गुजरात के अरावली में ऐसा क्या हुआ कि भाजपा-कांग्रेस एक साथ आ गए!
गुजरात के अरावली जिले में ऐसा क्या मामला सामने आया, जिसने भाजपा और कांग्रेस को एक ही मुद्दे पर साथ ला दिया...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के अरावली जिले के बायद में इन दिनों मामलतदार कार्यालय के संभावित स्थानांतरण को लेकर माहौल गरम है.. यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक फैसले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय लोगों.. और राजनीतिक दलों के लिए भी बड़ा मुद्दा बन गया है.. खास बात यह है कि इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेता एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने के बजाय जनता की मांग के साथ नजर आ रहे हैं..
मामला बायद नगरपालिका परिसर में लंबे समय से चल रहे मामलतदार कार्यालय से जुड़ा है.. चर्चा है कि इस कार्यालय को मौजूदा जगह से दूसरी जगह ले जाने की तैयारी की जा रही है.. जैसे ही स्थानीय लोगों को इसके संभावित स्थानांतरण की जानकारी मिली, विरोध शुरू हो गया.. स्थानीय लोगों का कहना है कि मामलतदार कार्यालय वर्तमान जगह पर होने से आम जनता को काफी सुविधा मिलती है.. बायद शहर के साथ-साथ आसपास के गांवों से किसान.. और दूसरे लोग सरकारी काम के लिए यहां आसानी से पहुंच जाते हैं.. अगर कार्यालय को किसी दूर की जगह पर ले जाया गया.. तो लोगों को आने-जाने में ज्यादा समय और पैसा खर्च करना पड़ेगा..
खास तौर पर किसानों को लेकर लोगों की चिंता ज्यादा है.. किसानों को जमीन, राजस्व और दूसरे सरकारी कामों के लिए मामलतदार कार्यालय जाना पड़ता है.. ऐसे में कार्यालय दूर होने पर उन्हें एक छोटे से सरकारी काम के लिए भी अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ सकती है.. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे गरीब.. और ग्रामीण परिवारों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा.. इसी मांग को लेकर बायद में बंद का आह्वान किया गया.. बंद के दौरान बाजार और शहर के कई हिस्सों में इसका असर देखने को मिला.. लोगों ने मांग की कि मामलतदार कार्यालय को मौजूदा जगह से हटाया नहीं जाए और इसे बायद नगरपालिका परिसर में ही संचालित किया जाए..
वहीं इस पूरे मामले की सबसे खास बात राजनीतिक एकजुटता है.. आम तौर पर स्थानीय मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस के नेता अलग-अलग नजर आते हैं.. लेकिन मामलतदार कार्यालय के मुद्दे पर दोनों पक्षों के स्थानीय नेताओं ने लोगों की मांग का समर्थन किया है.. भाजपा के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी साफ तौर पर कहा कि कार्यालय को वर्तमान स्थान पर ही रखा जाना चाहिए.. भाजपा नगर अध्यक्ष राहुल पुरी गोस्वामी, अरावली जिला बख्शी पंच मोर्चा अध्यक्ष मानसिंह सोढ़ा.. और अदेसिंह चौहान समेत कई स्थानीय नेताओं ने इस मांग का समर्थन किया..
दूसरी तरफ, कांग्रेस से जुड़े स्थानीय लोगों ने भी कार्यालय के स्थानांतरण का विरोध किया है.. उनका कहना है कि प्रशासन को कोई भी फैसला लेते समय आम जनता की सुविधा को सबसे पहले देखना चाहिए.. अगर किसी सरकारी कार्यालय की नई जगह लोगों के लिए ज्यादा मुश्किल पैदा करती है.. तो ऐसे फैसले पर दोबारा विचार होना चाहिए.. यानी इस मुद्दे पर राजनीतिक लड़ाई के बजाय स्थानीय जनहित सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.. भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के एक साथ आने से यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो गया है..
बायद के विधायक धवलसिंह झाला ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है.. उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर मामलतदार कार्यालय को वर्तमान स्थान पर ही बनाए रखने की मांग की है.. अपने पत्र में विधायक धवलसिंह झाला ने बायद विधानसभा क्षेत्र के किसानों, याचिकाकर्ताओं.. और आम नागरिकों की परेशानियों का जिक्र किया.. और उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोग सरकारी काम के लिए मौजूदा कार्यालय पर निर्भर हैं.. ऐसे में अगर कार्यालय को किसी दूरस्थ स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है.. तो लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है..



