AI बदलेगा दुनिया, लेकिन इंसानी सोच का क्या होगा? MMUT में विशेषज्ञों ने बताया रास्ता

गोरखपुर के MMUT में IEEE iSmartComp-2026 का समापन हुआ। विशेषज्ञों ने AI को मानव क्षमता बढ़ाने और समाज में बदलाव लाने के लिए इस्तेमाल करने पर जोर दिया। 1369 में से 225 शोधपत्र चुने गए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से दुनिया बदल रही है, लेकिन सवाल यह है कि इस बदलाव की दिशा कौन तय करेगा? गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMUT) में आयोजित IEEE इंटरनेशनल कांफ्रेंस iSmartComp-2026 के समापन पर विशेषज्ञों ने AI को मानव क्षमता बढ़ाने और समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने का माध्यम बनाने पर जोर दिया।

AI के दौर में इंसानी सोच जरूरी

दो दिवसीय सम्मेलन में AI, स्मार्ट कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी प्रबंधन और उभरती तकनीकों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। अमेरिका स्थित कृष्णा इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स के निदेशक प्रो. गोपाल टीके कृष्णा ने कहा कि AI मानव बुद्धिमत्ता की यात्रा का आधुनिक चरण है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मौलिक सोच और रचनात्मकता बनाए रखने की अपील की। कंप्यूटिंग के विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक गणना को तेज कर सकती है, लेकिन बुनियादी गणितीय और तार्किक क्षमता मजबूत रखना जरूरी है। बड़े डाटा सेंटरों में ऊर्जा और पानी की खपत को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई।

युवाओं के लिए AI बड़ा अवसर

रिलायंस इंटेलिजेंस, बेंगलुरु के AI आर्किटेक्ट और MMUT के पूर्व छात्र इंजीनियर रोहित कमल सक्सेना ने कहा कि युवाओं को तय करना होगा कि AI का इस्तेमाल किस दिशा में किया जाए। तकनीक को मानव प्रतिभा बढ़ाने का साधन बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज संसाधनों से ज्यादा सीखने की इच्छा और निरंतर प्रयास मायने रखते हैं। MMUT का विद्यार्थी भी वैश्विक संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है।

1369 शोधपत्र आए, 225 का चयन

कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि तकनीक को सिर्फ नया होने के कारण नहीं, बल्कि वास्तविक बदलाव लाने की क्षमता के आधार पर अपनाना चाहिए। उन्होंने शोध को उपयोगी तकनीक और समाधान में बदलने पर जोर दिया।

कन्वेनर प्रो. शिव प्रकाश के अनुसार सम्मेलन में 1369 शोधपत्र प्राप्त हुए, जिनमें कठोर समीक्षा के बाद 225 शोधपत्र चुने गए। आयोजन का उद्देश्य शोध उत्कृष्टता, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना था। सम्मेलन में शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों की भागीदारी रही।

रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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