चुना गया मंच कहीं फिल्म से ज्यादा खुद विवाद का विषय तो नहीं बन जाएगा। हुआ भी वही जो इससे पहले बहुत से दूसरे लोगों के साथ उनके शो में हो चुका है। सोशल मीडिया ने इस बार भी अपना फैसला सुनाने में देर नहीं लगाई और सनी देओल के साथ वह हो गया जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं कि थी। इस पूरे डिजिटल ड्रामे में सबसे बड़ा सवाल कैमरे के पीछे बैठे शुभांकर मिश्रा पर उठा कि क्या आप पॉडकास्ट के होस्ट हैं प्रचार के होस्ट हैं या फिर हर विवाद की कहानी में खुदबखुद बन जाने वाले सूत्रधार।
गलगोटिया विवाद में भी खूब हुई थी फजीहत
जिस पॉडकास्टर के मंच पर सेक्स से अध्यात्म तक फिल्म से राजनीति तक और विवाद से वायरलिटी तक सब कुछ मिलता हो उसके मंच पर जाकर सनी देओल की फिल्म का प्रमोशन होना खुद उस नई डिजिटल पत्रकारिता की कहानी बन गया है जहां माइक पत्रकार का होता है कैमरा क्रिएटर का और मेहमान स्टार होता है लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि फैसला एल्गोरिद्म करता है। तो फिर सवाल सिर्फ सनी देओल से नहीं है सवाल शुभांकर मिश्रा से है कि क्या यह पॉडकास्ट है या प्रमोशन की प्रीमियम दुकान? क्या यह पत्रकारिता है या प्रभाव बेचने का कारोबार? क्या बड़े सितारे बातचीत करने आते है या अपनी फिल्म की डिजिटल मार्केटिंग कराने? क्योंकि इससे पहले फरवरी में हुए देश के बड़े विवादों में से एक गलगोटिया विवाद में भी शुभांकर मिश्रा पर सवालों की लड़ी लगी थी। उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा था और जेन जी उन्हें खूब खरी खोटी सुना रहा था।
होस्ट से मोटी रकम वसूलने का शुभांकर पर आरोप!
शुभांकर मिश्रा का इंस्टा एकांउट हो या फिर यूटयूब चैनल सभी जगह सेक्स, रिश्तों और अंतरंगता पर खुली बातचीत वाले एपिसोड की भरमार है। दुर्भाग्य देखिये वह अपने बहुत से शो में नैतिकता की बात करते हैं युवओं से एथिकल लिविंग पर चर्चा लेकिन दूसरी ओर वह खुद विरोधोभास के उस दलदल में फंसे हैं जहां से निकलना मुश्किल है। उनके एकाउंट पर सीमा आंनद हैं जो पैनीट्रेशन बढ़ा कर आनंद को अनंत की उचाईयों तक ले जाने वाले गुर बात रही है तो दूसरी ओर जगतगुरू रामभद्राचार्य जैसी शख्सियत। बस यही दोहरा चरित्र सोशल मीडिया दर्शकों को बुरा लग रहा है और वह खुलकर इस नैतिक पतन की आलोचना करते हुए दिखायी दे रहे हैं। शुभांकर के कयी शो में पुरुषों की यौन क्षमता बढ़ाने जैसे बड़े बड़े दावे किये जा रहे हैं। सेक्स की दवाई बेचने वाले एक महाशय तो उनके शो में दो मिनट में घोड़ा बना देने वाला फार्मूला बता रहे हैं। कीड़ा जड़ी को सस्ती वियाग्रा बता कर उसको 80 लाख रूपये किलो तक बेचने का बाजार शुभांकर के शो के जरिये सजाया जा रहा है। सोचिये कोरोना काल में बहुत से आर्युवेदिक फार्मूलों को इम्युनिटी बूस्टर बता कर पेश किया गया लेकिन खुद आर्युवेद मंत्रालय ने माना कि बहुत सी बूटियों ने किसी के लीवर को नुकसान पहुंचा तो किसी की किडनी को। आज कीड़ा जड़ी और न जाने कौन-कौन सी बूटियों को क्या-क्या बता कर महंगा बेचने का रास्ता शुभांकर के शो के जरिये किय जा रहा है। खुफिया जानकारी के मुताबिक शुभाकंर की टीम अपना शेयर पहले ही जजमान से ले लेती है और फिर उसके बाद उनके शो में कुछ भी अनाप शनाप फार्मूला बताने की खुली छूट मिल जाती है।




