भारत में नहीं दिखेगा 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण, स्टर्जन मून के साथ होगा खास खगोलीय संयोग
गोरखपुर में अगस्त की पूर्णिमा इस बार खगोल प्रेमियों के लिए खास रहने वाली है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गोरखपुर में अगस्त की पूर्णिमा इस बार खगोल प्रेमियों के लिए खास रहने वाली है।
28 अगस्त को आसमान में स्टर्जन मून दिखाई देगा और इसी दिन वर्ष 2026 का दूसरा एवं अंतिम चंद्र ग्रहण भी घटित होगा। हालांकि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं, बल्कि गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। भारत में ग्रहण के समय चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए यहां से ग्रहण का प्रत्यक्ष नजारा नहीं देखा जा सकेगा।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 28 अगस्त की पूर्णिमा भारतीय समयानुसार सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर चरम पर होगी। इस समय भारत में दिन रहेगा। इसलिए पूर्णिमा के सटीक चरम और चंद्र ग्रहण दोनों को भारत से प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा। हालांकि रात में सूर्यास्त के बाद पूर्णिमा का चमकदार चांद आसानी से देखा जा सकेगा।
सुबह 6:54 बजे शुरू होगा ग्रहण
28 अगस्त के चंद्र ग्रहण की पूरी अवधि भारतीय समय के अनुसार सुबह 6:54 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगी। आंशिक ग्रहण सुबह 8:04 बजे शुरू होगा और 9:43 बजे ग्रहण का चरम होगा। इसके बाद आंशिक चरण 11:22 बजे समाप्त होगा, जबकि उपछाया चरण दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगा। ये समय पूरे विश्व में होने वाली घटना को भारतीय समय में व्यक्त करते हैं; भारत में उस समय चंद्रमा दिखाई नहीं देगा।
नासा के आंकड़ों के अनुसार ग्रहण की आंशिक अवस्था करीब 3 घंटे 18 मिनट की होगी। अधिकतम ग्रहण के समय चंद्रमा का लगभग 93 प्रतिशत भाग पृथ्वी की गहरी छाया में होगा। इसी कारण यह ग्रहण काफी गहरा आंशिक ग्रहण होगा और जहां से दिखाई देगा, वहां चंद्रमा का बड़ा हिस्सा लाल-तांबे जैसा नजर आ सकता है।
क्या है स्टर्जन मून
अगस्त की पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से स्टर्जन मून कहा जाता है। यह नाम उत्तरी अमेरिका की परंपराओं से जुड़ा है। अगस्त के दौरान ग्रेट लेक्स और आसपास के क्षेत्रों में स्टर्जन मछलियों की उपलब्धता अधिक होने के कारण इस पूर्णिमा को यह नाम मिला। अलग-अलग संस्कृतियों में अगस्त की पूर्णिमा के लिए ग्रेन मून, कॉर्न मून, फ्रूट मून और बारले मून जैसे नाम भी प्रचलित रहे हैं।
क्यों नहीं दिखाई देगा ग्रहण
चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के समय संभव होता है, लेकिन हर पूर्णिमा को ग्रहण नहीं होता। इसका प्रमुख कारण चंद्रमा की कक्षा का पृथ्वी की कक्षा के तल से लगभग पांच डिग्री झुका होना है। ज्यादातर पूर्णिमाओं में चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है। जब पूर्णिमा के समय सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा पर्याप्त रूप से एक ही ज्यामितीय व्यवस्था में आ जाते हैं और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है, तभी चंद्र ग्रहण बनता है।
28 अगस्त को ऐसी ही स्थिति बनेगी। हालांकि ग्रहण का समय भारत में दिन के दौरान होने और चंद्रमा के क्षितिज के नीचे रहने के कारण भारतीय दर्शक इसे नहीं देख सकेंगे। NASA के अनुसार यह ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के बड़े हिस्सों तथा प्रशांत क्षेत्र से दिखाई देगा।
पूर्णिमा के समय चांद क्यों दिखता है गोल
पूर्णिमा वह अवस्था है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के लगभग विपरीत दिशाओं में होते हैं और चंद्रमा का पृथ्वी की ओर वाला प्रकाशित भाग लगभग पूरा दिखाई देता है। पूर्णिमा का चंद्रमा सामान्यतः सूर्यास्त के आसपास पूर्वी आकाश में उगता है और पूरी रात आकाश में दिखाई देता है।
28 अगस्त को पूर्णिमा का सटीक क्षण सुबह होने के कारण उस समय चंद्रमा भारत के आकाश में नहीं होगा। इसके बावजूद सूर्यास्त के बाद चंद्रमा लगभग पूर्ण अवस्था में दिखाई देगा और सामान्य दर्शकों को वह पूर्ण गोल चांद जैसा ही नजर आएगा।
ग्रहण के दौरान चांद लाल क्यों दिखता है
जहां से 28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, वहां चंद्रमा का पृथ्वी की गहरी छाया में गया हिस्सा गहरा या लाल-नारंगी नजर आ सकता है। पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को बिखेरता है और लाल-नारंगी तरंगदैर्ध्य अपेक्षाकृत अधिक आसानी से वायुमंडल से होकर चंद्रमा तक पहुंचते हैं। हालांकि इस घटना को पूर्ण चंद्र ग्रहण वाला ‘ब्लड मून’ कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा, क्योंकि 28 अगस्त का ग्रहण आंशिक है।
चंद्रमा की आठ अवस्थाएं
चंद्रमा की प्रमुख चार अवस्थाएं अमावस्या, प्रथम चतुर्थांश, पूर्णिमा और तृतीय चतुर्थांश हैं। इनके बीच चार मध्यवर्ती अवस्थाएं—बढ़ता अर्धचंद्र, बढ़ता गिबस, घटता गिबस और घटता अर्धचंद्र—आती हैं। इन सभी अवस्थाओं का एक पूरा चक्र लगभग 29.5 दिन में पूरा होता है।
खगोलविदों के अनुसार चंद्रमा हमेशा एक ही चेहरा पृथ्वी की ओर रखता है, लेकिन उसकी कक्षा और गति के कारण हमें समय के साथ चंद्र सतह का लगभग 59 प्रतिशत भाग देखने का अवसर मिलता है। इस घटना को लिब्रेशन कहा जाता है।
दुनिया के कई हिस्सों में दिखेगा खगोलीय नजारा
28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, लेकिन अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के बड़े हिस्सों सहित पृथ्वी के उन क्षेत्रों में इसका दृश्य मिलेगा जहां उस समय रात होगी। खगोल प्रेमी ऑनलाइन लाइव प्रसारण के माध्यम से भी इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे।
इसलिए 28 अगस्त की रात भारत में भले ही चंद्र ग्रहण का नजारा नहीं मिलेगा, लेकिन स्टर्जन मून की चमकदार पूर्णिमा का चांद आसमान में जरूर आकर्षण का केंद्र रहेगा।
रिपोर्ट- अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर


