‘अखिलेश के बहकावे में न आएं महिलाएं’, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने क्यों कही ये बात?

यूपी 2027 चुनाव से पहले बरेली में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने महिलाओं से अखिलेश यादव के वादों पर भरोसा न करने की अपील की। महिलाओं को आर्थिक सहायता के ऐलान पर सियासत तेज है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिख रही है। बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने महिलाओं से सपा प्रमुख अखिलेश यादव के वादों पर भरोसा न करने की अपील की। उन्होंने मुस्लिम समाज के राजनीतिक योगदान का हवाला देते हुए सपा नेतृत्व पर सवाल उठाए।

महिलाओं के आर्थिक वादों पर गरमाई सियासत

दरअसल, महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के मुद्दे पर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से महिलाओं को 50 हजार रुपये देने के ऐलान के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सत्ता में आने पर महिलाओं को 40 हजार रुपये देने की घोषणा किए जाने की बात कही।

इन्हीं घोषणाओं को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिशों के तौर पर इन बयानों को देखा जा रहा है।

मौलाना बोले- अखिलेश के बहकावे में न आएं महिलाएं

बरेली में मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने महिलाओं से अखिलेश यादव के कथित वादों के बहकावे में नहीं आने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज ने अखिलेश यादव और उनके परिवार को सत्ता तक पहुंचाने में योगदान दिया, लेकिन उनके मुताबिक समाज को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।

मौलाना ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि यदि मुस्लिम समाज के लिए पर्याप्त काम नहीं हुआ तो महिलाओं के लिए किए जा रहे वादों पर कैसे भरोसा किया जाए।

2027 से पहले महिला वोट पर बढ़ी नजर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला मतदाता लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं से जुड़े आर्थिक वादे और योजनाएं राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के बयान ने इसी सियासी बहस को और हवा दी है। हालांकि, अलग-अलग दलों के चुनावी वादों और उनकी व्यवहारिकता का अंतिम आकलन उनके आधिकारिक घोषणापत्र और नीतिगत प्रस्ताव सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

रिपोर्ट – सुनील सक्सेना, बरेली

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