करोड़ों का घोटाला, ईडी का जाल, बड़ा सवाल कहा है टिबरेवाल

- करोड़ों का घोटाला, ईडी का जाल, बड़ा सवाल कहा है टिबरेवाल
- सब पकड़े गए, मगर हरि शंकर टिबरेवाल कहां है?
- महादेव से स्काई एक्सचेंज तक आखिर कितना बड़ा है यह बेटिंग नेटवर्क?
- लंदन के मेफेयर में चर्चित एडवोकेट विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी से सुलग उठे एक साथ कई सवाल?
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे नई परतें खुल रही हैं। कहीं किसी सहयोगी तक जांच पहुंच रही है कहीं संपत्तियों पर कार्रवाई हो रही है कहीं पैसों के रास्तों की पड़ताल हो रही है तो कहीं विदेशी कंपनियों और नेटवर्क की कडिय़ां जांच एजेंसियों की फाइलों में दर्ज हो रही हैं। लेकिन इस पूरी कहानी के बीच एक नाम ऐसा है जिसे लेकर सवाल कम होने के बजाय लगातार बड़े होते जा रहे हैं और वह नाम है हरि शंकर टिबरेवाल का, लोग पूछ रहे हैं कि आखिर टिबरेवाल ईडी की आंखों में धूल झोक कर कहां छुपा बैठा है।
यही वह सवाल है जिसने इस पूरे मामले को और रहस्यमय बना दिया है। क्योंकि जब जांच किसी नेटवर्क के सहयोगियों तक पहुंच सकती है जब संपत्तियों की पहचान हो सकती है जब गिरफ्तारियां हो सकती हैं जब विदेशी कंपनियों और पैसों के कथित रास्तों की पड़ताल हो सकती है तो फिर उस नाम तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंची जो जांच के दस्तावेजों में प्रमुखता से सामने आता रहा? क्या टिबरेवाल जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर है? इन सवालों के जवाब साफ नहीं हैं और इसी खाली जगह में अटकलें जन्म ले रही हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या है कि महादेव मामले में एक के बाद एक कार्रवाई की खबरें आती हैं लेकिन टिबरेवाल को लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आती। सोशल और राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं मामला किसी स्तर पर ले-देकर सेटल तो नहीं हो गया? क्योकि लंदन के मेफेयर में भारत के चर्चित आपराधिक मामलों के वकील विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी ने इस पुरानी फाइल पर फिर से रोशनी डाल दी है। विजय अग्रवाल के खिलाफ ब्रिटेन में चल रहा मामला अलग है और उसका महादेव जांच या टिबरेवाल से कोई सार्वजनिक रूप से स्थापित संबंध सामने नहीं आया है। लेकिन मेफेयर का नाम सामने आते ही टिबरेवाल को लेकर वह पुराने दावे फिर चर्चा में आ गए जिनमें उसके लंदन और मेफेयर से जुड़े होने की बात कही गई थी। बस यहीं से आग फिर भड़क गई है। क्या टिबरेवाल वास्तव में लंदन में है? क्या जांच एजेंसियों को उसकी लोकेशन मालूम है? क्या उसे भारत वापस लाने के लिए कोई प्रक्रिया चल रही है? और अगर नहीं तो क्यों नहीं?

पत्रकारिता का काम पूछना है
विजय अग्रवाल लंदन में किस काम के लिए गये थे? हरि शंकर टिबरेवाल आज कहां है और उसके खिलाफ ईडी की जांच किस स्थिति में है? और महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़ी उस पूरी जांच में आखिर कितनी परतें खुलनी अभी बाकी हैं? कहानी लंदन से शुरू जरूर होती है। लेकिन सवाल भारत की जांच एजेंसियों के दरवाजे तक अपने आप पहुंच रहा है। लंदन के मेफेयर विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी अपने आप में एक गंभीर आपराधिक मामला है। भारत के चर्चित आर्थिक अपराध और हाई प्रोफाइल मामलों में वकील के तौर पर पहचान रखने वाले विजय अग्रवाल को ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
जांच एजेंसियों को क्या टिबरेवाल की लोकेशन मालूम है?
लंदन का यह इलाका इस कहानी में सिर्फ एक भौगोलिक नाम नहीं रह जाता। क्योंकि उपलब्ध दस्तावेजों में हरि शंकर टिबरेवाल के लंदन और मेफेयर से जुड़े होने के दावे भी दर्ज हैं। इन दावों की स्वतंत्र ब्रिटिश आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य नहीं कहा जा सकता। लेकिन इतना जरूर है कि एक तरफ विजय अग्रवाल मेफेयर में मौजूद हैं और वहीं उनकी गिरफ्तारी की खबर आती है जबकि दूसरी तरफ टिबरेवाल के कथित रूप से उसी इलाके में होने के दावे सामने आते हैं। इस संयोग को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि क्या विजय अग्रवाल और हरि शंकर टिबरेवाल के बीच कभी कोई पेशेवर या कानूनी संबंध रहा है? क्या विजय अग्रवाल ने कभी टिबरेवाल का प्रतिनिधित्व किया? क्या टिबरेवाल के परिवार सहयोगियों या उससे जुड़ी किसी कंपनी को कानूनी सेवाएं दी गईं? और क्या विजय अग्रवाल की लंदन यात्रा का किसी ऐसे पेशेवर काम से कोई संबंध था? यहां यह भी समझना जरूरी है कि अगर कोई वकील किसी आरोपी या जांच के दायरे में आए व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है तो अपने आप में वह कोई अपराध नहीं है। कानून हर व्यक्ति को कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार देता है। सवाल केवल संबंध की मौजूदगी और उसके स्वरूप का है।
कहां है ईडी के दस्तावेजों वाला टिबरेवाल
हरि शंकर टिबरेवाल यह वही नाम है जो ईडी के दस्तावेजों में स्काई एक्सचेंज और उससे जुड़ी जांच के संदर्भ में सामने आया है। दस्तावेजों में उसके आर्थिक नेटवर्क सहयोगियों विदेशी कंपनियों दुबई कनेक्शन और भारतीय शेयर बाजार में निवेश के रास्तों का जिक्र है। उसके आसपास के लोगों पर कार्रवाई हुई है गिरफ्तारियां भी हुईं और संपत्तियों की जांच तथा जब्ती की कार्रवाई भी की गयी है। लेकिन सवाल यह है कि जिस जांच की परतें उसके पूरे नेटवर्क तक पहुंच रही है उस जांच में खुद हरि शंकर टिबरेवाल की मौजूदा स्थिति क्या है? क्या वह भारत में है? क्या वह दुबई में है? या फिर उन दावों में सच्चाई है जिनमें उसके लंदन और मेफेयर से जुड़े होने की बात कही गई? यहीं से लंदन की कहानी और भारतीय जांच वाली कहानी एक ही फ्रेम में दिखाई देने लगती है। एक तरफ मेफेयर में विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी है। दूसरी तरफ उसी मेफेयर को लेकर टिबरेवाल की मौजूदगी से जुड़े दावे हैं। क्या दोनों के बीच कोई पेशेवर संबंध है? इसका हमारे पास कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है। इसलिए इसे तथ्य की तरह पेश करना गलत होगा। लेकिन सवाल पूछा जा सकता है कि क्या विजय ने कभी टिबरेवाल उसके परिवार उसके सहयोगियों या उससे संबंधित किसी कंपनी को कानूनी सेवाएं दीं? अगर नहीं दीं तो साफ जवाब आना चाहिए। अगर दीं तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंध किस हैसियत से था।



