राहुल की जेन जी गूंज पर बीजेपी का डिजिटल डांस ?
पुणे में राहुल गांधी का महिलाओं को फोकस करते हुए मनुस्मृति पर तगड़ा हमला

- बीजेपी की सात राज्यों के लिए आक्रामक जेन जी पालिसी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के पुराने अखाड़े में अचानक एक नई आवाज गूंजने लगी है। यह न संसद की घंटी है न चुनावी रैली का पारंपरिक शोर और न ही किसी नेता का घिसा पिटा भाषण। यह आवाज है उस पीढ़ी की जो टीवी से ज्यादा मोबाइल स्क्रीन पर राजनीति देखती है। भाषण से ज्यादा क्लिप शेयर करती है और नेता की पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस से ज्यादा उसकी तीस सेकंड की रील पर फैसला सुना देती है। और इसी नई राजनीतिक दुनिया के बीच राहुल गांधी ने देश की 70 करोड़ महिलाओं को फोकस में रखकर ऐसी पालिटिक्ल बीन बजाई जिसने बीजेपी को डिजिटल डांस करने के लिए मजबूर कर दिया।
जेन जी को फोकस करते हुए राहुल गांधी गैर राजनीतिक कार्यक्रम गूंज के जरिये अलग-अलग राज्यों के छात्रों से संवाद कर रहे हैं और उनके कार्यक्रम में हजारों की तादात में छात्र जुट रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि देश का राजनीतिक महौल बदल रहा है। राजनीतिक मुद्दा अब शिक्षा और रोजगार के इर्द गिर्द सेट हो रहा है। वर्ष 27 में देश के अहम राज्यों में विधानसभा चुनाव है जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है। उत्तर प्रदेश से ही दिल्ली का रास्ता तय होता है यह बात राजनीतिक दलों को अच्छी तरह से मालूम हैं ऐसे में छात्रों के मुद्दों पर पालिटिकल माइलेज लेते राहुल गांधी को घेरने के लिए बीजेपी ने भी कमर कस ली है और नये अध्यक्ष नितिन नवीन ने सात राज्यों के लिए जेन जी को फोकस करते हुए बाकायदा एक पालिसी ही बना डाली है।
देश की सबसे बड़ी ताकत देश की 70 करोड़ महिलाएं
राहुल गांधी ने कहा कि बहुत से लोग अर्थव्यवस्था या सेना को भारत की सबसे बड़ी ताकत मानते हैं लेकिन उनकी नजर में देश की सबसे बड़ी शक्ति 70 करोड़ महिलाओं के सपने विचार और क्षमता हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं में स्वाभाविक रूप से संवेदनशीलता सहानुभूति और करुणा अधिक होती है। मनुस्मृति जैसी व्यवस्थाएं महिलाओं को केवल बेटी-पत्नी या मां की सीमित पहचान में बांधने का प्रयास करती हैं। महिलाएं किसी पुरुष की नहीं होतीं आप केवल अपनी हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में हर साल लगभग 4.5 लाख लड़कियां भ्रूण हत्या की शिकार होती हैं जबकि 80 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में उत्पीडऩ का सामना करती हैं और 30 प्रतिशत महिलाओं को शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ती है। देश में 10 महिलाओं में से करीब छह महिलाएं प्रत्यक्ष शारीरिक हमले या दुष्कर्म जैसी घटनाओं का सामना करती हैं।
पुणे में तो राहुल ने काट दिया गदर
राहुल गांधी ने पुणे के श्री शिवाजी प्रिपरेटरी मिलिट्री स्कूल कॉलेज ग्राउंड में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में महिलाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए मर्दवादी सोच पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को दूसरों पर निर्भर बनाकर रखना मनुस्मृति की मानसिकता का हिस्सा है और महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आगे आना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं हैं और वह सिर्फ खुद की हैं। उन्होंने युवतियों से सामाजिक बंधनों को तोड़कर आगे बढऩे का आह्वान किया। जेन जी की बड़ी संख्या में मौजूद छात्राओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनका यह कार्यक्रम राजनीति पर नहीं बल्कि युवाओं के विचारों शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद के लिए है। कार्यक्रम के दौरान कई छात्राओं ने मंच पर आकर अपनी व्यक्तिगत चुनौतियों और अनुभवों को भी साझा किया।
अगला चुनाव पोस्टर से नहीं जेन जी के दिमाग में होगा
राहुल ने सिर्फ राजनीतिक बीन नहीं बजाई है बल्कि उस डिजिटल जंगल में सुर छेड़ दिया है जहां अब हर पार्टी को पता है कि अगला चुनाव सिर्फ मैदानों रैलियों और पोस्टरों पर नहीं लड़ा जाएगा। चुनाव लड़ा जाएगा मोबाइल पर रील में मीम में कैंपस में और उस जेन जी के दिमाग में जो शायद पहली बार यह तय कर रहा है कि राजनीति उसके लिए बोरिंग नहीं बल्कि उसके भविष्य का सीधा सवाल है। और शायद यही वजह है कि राहुल गांधी की हर नई युवा पहल के बाद बीजेपी की प्रतिक्रिया भी खबर बन रही है। क्योंकि कभी कभी राजनीति में सबसे बड़ी खबर वह नहीं होती जो नेता कहता है। सबसे बड़ी खबर वह होती है कि उसके कहने के बाद उसका विरोधी क्या करने लगता है।
राजनीतिक चर्चा नहीं करेंगे
कार्यक्रम की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि वह राजनीतिक चर्चा नहीं करेंगे बल्कि युवाओं के विचारों और उनकी अपेक्षाओं को समझने का प्रयास करेंगे। भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है और युवाओं को अपनी क्षमता पहचानकर देश के विकास में योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा युवाओं का भविष्य सामाजिक बदलाव महिलाओं की भूमिका और आज की पीढ़ी के सामने मौजूद चुनौतियों जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान आदर्श नारी की अवधारणा पर भी बातचीत हुई और समाज में महिलाओं की बदलती भूमिका योगदान तथा उनके प्रति बदलती सोच पर विचार साझा किए गए।
जेन जी के सवाल पर बीजेपी इतनी सक्रिय क्यों दिखाई देने लगी है?
राहुल गांधी पिछले कुछ समय से अपनी राजनीति का फोकस लगातार युवाओं छात्रों और महिलाओं की तरफ मोड़ते दिखाई दे रहे हैं। कैंपस में पहुंचना छात्रों से सीधे बात करना बेरोजगारी और भविष्य की चिंता को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाना यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि उस राजनीति की तरफ कदम है जहां नेता मंच पर खड़ा होकर भाषण नहीं देता बल्कि उस वोटर के बीच जाकर बैठता है जो अभी तक राजनीति को अपने फोन की स्क्रीन से देख रहा था। राहुल अब उस नाराज परेशान और भविष्य को लेकर बेचैन युवा के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़े हो रहे हैं जिसे नौकरी चाहिए शिक्षा चाहिए अवसर चाहिए और सबसे ज्यादा चाहिए कोई ऐसा नेता जो उसकी भाषा समझता हो।
सात राज्यों में भाजपा का मिशन 27, जेन जी पर खास नजर
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने चुनावी मैदान में उतरने से पहले अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश—इन सात राज्यों के लिए नई संगठनात्मक और चुनावी रणनीति तैयार की गई है। इस पूरी रणनीति का सबसे दिलचस्प पहलू है भाजपा का जेन जी यानी नई युवा पीढ़ी पर बढ़ता फोकस। पार्टी की योजना कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक सीधे पहुंच बनाने की है। इसके लिए विशेष यूनिवर्सिटी आउटरीच और युवा संवाद कार्यक्रमों पर जोर दिया जाएगा। यानी भाजपा अब सिर्फ रैलियों और पारंपरिक राजनीतिक कार्यक्रमों के भरोसे नहीं रहना चाहती, बल्कि उस युवा तक पहुंचने की तैयारी में है, जिसकी राजनीति अब मोबाइल स्क्रीन, सोशल मीडिया और कैंपस की बहसों से भी तय होती है। रणनीति का दूसरा बड़ा आधार बूथ सशक्तिकरण है। हर बूथ को चुनावी जीत का केंद्र बनाने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम तैयार करने की योजना है। इसके साथ ही सामाजिक समीकरणों पर माइक्रो मैनेजमेंट किया जाएगा। ओबीसी, दलित और युवा मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए विधानसभा स्तर पर डेटा आधारित फीडबैक और लगातार मॉनिटरिंग की रणनीति अपनाई जाएगी।
यही से बीजेपी की कहानी शुरू होती है
वह बीजेपी जिसने वर्षों तक सोशल मीडिया की राजनीति को विपक्ष से कहीं बेहतर तरीके से समझा अब उसी डिजिटल मैदान में नई तैयारी करती दिखाई दे रही है। जेन जी तक पहुंचने की बात हो रही है। युवाओं के लिए अलग पहुंच की जरूरत महसूस की जा रही है। सवाल इसलिए उठता है कि आखिर यह अचानक क्यों हो रहा है। क्या राजनीति का मौसम बदल रहा है या फिर राहुल गांधी ने उस जमीन पर कदम रख दिया है जिसे बीजेपी अब तक अपनी मजबूत डिजिटल ताकत मानती रही बीजेपी इस कहानी में अभी तक सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत थी। लेकिन राहुल गांधी की टीम और उनके नये प्रोग्राम ने बीजेपी की इस ताकत को कम करना शुरू कर दिया है।




