शिक्षा व्यवस्था पर इशुदान गढ़वी का बड़ा हमला, 9 हजार स्कूलों में सिर्फ 1 क्लासरूम का दावा

गुजरात की शिक्षा व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है... इशुदान गढ़वी ने दावा किया कि राज्य के करीब... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः बीजेपी के 30 साल के शासन के बाद गुजरात की शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं.. आम आदमी पार्टी के नेता और गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता इशुदान गढ़वी ने राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.. सवाल सिर्फ स्कूलों की संख्या का नहीं है.. सवाल उन बच्चों के भविष्य का है.. जो इन सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं.. सरकार हर साल शिक्षा को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है.. प्रवेश उत्सव जैसे कार्यक्रमों के जरिए स्कूलों में बच्चों के दाखिले पर जोर दिया जाता है.. लेकिन सवाल यह है कि दाखिले के बाद बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूलों में पर्याप्त कमरे, शिक्षक और जरूरी सुविधाएं हैं या नहीं..

इशुदान गढ़वी का आरोप है कि गुजरात में करीब 9,000 स्कूल ऐसे हैं.. जो सिर्फ एक क्लासरूम के साथ चल रहे हैं.. यानी एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने की चुनौती बनी हुई है.. ऐसे में बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना कितना संभव है.. यह बड़ा सवाल है.. इतना ही नहीं, गढ़वी के मुताबिक गुजरात में 3,000 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं.. जो सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं.. अब आप सोचिए अगर किसी स्कूल में कई कक्षाएं हों.. और पढ़ाने के लिए सिर्फ एक शिक्षक हो.. तो वह शिक्षक सभी बच्चों को पर्याप्त समय कैसे दे पाएगा..

एक शिक्षक को अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को संभालना पड़ता है.. उसे पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल की दूसरी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं.. ऐसे माहौल में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है.. इशुदान गढ़वी ने राज्य में बड़ी संख्या में खाली पड़े शिक्षकों के पदों का मुद्दा भी उठाया है.. उनके मुताबिक गुजरात में 25,000 से ज्यादा शिक्षण पद खाली हैं.. अगर इतने बड़े पैमाने पर शिक्षकों के पद खाली हैं.. तो इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा पर पड़ सकता है..

वहीं सबसे बड़ा सवाल उन युवाओं को लेकर भी है.. जो शिक्षक बनने की योग्यता रखते हैं और भर्ती का इंतजार कर रहे हैं.. गढ़वी के मुताबिक करीब 3.5 लाख TET और TAT योग्य उम्मीदवार भर्ती का इंतजार कर रहे हैं.. इन युवाओं ने शिक्षक बनने के लिए परीक्षा पास की.. अपनी योग्यता साबित की.. और लंबे समय से सरकारी भर्ती का इंतजार कर रहे हैं.. दूसरी तरफ अगर स्कूलों में शिक्षकों की कमी है.. तो सरकार और योग्य उम्मीदवारों के बीच यह दूरी आखिर क्यों बनी हुई है.. यह सिर्फ रोजगार का मुद्दा नहीं है.. यह बच्चों की शिक्षा से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है..

एक तरफ हजारों युवा शिक्षक बनने के लिए इंतजार कर रहे हैं.. और दूसरी तरफ हजारों स्कूलों में शिक्षकों की कमी की बात सामने आ रही है.. ऐसे में सरकार से यह सवाल पूछा जाना जरूरी है कि इन खाली पदों को भरने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे.. इशुदान गढ़वी ने सरकार के ‘प्रवेश उत्सव’ जैसे अभियानों पर भी सवाल उठाया है.. उनका कहना है कि सिर्फ बच्चों का स्कूल में दाखिला कराना ही काफी नहीं है.. बच्चों को स्कूल में अच्छी शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक, पर्याप्त क्लासरूम और बेहतर सुविधाएं भी मिलनी चाहिए..

 

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