नेटवर्क तक पहुंची जांच सहयोगियों पर कार्रवाई
फिर कु छ लोग पकड़ से कैसे छूटे

94० करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों पर कार्रवाई का दावा भी दस्तावेज में मौजूद
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आधिकारिक दस्तावेजों में हरि शंकर टिबरेवाल का नाम स्काई एक्सचेंज से जुड़ी जांच के संदर्भ में सामने आया। मार्च 24 में ईडी ने कहा था कि उसकी जांच में टिबरेवाल को स्काई एक्सचेंज से जोड़ा गया और उसके करीबी सहयोगी सूरज चोखानी को गिरफ्तार किया गया। ईडी ने शेयर बाजार में कथित हेरफेर से जुड़े आरोपों की जांच का भी उल्लेेख किया।
यह आरोप जांच का हिस्सा हैं और इन्हें अदालत का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। लेकिन यहां सवाल बड़ा है और वह यह है कि जांच नेटवर्क तक पहुंची सहयोगियों की पहचान भी हुई गिरफ्तारियां भी की गयी संपत्तियों की जांच और कुर्की आदि कि कार्रवाई भी हुई विदेशी कंपनियों के जरिए निवेश के आरोपों की पड़ताल हुई दुबई तक तार पहुंचे। सब कुछ हुआ सिवाए हरि शंकर टिबरेवाल को छोडक़र और अभी तक नहीं पता चला कि उनकी वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है? उपलब्ध दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि टिबरेवाल के भाई नितिन टिबरेवाल और सहयोगी सूरज चोखानी की गिरफ्तारी हुई। दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग को भी ईडी ने गिरफ्तार किया और दस्तावेजों में स्काई एक्सचेंज तथा टिबरेवाल से जुड़े धन के रास्ते का जिक्र है। विकास गर्ग से संबंधित करीब 940 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों पर कार्रवाई का दावा भी दस्तावेज में मौजूद है। यानी जांच के आसपास के कई नाम एजेंसियों की कार्रवाई में आए। लेकिन सबसे बड़ा नाम कहां है अभी तक कोई अता पता नहीं और न ही इस बात की चर्चा।

यही सवाल असली आग है
अगर किसी नेटवर्क की कंपनियों तक पहुंचा जा सकता है अगर सहयोगियों की पहचान की जा सकती है अगर संपत्तियों पर कार्रवाई हो सकती है तो फिर यह साफ होना चाहिए कि हरि शंकर टिबरेवाल के खिलाफ जांच आज किस मुकाम पर है। क्या उसे कभी पूछताछ के लिए बुलाया गया? क्या उसके खिलाफ समन जारी हुए? क्या कोई गिरफ्तारी वारंट है? क्या कोई अदालत में शिकायत या आरोप पत्र दाखिल हुआ? क्या ईडी को उसकी वर्तमान लोकेशन की जानकारी है? और सबसे महत्वपूर्ण अगर उसके विदेश में होने की जानकारी है तो उसे भारत वापस लाने के लिए क्या किया गया?
यह स्टोरी जांच की ट्रांसपेरेंसी की है
यह कहानी किसी को पहले से दोषी मानने की नहीं है यह कहानी जांच की पारदर्शिता की है। किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं तो यह भी साफ होना चाहिए। लेकिन अगर गंभीर जांच चल रही है और व्यक्ति का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद है तो उसकी वर्तमान कानूनी स्थिति पर भी स्पष्टता होनी चाहिए क्योंकि सवाल बहुत सीधा है कि अगर जांच जाल के किनारों तक पहुंच गई तो जाल के कथित बड़े नाम तक कब पहुंचेगी?
ऑनलाइन सट्टेबाजी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, हवाला के आरोप
इस पूरी कहानी के पीछे है महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़ी जांच महादेव का नाम सामने आने के बाद जांच सिर्फ एक ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रही। जांच एजेंसियों ने एक ऐसे नेटवर्क की पड़ताल शुरू की जिसमें ऑनलाइन सट्टेबाजी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, हवाला के आरोप, विदेशी कंपनियां और भारत के बाहर से संचालित होने वाले आर्थिक रास्तों की बात सामने आई। इसी व्यापक जांच के संदर्भ में स्काई एक्सचेंज का नाम भी सामने आया। ईडी के दस्तावेजों में स्काई एक्सचेंज को बड़े कथित नेटवर्क के संदर्भ में देखा गया और हरि शंकर टिबरेवाल का नाम उससे जोडक़र सामने आया। दस्तावेजों के अनुसार टिबरेवाल से जुड़ी दुबई स्थित कंपनियों के माध्यम से भारतीय शेयर बाजार में निवेश किए जाने के आरोपों की जांच हुई।यहीं से कहानी सिर्फऑनलाइन सट्टेबाजी की नहीं रहती। यह सवाल बन जाता है कि अगर किसी कथित सट्टेबाजी नेटवर्क की कमाई को विदेशी कंपनियों बैंक खातों और अलग अलग निवेश के रास्तों से घुमाया गया तो उसका पैमाना कितना बड़ा था? ईडी की जांच में अपराध की कमाई को अलग अलग खातों के जरिए इधर उधर करने के आरोप सामने आए। विदेशी माध्यम कंपनियों के जरिए भारतीय कंपनियों में निवेश की बात भी दस्तावेजों में दर्ज है। हवाला और शेयर बाजार में हेरफेर से जुड़े आरोपों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया।
चल रही है अलग-अलग जांच
महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों में अलग अलग व्यक्तियों और नेटवर्क के खिलाफ जांच चलती रही है। जांच एजेंसियों के दस्तावेजों में दर्ज आरोपों की अंतिम कानूनी सच्चाई अदालत की प्रक्रिया से तय होती है। फिर भी सवाल इसलिए बड़ा है कि जांच के दायरे में हजारों करोड़ रुपये के सट्टेबाजी नेटवर्क, विदेशी कंपनियों और भारत से बाहर तक फैले आर्थिक संपर्कों की बात आती है तो यह किसी छोटे मोटे स्थानीय मामले की जांच नहीं रह जाती। यहां पैसा है विदेशी कंपनियां है हवाला नेटवर्क है दुबई है और शेयर बाजार तक पहुंच के आरोप हैं। और सबसे महत्वपूर्ण भारत से बाहर तक फैले उन लोगों की तलाश का सवाल है जिनके नाम जांच की फाइलों में सामने आए।महादेव ऑनलाइन बुक की कहानी को इसलिए सिर्फ एक बेटिंग ऐप घोटाला कहकर समझना अधूरा होगा। जांच की फाइलों में इससे जुड़े कथित आर्थिक नेटवर्क, कई प्लेटफॉर्म, विदेशी कंपनियां और निवेश के रास्तों की परतें सामने आती हैं। स्काई एक्सचेंज और हरि शंकर टिबरेवाल का नाम इसी व्यापक जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाता है।
गुरुग्राम की चकाचौंध में दबी आम जनजीवन की जरू रतें
पॉश इलाके में पिछले 5 महीनों से पानी का संकट
लोगों ने भाजा सरकार पर साधा निशाना
सीएम सैनी से गुहार पानी दे दें सरकार
देश का सबसे महंगा मकान बिकने की चर्चा में है आजकल गुरुग्राम
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चडीगढ़। हरियाणा केगुरुग्राम पूर्व नाम गुडग़ांव केचकाचौंध पूरी दुनिया को दिखाई देती है। जिसकी वजह से वहां परं देश का सबसे महंगा मकान बिकने की खबरें आजकल छाई हुर्ईं हैं। गुरुग्राम जैसे ‘मिलेनियम सिटी’ का एक काला पक्ष भी है कि यहां के लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।
सता में बैठी भाजपा की सैनी सरकार प्रचार तंत्र केमाध्यम से अपने राज्य का बखान खासतौर से गुरुग्राम की हाईराइज बिल्डिंगों दिखाकर निवेश तो खूब बटोरती है वहां केआम लोगों की दयनीय स्तर देख कर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है। मुख्यमंत्री जिस गुरुग्राम की चमक दिखाकर हरियाणा के विकास का ढोल पीटा जाता है, उसी शहर के पॉश इलाके में सरकार अपने नागरिकों को दो दिन में एक बूंद पानी तक नहीं दिलवा पा रहे!
ऐसी खबर है कि गुरुग्राम के पॉश सेक्टर-27 में पिछले करीब 5 महीनों से लगभग हर हफ्ते पानी की गंभीर समस्या बनती रहती है। अब हालात ये हैं कि पिछले 48 घंटे से पानी नहीं आ रहा। लोगों के घरों की टंकियां खाली हैं और लोग निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। तुर्रा वह लागों की मजबूरी का फायदा उठाकर 5000 तक प्रति टैंकर मांग रहे हैं।
सोशल मीडिया पर सैनी सरकार की ट्रोलिंग
अब तक लोग भी इन खबरों को लेकर सोशल मीडिया पर सैनी सरकार को ट्रोल कर रहे हैं। करोड़ों-अरबों के मकान, गगनचुंबी इमारतें, बड़ी-बड़ी कंपनियां और ‘ग्लोबल सिटी’ का तमगा किस काम का, अगर लोगों को नल में पानी तक न मिले? मुख्यमंत्री जी, अगर आपकी सरकार गुरुग्राम के सेक्टर-27 में पानी नहीं पहुंचा सकती, तो फिर हरियाणा के दूर-दराज गांवों और कस्बों का क्या हाल होगा?
बार-बार पानी बंद होने के लिए जिम्मेदार कौन
उधर पानी की किल्लत से सेक्टर -27 के लोग परेशान है। लोगों के कहना है कि यह सिर्फ पानी की किल्लत नहीं, प्रशासन की जवाबदेही का सवाल भी है। आम लोगों से सरकार व सीएम से सेक्टर-27 की सप्लाई तत्काल बहाल कराने की अपील की है। और साथ ही पूछा कि बार-बार पानी बंद होने के लिए जिम्मेदार कौन है?
हाइवे पर ट्रक के पीछे घुसी अनियंत्रित कार, पति-पत्नी समेत 3 की मौत, 9 घायल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
भोपाल। बैतूल-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मुलताई के पास शनिवार तडक़े करीब 3.3० बजे भीषण सडक़ हादसा हो गया। तेज रफ्तार कार सडक़ किनारे खड़े ट्रक के पीछे जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में पति-पत्नी समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार चालक सहित नौ लोग घायल हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, कार में सवार सभी लोग महाराष्ट्र के नागपुर के पास बूटीबोरी कोल माइंस क्षेत्र के रहने वाले श्रद्धालु थे। वे गाड़ी नंबर- एमएच 49 सी 4756 में सवार होकर सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम दर्शन के लिए जा रहे थे। प्रारंभिक जांच में आशंका है कि चालक को झपकी आने के कारण सडक़ किनारे खड़ा ट्रक दिखाई नहीं दिया और कार सीधे उसके पीछे जा टकराई। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। हादसे में 42 वर्षीय दीपक और उनकी 4० वर्षीय पत्नी छाया की पहचान हो गई है।
सपा नेताओं से मारपीट मामले में सख्त कार्रवाई
थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में समाजवादी पार्टी नेताओं के साथ कथित मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए शनिवार को सिविल लाइंस थाना प्रभारी सहित आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन भेज दिया गया।
सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह इस मामले की जांच कर रहे हैं, जबकि उपनिरीक्षक अरुण भाटी को सिविल लाइंस का नया थाना प्रभारी बनाया गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के दो नेताओं द्वारा तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अविनाश पांडेय समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर मारपीट के लगाए गए आरोपों की जांच के बीच, मेरठ में सिविल लाइंस थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को शनिवार को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) भानु भास्कर के आदेश पर मामले की जांच सहारनपुर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अभिषेक सिंह कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, संबंधित पुलिसकर्मियों को इसलिए लाइन हाजिर किया गया है ताकि जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।
लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों में सिविल लाइंस थाना प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार गौड़, उपनिरीक्षक मुलायम सिंह, हेड कांस्टेबल हरि ओम, कांस्टेबल मुकेश कुमार, हेड कांस्टेबल श्याम बाबू, कांस्टेबल सुमित कुमार, कांस्टेबल नीलम लौर और चालक ललित कुमार शामिल हैं। इससे पहले, सपा नेता दिग्विजय सिंह भाटी और मोहित जाटव ने आरोप लगाया था कि 19 अगस्त को तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने के दौरान उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। भाटी ने आरोप लगाया कि एसएसपी के कक्ष में पिटाई के बाद उन्हें सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश कुमार गौड़ के जरिए विशेष अभियान समूह (एसओजी) के कार्यालय ले जाया गया, जहां उनके हाथ-पैर बांधकर उन्हें डंडों से पीटा गया। भाटी ने यह भी आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया और उन्हें यह धमकी दी कि घटना के बारे में मीडिया से बात करने पर उनका और बुरा हाल किया जाएगा। मोहित जाटव ने भी पुलिसकर्मियों पर उन्हें मुठभेड़ की धमकी देने का आरोप लगाया था। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पटना में फिर सम्राट सरकार केखिलाफ हल्लाबोल
असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों के लोकभवन मार्च के दौरान पुलिस से झड़प
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना । पटना में तेजस्वी के मार्च एकबार फिर सम्राट सरकार केखिलाफ हल्ला बोल किया गया है। ऑल पीएचडी होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले अभ्यर्थी पिछले 19 दिनों से चल रहे अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर हैं।
शनिवार को इन्होंने लोकभवन मार्च का एलान कर रखा था। इस दौरान पुलिस ने जगह-जगह अभ्यर्थियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई थी। पुलिस के इस प्रयास के बीच बेली रोड पर जबरदस्त झड़प हो गई। अभ्यर्थियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। सैकड़ों अभ्यर्थी गर्दनीबाग से लोकभवन की ओर से बढ़ रहे हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं डॉ. कुंदन कुमार ने कहा कि पिछले 19 दिनों से‘ऑल पीएचडी होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले आमरण अनशन पर बैठे हैं। तीन में दो शोधर्थियों की हालत बिगड़ गई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है लेकिन सरकार को हमारी चिंता नहीं है।
अभ्यर्थियों ने कहा कि नई नियमावली में अधिकतम उम्र सीमा 55 वर्ष से घटाकर 4० वर्ष कर दी गई है। इससे वर्षों से अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत अभ्यर्थियों के सामने अवसर खत्म होने का खतरा है। उन्होंने उम्र सीमा 55 वर्ष रखने की मांग की। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने रिसर्च पब्लिकेशन के अंक हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई।
नई नियमावली बिहार के छात्रों और शोधार्थियों के हित में नहीं है
‘ऑल पीएचडी होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार के डॉ. कुंदन कुमार ने कहा कि हमलोग बिहार सरकार की नई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 का विरोध कर रहे हैं। नई नियमावली बिहार के छात्रों और शोधार्थियों के हित में नहीं है तथा इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। अभ्यर्थियों ने कहा कि बिहार के विश्वविद्यालयों में करीब 3० वर्षों में केवल तीन बार सहायक प्राध्यापक की बहाली हुई है। ऐसे में स्थायी नियुक्ति के बजाय फिर संविदा आधारित नियुक्ति का प्रावधान उचित नहीं है। उन्होंने यूजीसी के टेबल 3०के आधार पर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।



