करोड़ों का घोटाला, ईडी का जाल, बड़ा सवाल कहा है टिबरेवाल

  • सब पकड़े गए, मगर हरि शंकर टिबरेवाल कहां है?
  • महादेव से स्काई एक्सचेंज तक आखिर कितना बड़ा है यह बेटिंग नेटवर्क?
  • लंदन के मेफेयर में चर्चित एडवोकेट विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी से सुलग उठे एक साथ कई सवाल?

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लंदन के मेफेयर में चर्चित भारतीय वकील विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी ने करोड़ों अरबों के घोटाले के सोये हुए जिन्न हो फिर से जगा दिया है और कई सवाल उठा दिये हैं। ब्रिटिश पुलिस ने भारत के चर्चित आपराधिक मामलों के वकील विजय अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। उन पर दो महिलाओं के यौन शोषण का अरोप लगा है और उनकी गिरफ्तारी भी इसी वजह से की गयी है।
विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद एक साथ कई सवाल खड़े हो गये हैं जो लंदन से हजारों किलोमीटर दूर भारत में चल रही एक पुरानी जांच की फाइल तक पहुंचते हैं। यहा यह बताना जरूरी है कि विजय अग्रवाल इन आरोपों में दोषी हैं या निर्दोष इसका फैसला ब्रिटेन की अदालत करेगी। हमें अदालत से पहले किसी को दोषी घोषित नहीं करना है। लेकिन हमारी कहानी सिर्फ उनकी गिरफ्तारी पर नहीं है। हमारा सवाल कुछ और है और वह यह है कि आखिर विजय अग्रवाल लंदन में कर क्या रहे थे? वह मेफेयर में क्यों थे? और सबसे बड़ा सवाल जिसका जवाब भारत की जांच एजेंसियों और संबंधित लोगों को देना चाहिए कि क्या विजय अग्रवाल की लंदन मौजूदगी का हरि शंकर टिबरेवाल से किसी प्रकार का पेशेवर या कानूनी संबंध था?

अग्रवाल की गिरफ्तारी को सनसनी बनाकर खत्म नहीं किया जा सकता?

इस कहानी में विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी को सनसनी बनाकर खत्म नहीं किया जाना चाहिए। असली पत्रकारिता यह पता लगाने में है कि उनकी लंदन मौजूदगी किन पेशेवर कारणों से थी और क्या उन कारणों में टिबरेवाल या उससे जुड़े किसी व्यक्ति अथवा कंपनी का नाम शामिल था। अगर जवाब नहीं है तो कहानी का यह हिस्सा यहीं समाप्त हो जाता है। लेकिन जवाब अगर हां है तो फिर सवाल उठेगा कि कब से किस मामले में और किस हैसियत से? फिलहाल निष्कर्ष नहीं सिर्फ सवाल है। और यह सवाल हमें कहानी के दूसरे हिस्से तक ले जाता है कि जिस हरि शंकर टिबरेवाल का नाम जांच की फाइलों में सामने आया वह आखिर आज कहां है?

पत्रकारिता का काम पूछना है

विजय अग्रवाल लंदन में किस काम के लिए गये थे? हरि शंकर टिबरेवाल आज कहां है और उसके खिलाफ ईडी की जांच किस स्थिति में है? और महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़ी उस पूरी जांच में आखिर कितनी परतें खुलनी अभी बाकी हैं? कहानी लंदन से शुरू जरूर होती है। लेकिन सवाल भारत की जांच एजेंसियों के दरवाजे तक अपने आप पहुंच रहा है। लंदन के मेफेयर विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी अपने आप में एक गंभीर आपराधिक मामला है। भारत के चर्चित आर्थिक अपराध और हाई प्रोफाइल मामलों में वकील के तौर पर पहचान रखने वाले विजय अग्रवाल को ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

मेफेयर में टिबरेवाल की रिहाइश और वहीं से विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी?

लंदन का यह इलाका इस कहानी में सिर्फ एक भौगोलिक नाम नहीं रह जाता। क्योंकि उपलब्ध दस्तावेजों में हरि शंकर टिबरेवाल के लंदन और मेफेयर से जुड़े होने के दावे भी दर्ज हैं। इन दावों की स्वतंत्र ब्रिटिश आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य नहीं कहा जा सकता। लेकिन इतना जरूर है कि एक तरफ विजय अग्रवाल मेफेयर में मौजूद हैं और वहीं उनकी गिरफ्तारी की खबर आती है जबकि दूसरी तरफ टिबरेवाल के कथित रूप से उसी इलाके में होने के दावे सामने आते हैं। इस संयोग को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि क्या विजय अग्रवाल और हरि शंकर टिबरेवाल के बीच कभी कोई पेशेवर या कानूनी संबंध रहा है? क्या विजय अग्रवाल ने कभी टिबरेवाल का प्रतिनिधित्व किया? क्या टिबरेवाल के परिवार सहयोगियों या उससे जुड़ी किसी कंपनी को कानूनी सेवाएं दी गईं? और क्या विजय अग्रवाल की लंदन यात्रा का किसी ऐसे पेशेवर काम से कोई संबंध था? यहां यह भी समझना जरूरी है कि अगर कोई वकील किसी आरोपी या जांच के दायरे में आए व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है तो अपने आप में वह कोई अपराध नहीं है। कानून हर व्यक्ति को कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार देता है। सवाल केवल संबंध की मौजूदगी और उसके स्वरूप का है।

कहां है ईडी के दस्तावेजों वाला टिबरेवाल

हरि शंकर टिबरेवाल यह वही नाम है जो ईडी के दस्तावेजों में स्काई एक्सचेंज और उससे जुड़ी जांच के संदर्भ में सामने आया है। दस्तावेजों में उसके आर्थिक नेटवर्क सहयोगियों विदेशी कंपनियों दुबई कनेक्शन और भारतीय शेयर बाजार में निवेश के रास्तों का जिक्र है। उसके आसपास के लोगों पर कार्रवाई हुई है गिरफ्तारियां भी हुईं और संपत्तियों की जांच तथा जब्ती की कार्रवाई भी की गयी है। लेकिन सवाल यह है कि जिस जांच की परतें उसके पूरे नेटवर्क तक पहुंच रही है उस जांच में खुद हरि शंकर टिबरेवाल की मौजूदा स्थिति क्या है? क्या वह भारत में है? क्या वह दुबई में है? या फिर उन दावों में सच्चाई है जिनमें उसके लंदन और मेफेयर से जुड़े होने की बात कही गई? यहीं से लंदन की कहानी और भारतीय जांच वाली कहानी एक ही फ्रेम में दिखाई देने लगती है। एक तरफ मेफेयर में विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी है। दूसरी तरफ उसी मेफेयर को लेकर टिबरेवाल की मौजूदगी से जुड़े दावे हैं। क्या दोनों के बीच कोई पेशेवर संबंध है? इसका हमारे पास कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है। इसलिए इसे तथ्य की तरह पेश करना गलत होगा। लेकिन सवाल पूछा जा सकता है कि क्या विजय ने कभी टिबरेवाल उसके परिवार उसके सहयोगियों या उससे संबंधित किसी कंपनी को कानूनी सेवाएं दीं? अगर नहीं दीं तो साफ जवाब आना चाहिए। अगर दीं तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंध किस हैसियत से था।

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